- नगर सरकार के मुखिया का फैसला आज

नागदा जंक्शन। नगर सरकार का मुखिया व सहमुखिया कौन होगा, इसका फैसला बुधवार दोपहर में होगा। 36 में से 22 पार्षद भाजपा के हैं, ऐसे में दोनों ही पद भाजपा के खाते में जाने की संभावना है। परिणाम के बाद से ही कांग्रेस में चल रही कलह चुनाव के समय सामने आ सकती है। जिला कार्यकारी अध्यक्ष ने विधायक के खिलाफ मोर्चा खोला। भाजपा के सभी पार्षदों से पर्यवेक्षक ने वन-टू-वन चर्चा कर राय जानी। क्रास वोटिंग के खतरे को देखते हुए विधायक ने पार्षदों को बुलाकर चर्चा की।

नगर सरकार के लिए बुधवार को चुनाव होगा। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व अपील समिति के सदस्य भाजपा के होंगे। 13 पार्षद वाली कांग्रेस के कुछ पार्षद धन के बल पर अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद पर काबिज होने का दावा कर रहे थे। भाजपा मंडल अध्यक्ष सीएम अतुल ने कांग्रेस के बयानों का खंडन किया। चुनाव परिणाम के बाद से ही कांग्रेस में कलह चल रहा है। कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता चुनाव में हार का ठीकरा विधायक पर फोड़कर अपना अलग गुट बनाने के प्रयास में लग गए हैं। इनका नेतृत्व चुनाव में एक वोट से हारे कांग्रेस जिला कार्यकारी अध्यक्ष सुबोध स्वामी के द्वारा किए जाने की चर्चा चल रही है। इसका उदाहरण सोमवार को निकाली गई कावड़ यात्रा में दिखाई दिया। यात्रा में विधायक दिलीपसिंह गुर्जर का सहयोग रहता है, जिसके कारण सैकड़ों की संख्या में कावड़ यात्री शामिल होते हैं। इस बार विधायक गुर्जर का सहयोग नहीं लिया गया। दो पार्षद सहित 10 लोगों की कावड़ यात्रा निकाली गई। इससे साफ हो गया कि स्वामी ने विधायक के खिलाफ मोर्चा खोलकर अलग गुट बनाने की तैयारी कर ली है। दो पार्षद तो खुलकर उनके साथ दिखाई दिए। स्वामी के समर्थक ने दावा किया है कि पांच और पार्षद उनके साथ हैं। 13 में से 7 पार्षद स्वामी के साथ हैं तो फिर वह विधायक के खिलाफ मोर्चा खोलकर अपना गुट तैयार कर विधानसभा चुनाव में भी दावेदारी कर सकते हैं। नागदा-खाचरौद विधानसभा की कांग्रेस पर विधायक का पूरी तरह कब्जा है।

विधायक गुर्जर की पुत्री की शादी में शामिल होने आए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजसिंह ने शादी में शामिल होने से पहले सुबोध स्वामी के निवास स्थान पर जाकर उनसे चर्चा की थी, तब से ही शहर में चर्चा है कि स्वामी ने भी ऊपर पकड़ बना ली है। नपा चुनाव के टिकट वितरण में भी अपने पांच समर्थकों को विधायक पर दबाव डालकर टिकट दिलवाए हैं। हालांकि उनमें से एक ही जीत पाया। कांग्रेस की गुटबाजी से आज अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के हो रहे चुनाव में भाजपा को फायदा मिल सकता है।

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