उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। अपनी सिटी बसों को चलाने के लिए नगर निगम को इस बार भी ऑपरेटर नहीं मिला। बहरहाल, निगम ने एक बार फिर निविदा निकाली है। इस बार निविदा 1 फरवरी तक जमा कराई जा सकती है। मालूम हो कि केंद्र सरकार से सौगात के रूप में मिली सिटी बसों का संचालन 22 मार्च 2020 से शहर और उपनगरीय क्षेत्र में बंद हैं। वजह, सभी 89 बसें खराब होना और इन बसों को चलाने के लिए ऑपरेटर नहीं मिलना है। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार 39 सीएनजी चलित बसों को तो निगम कंडम करने की तैयारी कर चुका है। 50 डीजल बसें 50 लाख र्स्पये का मेंटेनेंस मांग रही हैं। इधर नगर निगम की उज्जैन सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (यूसीटीएसएल) कंपनी फिलहाल इस स्थिति में नहीं कि वह बसों को सुधार करवा सके। निगम ने पांच महीने पहले इन बसों को संचालित करने के लिए जो निविदा निकाली थी, वह भी तत्कालीन संभागायुक्त सह नगर निगम प्रशासक आनंद शर्मा ने पिछले माह निरस्त कर दी। क्योंकि जिस ऑपरेटर (अर्थ कनेक्ट कंपनी) ने निविदा डाली थी, उस पर पहले ही निगम के 1.56 करोड़ र्स्पये बस किराये के बकाया थे। ऐसे में डिफाल्टर को बस देना निगम प्रशासक ने उचित नहीं समझा, और दोबारा निविदा निकालने के निर्देश दिए थे।

3 फरवरी को खुलेगी

निर्देशों के पालन में दिसंबर में निविदा निकाली तो एक भी ऑपरेटर नहीं बस चलाने में रुचि नहीं दिखाई। इधर, निगम ने अपने कर्मचारियों से बस का संचालन शुरू कराया। अब एक बार फिर 25 बसों को शहरी एवं उपनगरीय क्षेत्र में चलाने को निविदा आमंत्रित की है। निविदा दस्तावेज के अनुसार 1 फरवरी तक निविदा जमा कराई जा सकेगी। 3 फरवरी को निविदा खोलने की तारीख तय की है।

ऑपरेटर तय नहीं होता तब तक निगम अपने कर्मचारियों से चलवा सकता है बसें

जानकारों का कहना है कि जब तक ऑपरेटर तय नहीं हो जाता, तब तक नगर निगम चाहे तो अपने अनुभवी कर्मचारियों से सिटी बसों का सलचान करा सकता है। मगर निगम ऐसा चाह नहीं रहा। वजह भी साफ है कि निगम के पास जो 50 डीजल बसें है वो मेंटेनेंस मांग रही हैं। निगम के पास फिलहाल की स्थिति में इनकी मरम्मत कराने को पैसा नहीं है।

बस संचालन के लिए ये है मार्ग

देवासगेट से नानाखेड़ा, छत्रीचौक से अभिलाषा कॉलोनी, तपोभूमि से कालियादेह महल, इंजीनियरिंग कॉलेज से आरडी गार्डी कॉलेज, उज्जै से आगर, उज्जैन से शाजापुर, उज्जैन से फतेहाबाद, उज्जैन से तराना, उज्जैन से झारड़ा, उज्जैन से बड़नगर, उज्जैन से महिदपुर, उज्जैन से आलोट।

पुराने ऑपरेटर पर लाखों र्स्पये बकाया, वसूली नहीं कर रहा निगम

लोगों को सस्ती और सुलभ लोक परिवहन की सुविधा मुहैया कराने के लिए उज्जैन नगर निगम को साल 2009 में 39 सीएनजी चलित बसें और साल 2012 में 50 डीजल चलित बसें केंद्र सरकार से मिली थी। साल 2013 में इन बसों के संचालन की कमान नगर निगम की यूसीटीएसएल ने बबलू यादव की अर्थ कनेक्ट कंपनी को सौंपी थी। डीजल बसें उपनगरीय क्षेत्र में 8400 र्स्पये मासिक किराये पर और सीएनजी बसें शहरी क्षेत्र में 4500 र्स्पये मासिक किराये पर चलाने का अनुबंध हुआ था। ये किराया प्रत्येक बस का निर्धारित हुआ था। अनुबंध के वक्त सभी 39 बसें खराब थी और सुधार के लिए पार्ट्स नहीं मिल रहे थे। ऐसे में यूसीटीएसएल ने 50 डीजल बसों में से 30 बसें शहर में और 20 बसें शहर के बाहर उपनगरीय क्षेत्र में चलाई। तब यूसीटीएसएल ने कहा कि बसें नई है, इसलिए फिटनेस का खर्च अर्थ कनेक्ट का बचेगा। इसलिए किराया कंपनी को 8400 र्स्पये के हिसाब से ही देना पड़ेगा। शर्त मानते हुए अर्थ कनेक्ट ने बसों का संचालन किया। नवंबर-2015 तक निर्धारित दर से किराया भी जमा किया। मगर बाद में किराया देना बंद कर दिया। कंपनी ने तर्क दिया कि जब शहर में बस संचालन का टेंडर अनुबंध 4500 र्स्पये है तो किराया 8400 र्स्पये क्यों दें। इस विवाद को निपटाने के लिए यूसीटीएसएल बोर्ड ने मई- 2018 में अफसरों की एक कमेटी कानूनी सलाह लेकर कार्रवाई करने को बनाई थी। इस बात को तीन साल गुजर गए हैं, पर अब तक बकाया लाखों र्स्पये किराये की वसूली नहीं हुई है।

यह भी जानिए

- 50 सिटी बसें चलवाने को निगम ने डेढ़ साल में चार मर्तबा निविदा निकाली है, जिनमें से दो बार एक भी ऑपरेटर ने रुचि नहीं ली। बाद की दो निविदा में अर्थकनेक्ट ने ही रुचि ली।

- यूसीटीएसएल ने अर्थ कनेक्ट कंपनी की अर्नेस्ट मनी 58 लाख र्स्पये राजसात कर रखी है।

- 31 सीएनजी बसों का साल 2010 से और 31 डीजल बसों का साल 2017 से स्पेयर टैक्स 1.60 करोड़ र्स्पये बकाया है। इस टैक्स की माफी के लिए निगम, परिवहन विभाग और नगरीय प्रशासन विभाग को पत्र भेज चुका है।

- यूसीटीएसएल पर सीएनजी गैस के 40 लाख र्स्पये बकाया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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