Ujjain New Collector Office: उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोठी महल के पास बने नए कलेक्ट्रेट भवन (प्रशासनिक संकुल) का लोकार्पण करने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान 26 मई को आएंगे। वे महाकाल कारिडोर का मुआयना कर राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द के आगमन की तैयारियां भी देखेंगे।

कलेक्ट्रेट भवन का निर्माण लोक निर्माण विभाग की पब्लिक इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (पीआइयू) ने किया है। निर्माण पर 27 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। भवन का निर्माण पिछले वर्ष ही पूर्ण हो जाना था, पर लाकडाउन और अन्य कारणों से नहीं हो सका। चार मंजिला भवन के हर कक्ष में प्राकृतिक हवा, पानी, रोशनी, अग्नि सुरक्षा का अच्छा इंतजाम है। भूतल पर तकरीबन 40 कार, 500 बाइक पार्क करने को जगह है। सभी फ्लोर पर आने-जाने के लिए पांच लिफ्ट लगी है। कलेक्टर आशीष सिंह के निर्देश के बाद सभी विभागीय अधिकारियों ने कुछ कक्षों में अपना सामान भी शिफ्ट करवा लिया है।

भवन के एक फ्लोर पर तहसील कार्यालय, दूसरे फ्लोर पर कलेक्टर कार्यालय और तीसरे फ्लोर पर संभागायुक्त कार्यालय संचालित होगा। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति 29 मई को सुबह 10 बजे कालिदास संस्कृत अकादमी के पंडित सूर्यनारायण व्यास संकुल हाल में होने वाले अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन के अधिवेशन में सम्मिलित होने आ रहे हैं। वे महाकालेश्वर मंदिर में पूजन कर शाम 4 बजे मंगलनाथ क्षेत्र स्थित धन्वंतरि आयुर्वेद महाविद्यालय के नए भवन का लोकार्पण भी करेंगे। अगले माह जून में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा महाकाल कारिडोर का लोकार्पण कार्यक्रम भी तय है। इसे लेकर विकास कार्य को तेजी से पूर्ण किया जा रहा है। दोनों अतिविशिष्ट मेहमानों की खातिरदारी के लिए मंदिर, मार्ग, सभा स्थल को सजाया जा रहा है।

बगैर बीम-कालम खड़े किए बनाई जा रही सुरक्षा दीवार

नए कलेक्ट्रेट भवन (प्रशासनिक संकुल) की सुरक्षा दीवार बगैर बीम-कालम डाले बनाई जा रही है। कारण, मजबूत बाउंड्रीवाल बनाने के लिए 90 लाख रुपये का प्रस्ताव पास नहीं होना है। चूंकि सीएम आ रहे हैं, इसलिए जुगाड़ स्वरूप सीधे दो फीट गड्ढा खुदवाकर सीमेंट-कांक्रीट की रेडिमेड दीवार खड़ी की जा रही है। जानकारों का कहना है कि तेज बारिश में मिट्टी का कटाव होने पर इस तरह की बाउंड्रीवाल अमूमन ढह जाती है।

भवन में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और सोलर सिस्टम लगना बाकी

नए भवन में जल संरक्षण के लिए रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और बिजली बचत के लिए सोलर पैनल सिस्टम लगना बाकी है। विभागीय अधिकारी का कहना है कि भवन की छत का पानी जमीन में उतारने को पाइपलाइन कार्य तो कर लिया गया है मगर जमीन पर सोकपीट यानी गड्ढा बनाना बाकी है। सोलर पैनल सिस्टम आगामी चरण में लगाया जा सकता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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