उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। तीर्थपुरी अवंतिका में शुक्रवार को जलझूलनी एकादशी मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन माता यशोदा जलवा पूजन के लिए तीर्थ पर जाती हैं। शहर के प्रमुख श्रीकृष्ण मंदिरों से डोल चलसमारोह निकले जाते हैं। कोरोना संक्रमण के चलते प्रशासन ने इस बार भी फूलडोल चल समारोह पर रोक लगा दी है। भक्तों को मंदिरों में ही डोल के दर्शन होंगे।

सिंधिया देव स्थान ट्रस्ट के प्रसिद्ध गोपाल मंदिर की परंपरा अनुसार जलझूलनी एकादशी पर भगवान गोपालजी राधा,रुक्मिणी के साथ डोल में विराजित होकर भक्तों को दर्शन देने निकलते हैं। भगवान को सिंघाड़े की माला धारण कराई जाती है। शाम 4 बजे गोपाल मंदिर से डोल चल समारोह की शुरुआत होती है। बीते वर्ष की तरह इस बार भी भक्तों को मंदिर के सभा मंडप में डोल के दर्शन होंगे। छोटा सराफा स्थित श्री लक्ष्‌मी नृसिंह मंदिर देवस्थान ट्रस्ट द्वारा भी डोल नहीं निकालने का निर्णय लिया गया है। महेल लड्ढा व सुरेश काकाणी ने बताया कोरोना संक्रमण के चलते इस बार भी डोल चल समारोह स्थगित किया गया है। भक्त मंदिर आकर डोल के दर्शन कर सकते हैं।

तेजाजी महाराज को चढ़ाए छत्री निशान

उज्जैन। तेजादशमी पर गुरुवार को शहर के तेजाजी महाराज के मंदिरों में आस्था के मेले लगे। भक्तों ने मान्यता पूरी होने पर भगवान को छत्री निशान चढ़ाए। चेरी टेबल हास्पिटल, गऊघाट, मक्सीरोड, कोठी के समीप स्थित तेजाजी मंदिरों में सैंकड़ों भक्त दर्शन के लिए उमड़े।

तेजाजी की कथा का मंचन

रुनिजा। गुरुवार सत्यवीर तेजाजी महाराज के बलिदान दिवस पर गजनीखेड़ी के तेजाजी मंदिर एवं पिपली चौक में तेजाजी की कथा का मंचन किया गया व मन्नात के निशान चढ़ाए गए। तेजाजी भक्त मंडल के मोहनलाल चौधरी ने बताया कि विगत 56 वर्ष से नानूराम बा उस्ताद एवं हरिशचंद्र चौधरी मंडली द्वारा गजनीखेड़ी पिपली चौक में कथा का मंचन किया जा रहा है। विगत रात्री 9 से आज दिन के 12 बजे तक मंचन किया गया। इसी प्रकार गांव से बाहर स्थित तेजाजी मंदिर पर भी सुरसुरा मंडल द्वारा कथा का मंचन किया गया। वर्ष भर में विषैले जानवरों के दंश पर बांधी गई तांतियों को काटा गया।पश्चात वीर तेजाजी की आरती की गई। रुनिजा में कुंड स्थित तेजाजी मंदिर पर तेजाजी की कथा का मंचन कर भक्तों ने मन्नात के निशान चढ़ाए व तांतिया काटी गई।

Posted By: Nai Dunia News Network

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