(लीड- खबर)

कभी रुद्रसागर तक था शिप्रा का फैलाव, कमल खिलते थे, आज स्थिति बदहाल (संपादित)

प्रोजेक्ट की तैयारीः रुद्रसागर को पुनजीर्वित करने के लिए सौंपी रिपोर्ट

उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। एक समय था जब मोक्षदायिनी शिप्रा नदी का फैलाव सप्तसागरों में शुमार रुद्रसागर तक था। इसमें कमल खिला करते थे। सिंगाड़े की खेती भी होती थी। श्रद्घालु, अधिकमास में इसकी परिक्रमा कर जल का आचमन करते थे, लेकिन आज स्थिति बदहाल है। आचमन तो दूर, लोग इसके करीब खड़े रहना भी पसंद नहीं करते। क्योंकि रुद्रसागर में सीवरेज का गंदा, बदबूदार पानी भरा है। जलकुंभी जमी है। जिन जमीनी रास्तों से रुद्रसागर में पानी आता था, वह बंद हो गए हैं।

ये जानकारी जल शक्ति मंत्रालय की वैपकोस कंपनी ने रुद्रसागर को पुनजीर्वित करने को किए जियो टेक्निकल, बेथीमैट्रिक और भौगोलिक सर्वे में जुटाई है। इसकी प्रारंभिक सर्वे रिपोर्ट मंगलवार को उज्जैन स्मार्ट सिटी कंपनी को सौंप दी गई है। कहा है कि फाइनल रिपोर्ट अगले महीने सौंप दी जाएगी। रिपोर्ट में उल्लेखित किया है कि ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र में भूजल प्रचुर मात्रा में है। रुद्रसागर को पुनर्जीवित करने से पर्यावरण में सुधार होगा।

238 हैक्टेयर का कैचमेंट एरिया

रुद्रसागर का कैचमेंट एरिया 238 हैक्टेयर का है। इसमें जल संग्रहण पहले 31 हैक्टेयर में होता था, लेकिन अब 18 हैक्टेयर में हो रहा है। उपग्रहीय चित्रों, एसआरटीएम डेटा के अध्ययन से पता चला है कि शिप्रा नदी, पुरातनकाल में गउघाट-रुद्रसागर से होती हुई रामघाट से उत्तरी तट से होकर बहती थी। वर्तमान में यह गउघाट-भूखी माता मंदिर, नृसिंह घाट होते हुए रामघाट होकर बहती है। शिप्रा नदी का भूवैज्ञानिक गतिविधियों के कारण रास्ता बदल गया है। पुरातत्व एवं ऐतिहासिक प्रमाणों में रुद्रसागर के जल का आचमन करने का जिक्र है। अध्ययन के माध्यम से यह साफ हो गया है कि पर्यावरणीय भूजल प्रबंधन कर रुद्रसागर को पुनर्जीवित किया जा सकता है।

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10 लाख क्यूबिक मीटर गाद निकालने की सलाह

रुद्रसागर में 12 माह पानी रहे और वह भी कांच की तरह साफ, इसके लिए वैपकोस कंपनी ने इसके तल से 10 लाख क्यूबिक मीटर गाद निकालने, इसे बारिश के जल से भरने की सलाह दी है। कहा है कि 18.4 हैक्टेयर में फैले रुद्रसागर से गाद निकालने से इसकी जल धारण क्षमता 17,77, 373 क्यूबिक मीटर हो जाएगी। वैज्ञानिक विधि से गणना करने पर पाया है कि 17,16,338 क्यूबिक मीटर पानी, रुद्रसागर के कैचमेंट एरिया वाले कुएं, बड़ी इमारतों की छतों से पाइपलाइन के जरिये रुद्रसागर में लाया जा सकता है। इसके अलावा वर्षाजल से 16,626 क्यूबिक मीटर पानी मिल जाएगा। सर्वे कार्य डॉ. उदय रोमन, वैज्ञानिक सलाहकार देवेंद्र जोशी, डॉ. एके विश्वकर्मा ने किया है। इनके साथ इंजीनियर एसजी फड़के, गौरव चौहान, आदित्य पाटीदार, मोहित शर्माा, आशीष जैन, अमित चौहान थे।

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विकास की ये है कार्य योजना

रुद्रसागर, बारह मास साफ वर्षा के जल से भरा रहे इसके लिए पाइपलाइन का नेटवर्क बिछाना। इसकी कनेक्टिविटी शिप्रा नदी और कैचमेंट एरिया की 1500 वर्ग मीटर वाली बड़ी छतों से करना। स्वरूप में घाट का निर्माण। फ्रंट लेक व्यू बनाना, जहां लेजर शो और आकर्षक बैठक व्यवस्था बनाना। संस्पेंशन ब्रिज का निर्माण। मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण। रुद्रसागर का पानी कांच की तरह साफ रहे, इसके लिए बायोलॉजिकल ट्रीटमेंट करना।

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40 के दशक तक स्थिति ठीक थी

महाकाल मंदिर के समीप रहने वाले 83 वर्षीय ज्योतिषविद् पं. आनंदशंकर व्यास ने बताया कि 40 के दशक तक रुद्रसागर की स्थिति फिर भी ठीक थी, मगर उसके बाद दशा बिगड़ती गई। जब 7-8 वर्ष का था तब याद है कि पिताजी, हमारी बुआ को योगीपुरा ले जाते थे तो रुद्रसागर को डोंगी में बैठकर पार करते थे। क्योंकि तब रुद्रसागर एक था। बीच में पुलियानुमा सड़क नहीं बनी थी। तब रूद्रसागर में कमल-कुमुदनी खिला करते थे। सिंगाड़े की खेती होती थी। सन्‌ 1945 के महाकुंभ सिंहस्थ में पहली बार रुद्रसागर का उपयोग स्वामी करपात्रि महाराज का शिविर लगाने के लिए हुआ था। इसके बाद शंकराचार्यों के शिविर लगाए जाने लगे।

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फोटो 20 यूजेजे 02- वर्तमान में दूषित जल और जलकुंभी से भरा रुद्रसागर। : नईदुनिया

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रेलकर्मी बोले- बिना मास्क घर से न निकलें, खुद पहनें और को पहनाएं (संपादित)

नईदुनिया के अभियानः 'अभी मास्क ही वैक्सीन' से रोज जुड़े रहे संगठन

उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। 'नईदुनिया' के अभियान- अभी मास्क ही वैक्सीन से संगठन और शहरवासी जुड़ते जा रहे हैं। मंगलवार दोपहर रेल कर्मचारियों ने दोपहर में मास्क पहनने और न पहनने वालों को पहनाने का संकल्प लिया। सभी ने अपील की बिना मास्क पहने घर से न निकलें, खुद पहनें और दूसरों को भी पहनाएं। कार्यक्रम उज्जैन रेलवे स्टेशन पर किया गया। मजदूर संघ के उपाध्यक्ष शेख जमील, सचिव अभिलाष नागर, अशोक मेहरा, विनोद यादव, अविनाश श्रीवास, नानकसिंह, देवेंद्र प्रधान, राजकुमार सोलंकी, मनोज चौधरी, विनोद शर्मा, हेमंत पाल आदि उपस्थित थे।

अभियान से मंगलवार को मॉडल हायर सेकंडरी स्कूल का स्टाफ भी जुड़ गया। प्राचार्य पदमसिंह पटेल सहित शिक्षक नीतु श्रीवास्तव, गायत्री राय, ज्योत्सना सोनी, योगीता सेन, श्वेता तिवारी, तेजराम राठौर एवं विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि वे मास्क पहनेंगे और जो नहीं पहनते, उन्हें पहनाएंगे। प्राचार्य पटेल ने शिक्षकों से कहा कि जब भी घर से बाहर निकले मास्क पहनें। क्योंकि संक्रमण से बचना है तो मास्क पहनना, दो गज दूरी बनाए रखना जरूरी है। अभी मास्क ही वैक्सीन है।

रावण को भी पहनाएंगे मास्क (बॉक्स)

कई संगठन मास्क की उपयोगिता समझाने के लिए नए-नए उपाय कर रहे हैं। इसी कड़ी में सिद्घवट युवा मंच ने तय किया है कि कोरोना संक्रमण की वजह से इस साल सिद्घवट पर प्रतीकात्मक रूप से 101 की बजाय सिर्फ 11 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन करेगा। लोग मास्क पहने, दो गज की दूरी बनाए रखे और हाथों को सैनिटाइज करते रहे, ये संदेश देने को पुतले के दसों चेहरे पर मास्क पहनाया जाएगा। हाथ में सैनिटाइजर की बोतल पकड़ाई जाएगी। सिद्घवट युवा मंच के अध्यक्ष राघवेंद्र चतुर्वेदी और संयोजक हेमंत शास्त्री ने बताया कि रावण दहन कार्यक्रम का लाइव प्रसारण संस्था पदाधिकारियों के फेसबुक पेज पर किया जाएगा। प्रतिकात्मक रूप से ही राम-लक्ष्मण, हनुमान, कोरोना नियमों का पालन करने की अपील लोगों से करेंगे। वे खुद भी मास्क पहनकर आएंगे।

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फोटो 20यूजेजे-08 : मास्क पहनने का संकल्प लेते हुए मॉडल स्कूल का स्टाफ।

फोटो 20यूजेजे-09 : मास्क पहनने का संकल्प लेते रेल कर्मचारी।

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मांगों को लेकर रेलवे कर्मचारी संगठनों ने किया प्रदर्शन(संपादित)

उज्जैन। रेलवे कर्मचारियों की मांगों को लेकर मंगलवार को स्टेशन पर रेलवे कर्मचारी संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। सुबह 11 बजे रेलवे मजदूर संघ तथा शाम 5 बजे रेलवे एम्प्लाइज यूनियन ने एकीकृत क्रू लॉबी के सामने जमकर नारेबाजी की। दोनों संगठनों की मांग है कि सरकार ने हाल ही रात्रि भत्ता बंद कर दिया है, जिसे वापस शुरू किया जाना चाहिए। रेलवे कर्मचारियों ने मांग की कि बोनस की घोषणा तत्काल की जाए, महंगाई भत्ते पर लगी रोक को तुरंत हटाया जाए, नई पेंशन योजना बंद कर पुरानी पेंशन स्कीम दोबारा लागू की जाए, रेलवे का निजीकरण बंद किया जाए, रेलवे कर्मचारियों को भी 50 लाख रुपये का विशेष बीमा कवरेज दिया जाए।

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सचित्र- नौमीश दुबे

20यूजेजे-10- स्टेशन पर प्रदर्शन करते हुए रेलवे एम्पलाइज यूनियन के सदस्य।

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देवपुरी गोस्वामी को बनाया प्रदेश मंत्री (संपादित)

बड़नगर। अखिल भारतीय गोस्वामी विकास मंच के प्रदेश अध्यक्ष महंत रामचंद्र गिरी ने बड़नगर के देवपुरी गोस्वामी को प्रदेश मंत्री नियुक्त किया है।

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फसल बीमा के प्रमाण पत्र वितरित

फोटो 20 महिदपुर रोड 1 : किसानों को बीमा प्रमाण पत्र वितरित करते विधायक बहादुरसिंह चौहान।

महिदपुर रोड। विधायक बहादुरसिंह चौहान ने मंगलवार को किसानों को फसल बीमा-2019 के प्रमाण पत्र वितरित किए। भाजपा मंडल अध्यक्ष संदीप व्यास, किसान मोर्चा मंडल अध्यक्ष हरिसिंह चूंडावत, रमेश कुमावत, रमेश मीणा, नरेंद्र कसेरा, सत्यनारायण पाटीदार, रामप्रसाद कुमावत आदि मौजूद थे।

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जीर्णोद्घार की मांग

फोटो 20तराना 01 02 : - चोपड़े की क्षतिग्रस्त मुंडेर।

तराना। तिलकेश्वर महादेव मंदिर के पास स्थित चोपड़े का जीर्णोद्घार करने की मांग क्षेत्रीय लोगों ने उठाई है। कहा है कि होलकर वंश की महारानी माता अहिल्यादेवी द्वारा तराना मं तिलकेश्वर महादेव मंदिर, तालाब, किला एवं चोपड़े का निर्माण कराया था। वर्तमान मे प्राचीन चोपड़ा अब काफी जर्जर हो गया है। चोपडे में बारिश का पानी भर जाता है। इसमें कई लोग तैराकी सीखने आते हैं। इसका पानी आसपास के किसान सिंचाई में भी उपयोग लाते हैं।

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एंकर स्टोरी

प्राचीन हिंगलाज माता मंदिर, यहां हर दिन होते 'मां' के तीन स्वरूपों के दर्शन (संपादित)

नवरात्र विशेषः बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंच रहे भक्त, कोरोना नियमों का हो रहा पालन

फोटो-

फोटो 20 महिदपुर रोड -02। हिंगलाज मंदिर

फोटो 03 महिदपुर रोड -03। हिंगलाजमाता

राकेश पंड्या. महिदपुर रोड

प्राचीन हिंगलाज माता मंदिर। मान्यता है कि यहां हर दिन मां शक्ति के तीन स्वरूप में दर्शन होते हैं। सुबह बाल्य अवस्था में, दोपहर युवा अवस्था में और शाम को वृद्घ अवस्था में। भक्त मां शक्ति की मूर्ति को चमत्कारिक मानते हैं। सभी का कहना है दूर-दराज से श्रद्घालु यहां आते और मनोफल पाते हैं। नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं। यहां कोरोना नियमों का पूरी तरह से पालन कराया जा रहा है।

मंदिर, नगर से 55 किलोमीटर दूर डेलची बुजुर्ग गांव में है। जानकार कहते हैं कि भारत में कुल चार प्राचीन हिंगलाज माता के मंदिर है। और ये चारों ही मध्यप्रदेश में है। एक डेलची बुजुर्ग में, दूसरा मंदसौर की भानपुरा तहसील के गांव हिंगलाजगढ़ में, तीसरा छिंदवाड़ा के अंबाड़ा में और चौथा रायसेन के बाड़ी में। 52 शक्तिपीठों में से एक हिंगलाज शक्तिपीठ, पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान में है जो नानी की दरगाह के नाम से जाना जाता है। विक्रम विश्वविद्यालय में पुरातत्व विभाग के विज्ञानी डॉ. रमणसिंह सोलंकी के अनुसार हिंगलाज मंदिर के पास टीले से 2 हजार वर्ष पुराना एक अखंड अन्न पात्र प्राप्त हुआ था, जो वर्तमान में त्रिवेणी संग्रहालय में सुरक्षित रखा है। इससे स्पष्ट होता है कि मंदिर के आसपास की सभ्यता 2 हजार वर्ष पुरानी है। मंदिर परमारकालीन है।

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सरकार चाहे तो मंदिर का कर सकती समुचित विकास

सरकार अगर चाहे तो हिंगलाज माता मंदिर का समुचित विकास कर सकती है, मगर इस दिशा में अब तक कोई बेहतर विकास कार्य योजना तैयार होते नहीं देखा गया है। मंदिर में नवरात्रि के दौरान अखंड ज्याति जलती है। यहां विधि-विधान से हवन-पूजन की परंपरा है। मंदिर के विकास कार्यों को लेकर अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में प्रयास किए जाएंगे।

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विहिप ने किया शस्त्र पूजन (संपादित)

उज्जैन। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और दुर्गावाहिनी ने मंगलवार को बिलोटीपुरा स्थित मुक्तेश्वरी माता मंदिर में शस्त्रपूजन कर महाआरती की। अनिल डागर, महेश तिवारी, लतारानी चौहान, सुनील डागर, राजा मालवीय, शुभम डागर, स्वाति वैश्य, सोनू डागर, सुमन मालवीय, मिहीर डागर, नेहा मिठोले, नवीन डागर, मीनासिंह चौहान, पिंटू मालवीय उपस्थित थे।

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दमा रोग चिकित्सा शिविर निरस्त

उज्जैन। हर साल शरद पूर्णिमा पर इंदिरानगर में होने वाला दमा रोग चिकित्सा शिविर इस वर्ष स्थगित किया गया है। जानकारी शिविर संयोजक डॉ. प्रकाश जोशी ने दी।

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विकास प्राधिकरण के उपयंत्री सिंह का निधन(संपादित)

उज्जैन। उज्जैन विकास प्राधिकरण के उपयंत्री अरुण सिंह का मंगलवार को निधन हो गया। वे 1999 से प्राधिकरण में सेवाएं दे रहे थे। उनके द्वारा अंजूश्री होटल के पीछे 15 सीनियर एमआईजी भवनों का प्रोजेक्ट पूरा किया जा रहा था। सीईओ सुजानसिंह रावत ने बताया कि सिंह, एक ईमानदार और पारंगत इंजीनियर थे। उनके अचानक निधन से प्राधिकरण को क्षति हुई है।

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20यूजेजे-06ः उपयंत्री अरुण सिंह

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यादे मां की संगमरमर की प्रतिमा स्थापित (संपादित)

उज्जौन। प्रजापति समाज की आराध्य श्रीयादे माता की संगमरमर की प्रतिमा की स्थापना सोमवार को श्री यादे माता मंदिर एवं धर्मशाला तीर्थस्थल रामघाट पर की गई। प्रजापति चैरासी संघ के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अशोक प्रजापत ने बताया कि इसके पूर्व प्रातः 9 बजे से दोपहर 12ः30 बजे तक स्वस्तिवाचन एवं मंत्रोधाार के साथ पूजा अभिषेक, यज्ञ एवं हवन का आयोजन किया गया। विधायक मुरली मोरवाल सहित समाजजनों ने पंचमेवा एवं दूध-घी व क्षिप्रा के पावन जल से माता का अभिषेक किया। प्रतिमा का निर्माण विश्वप्रसिद्घ मूर्तिकार अर्जुन प्रजापति (जयपुर) वालों द्वारा किया गया है। इस अवसर बद्रीलाल चावड़ा, छगनलाल चक्रवर्ती, रामचंद्र प्रजापत, किशोर तनोडिया, लीलाधर कुंभकार, मांगीलाल बिलोटिया, भगवानदास प्रजापत, नरसिंह ठेकेदार, जगदीश नगरिया, राधेश्याम बेतडलिया, रमेश मुन्नाालाल, दुलीचंद्र कवि, कैलाश बोबरिया, भेरूलाल नागझिरी, प्रकाश प्रजापत, सालगराम पटेल, प्रेम खलीफा, अर्जुन प्रजापत, गणपत टोंकवाले आदि उपस्थित थे।

सचित्र 20यूजेजे11 : श्री यादे मां।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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