उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर को ऑनलाइन सुविधाओं के क्षेत्र में स्कॉच, ट्रिप एडवाइजर तथा एक्सलेंस ई गवर्नेंस जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। लेकिन बीते कुछ समय से मंदिर की ऑनलाइन व्यवस्था खराब है। एक्सपर्ट वेबसाइट तक अपडेट नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में मंदिर प्रशासन निजी आईटी कंपनी को हायर करने की तैयारी कर रहा है। जल्द ही व्यवस्था पटरी पर लौटेगी। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर सन 2013 में ही कम्प्यूटराइज्ड ऑनलाइन सुविधा से लेस हो गया था। भक्तों को मंदिर की वेबसाइट पर भगवान महाकाल के ऑनलाइन दर्शन होते हैं। देश विदेश में रहने वाले भक्त घर बैठे ऑनलाइन भेंट देने के साथ भस्मारती की बुकिंग करा सकते हैं। मंदिर की महाकाल धर्मशाला में कमरों की बुकिंग कराने तथा मंदिर से जुड़ी विभिन्न् जानकारी भी ले सकते हैं। लेकिन बीते कुछ समय से वेबसाइट अपडेट नहीं हो पा रही है। श्रद्धालुओं को जरूरी ऑनलाइन सुविधा भी नहीं मिल रही है।

मैन्युअल कट रही रसीद

सिंहस्थ के पहले मंदिर के सभी क्लॉकरूम कम्प्यूटराइज्ड थे। कर्मचारी सामान रखने आने वाले श्रद्धालुओं को फोटो खींचकर कम्प्यूटराइज्ड पर्ची देते थे। लेकिन सिंहस्थ के बाद व्यवस्था ध्वस्त हो गई। अब कर्मचारी श्रद्धालुओं को मैन्युअल पर्ची काटकर दे रहे हैं।

लिस्ट ऑप्शन बंद, भक्तों को नहीं मिल पा रही जानकारी

मंदिर प्रशासन ने भस्मारती व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए वेबसाइट पर लिस्ट ऑप्शन की शुरुआत की थी। देश विदेश में बैठे भक्तों को यह सुविधा खूब रास आई थी। इसकी सर्वत्र प्रशंसा भी हुई थी। वजह श्रद्धालु देश-विदेश में कहीं से भी भस्मारती की बुकिंग कराए, उन्हें लिस्ट ऑप्शन पर भस्मारती अनुमति मिलने की जानकारी उपलब्ध हो जाती थी। लेकिन कुछ समय से मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं को मिलने वाली इस महत्वपूर्ण सुविधाओं कों बंद कर दिया है।

हरसिद्धि धर्मशाला नहीं हो पाई ऑनलाइन

मंदिर समिति की महाकाल धर्मशाला पूरी तरह ऑनलाइन है। भक्त महाकाल दर्शन करने आने से एक माह पहले इस धर्मशाला में कमरों की बुकिंग करा सकते हैं। लेकिन समिति की पं.सूर्यनारायण व्यास हरसिद्धि धर्मशाला ऑनलाइन नहीं हुई है। धर्मशाला प्रभारी मैन्युअल कमरों की बुकिंग करते हैं। पारदर्शी व्यवस्था नहीं होने से आए दिन यहां विवाद की स्थिति निर्मित होती है। मंदिर समिति अब हरसिद्धि धर्मशाला को भी पूरी तरह ऑनलाइन करने की तैयारी कर रही है।

एनआईसी के भरोसे नहीं रहेगी समिति

मामले में मंदिर प्रशासक सुजानसिंह रावत ने बताया मंदिर की वेबसाइट एनआईसी की देखरेख में चल रही है। हालांकि कुछ समय से इस पर काम नहीं हो पा रहा है। इसलिए निर्णय लिया है कि मंदिर समिति एनआईसी के भरोसे नहीं रहेगी। देश की अच्छी आईटी कंपनी को हायर कर ऑनलाइन व्यवस्था का सुचारू किया जाएगा।

Posted By: Lav Gadkari