उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के पीछे आकार ले रही महाकाल-रूद्रसागर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट एप्रोच (मृदा) परियोजना, दिसंबर-2021 तक पूरी करने को दोगुनी रफ्तार से काम किया जा रहा है। परियोजना स्थल पर पहले की बजाय अब दोगुना कारीगर काम कर रहे हैं। रूद्रसागर किनारे फाइबर निर्मित भगवान शिव की विशाल मूर्तियों की स्थापना कर दी गई है। इन पर चढ़ाया जाने वाला रंग भी तय कर लिया गया है। उज्जैन स्मार्ट सिटी कंपनी के अधीक्षण यंत्री धर्मेंद्र वर्मा और ठेकेदार विजय पड़वाल के अनुसार कुछ शिव मूर्तियों का रंग सफेद और कुछ का रंग कापर स्टीक होगा।

मालूम हो कि महाकालेश्वर मंदिर परिसर को आठ गुना बड़ा कर खूबसूरत बनाया जा रहा है। ये काम उज्जैन स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा तैयार मृदा परियोजना अंतर्गत दो चरणों में कराया जा रहा है। पूरी परियोजना का बजट 700 करोड़ रुपये है। पहले चरण में 97 करोड़ रुपये से मंदिर के पीछे बड़ा रूद्रसागर तरफ महाकाल मंदिर पहुंच के लिए पुरातन स्वरूप में नया द्वार, 920 मीटर लंबा गलियारा, शिव अवतार वाटिका, कमल तालाब, सप्तऋषि वन, व्यावसायिक दुकानों का निर्माण किया जा रहा है। शिव महापुराण में वर्णित घटनाओं से जुड़ी भगवान शिव की 190 विशाल मूर्तियों की स्थापना की जा रही है। वो मूर्तियों जिनका निर्माण पत्थर और फाइबर से किया गया है। गलियारे में दीवारों पर 100 मिलीमीटर मोटे लाल पत्थर पर 60 मिलीमीटर गहरे भित्ती चित्र उकेरे जा रहे हैं। हर चित्र के नीचे घटना का संदर्भ संस्कृत में उत्कीर्ण कराया जा रहा है। मूर्तियों पर कौनसा रंग होगा, इस पर विभिन्नाा विद्वानों का मत लेने के बाद उज्जैन स्मार्ट सिटी कंपनी ने तय किया है कि शिव मूर्तियों का रंग हल्का ब्राउन मेट फिनिशिंग लिए कापर शेड लिए होगा। पशु-पक्षियों व अन्य साजो-सामान का रंग प्राकृतिक होगा। यानी जैसे वो दिखते हैं, हूबहू वैसे ही दिखाए जाएंगे। लैंड स्केपिंग के साथ मूर्तियों का रंग-रोंगन कार्य वर्षाकाल गुजरने के बाद शुरू किया जाएगा। निर्माण ठेकेदार एमपी बाबरिया कंपनी के मैनेजर संजय झालावाड़िया ने कहा है कि 31 दिसंबर तक हर हाल में काम पूरा करवा लिया जाएगा।

भारत माता मंदिर के पीछे कीजिए शिव के एकादश स्वरूप के दर्शन

भारत माता मंदिर के पीछे, जहां से भक्त निवास का प्रवेश मार्ग है, उसके ठीक सामने आप भगवान शिव के एकादश स्वरूप के दर्शन कर सकेंगे। मूर्तियों की स्थापना कर दी गई है। पास ही भगवान शिव की बारात सजी है। नंदी पर सवार भगवान शिव, उनके आगे मंगल वाद्य यंत्र बजाते देवता मन लुभा रहे हैं। सती विरह का द्श्य भी यहां आपको मूर्ति स्वरूप में देखने को मिलेगा। लाल पत्थर और फाइबर से बनी इन मूर्तियां की ऊंचाई 6 से 25 फीट तक है, जिनका निर्माण गुजरात, ओडिसा के कलाकारों ने किया है।

दूसरे चरण में होंगे ये कार्य

- मृदा प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में महाराजवाड़ा स्कूल भवन को कुंभ संग्रहालय और हैरिटेज धर्मशाला के रूप में परिवष्तत किया जाएगा।

-रूद्रसागर का जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसे शिप्रा के शुद्ध पानी से भरा जाएगा। फ्रंट लेक एरिया का विकास एवं सुंदरीकरण किया जाएगा।

-पार्किंग, रामघाट मार्ग सुंदरीकरण, हरिफाटक ब्रिज का चौडतीकरण, रेलवे अंडरपास का निर्माण किया जाएगा। रूद्रसागर पैदल पुल, बेगमबाग मार्ग का विकास, महाकाल पहुंच मार्ग का उन्नाा्‌यन किया जाएगा।

-क्षेत्र में सांस्कृतिक हाट का निर्माण होगा। रामघाट पर सिंहस्थ थीम आधारित डायनेमिक लाइट शो किया जाएगा। रूद्रसागर पर 210 मीटर लंबा पैदल पुल बनाया जाएगा, जो महाकाल थीम पार्क को जोडेंगे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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