उज्जैन। तोपखाने पर नवंबर 1998 में धार्मिक उन्माद फैलाने वाला भाषण देने के मामले में शनिवार को कोर्ट ने प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन सिमी प्रमुख सफदर नागौरी व एक अन्य को तीन साल कैद की सजा सुनाई है। एक अन्य आरोपित की ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है। भोपाल जेल में बंद होने के कारण सफदर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सजा सुनाई गई। उप संचालक अभियोजन डॉ. साकेत व्यास ने बताया कि महाकाल थाने के तात्कालीन टीआई जीजी पांडेय 5 नवंबर 1998 को सर्कल भ्रमण कर रहे थे। तोपखाना क्षेत्र में एक सभा चल रही थी। जिसमें सिमी प्रमुख सफदर पिता जहीरूल हसन नागौरी निवासी महिदपुर, मोहम्मद मुनीर पिता मुन्नबर निवासी शाहपुरा हबीबगंज भोपाल व सैयद सलाउद्दीन ने भड़काऊ भाषण दिया था।

धार्मिक उन्माद फैलाने वाले भाषण को लेकर महाकाल पुलिस ने धारा 153 क के तहत केस दर्ज किया था। मामले में शनिवार को कोर्ट ने सफदर व मोहम्मद मुनीर को तीन-तीन साल कैद व एक-एक हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।

माफी योग्य नहीं थे भाषण

सजा के प्रश्न पर सफदर व अन्य के वकील ने कोर्ट में निवेदन किया था कि सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए। प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी कर रहे एडीपीओ महेश चंद्रावत ने कहा कि सभा में उपस्थित व्यक्तियों को सांप्रदायिक भावना भड़काने वाले भाषण दिए गए, जो कि माफी योग्य नहीं है। इन्हें कठोर से कठोर सजा दी जाना चाहिए। इस पर कोर्ट ने सफदर व मुनीर को तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनाई सजा

सफदर नागौरी फिलहाल भोपाल जेल में बंद है। शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सफदर को सजा सुनाई गई। इसके अलावा मोहम्मद मुनीर कोर्ट में पेश हुआ था। तीन साल की सजा होने के कारण उसे हाथों-हाथ जमानत भी मिल गई। तीसरे आरोपित सैयद सलाउद्दीन की ट्रायल के दौरान मृत्यु हो चुकी है।