उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में स्थित कोटितीर्थ कुंड में ओजोनेटर प्लांट लगाने के बाद पानी लगातार शुद्ध हो रहा है। जल्द ही इस जल से श्रद्धालु आचमन भी कर सकेंगे। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा हाल ही में जारी रिपोर्ट के आधार पर अफसर यह दाव कर रहे हैं। रिपोर्ट में कुंड का पानी अधिकांश मानकों पर खरा उतरा है।

मंदिर के सहायक प्रशासक चंद्रशेखर जोशी ने बताया प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोटितीर्थ कुंड के जल की शुद्धता रिपोर्ट जारी की है। इसमें कुंड का जल बीते वर्षों की तुलना में 80 फीसदी शुद्ध बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार पानी में पीएच का स्तर 1 से 14 पॉइंट होना चाहिए। वर्तमान में कुंड के पानी का पीएच 7.82 पॉइंट है। इसके आधार पर कहा जा सकता है कि यह पानी शुद्धता की कसौटी पर खरा है।

कुंड में मौजूद जलीय जीवों के जीवित रहने के लिए डीओ (डिजॉल्ड ऑक्सीजन) की मात्रा 4 मिली ग्राम प्रति लीटर से कम नहीं होना चाहिए। वर्तमान में इसकी मात्रा भी 7.7 मिली ग्राम प्रति लीटर बताई गई है। पानी का टीडीएस (टोटल डिजाल्वड सॉलिड) तय मानक के अनुसार 200 से 600 के बीच होना चाहिए। वर्तमान में कुंड के पानी की टीडीएस 396 है।

शून्य कॉलिफॉर्म का पानी पीने योग्य

मंदिर के इंजीनियर अनमोल गुप्ता ने बताया पीने योग्य पानी में टोटल कॉलिफॉर्म (बैक्टेरिया) काउंट शून्य होना चाहिए। कुंड के पानी में पहले टोटल कॉलिफॉर्म का स्तर 920 था, जो अब घटकर 49 रह गया है। जल्द ही इसे निर्धारित मानक शून्य पर लाया जाएगा। इसके बाद कोई भी श्रद्घालु कुंड के पानी का आचमन कर सकता है। इसके बाद पानी को आरओ सिस्टम के माध्यम से शुद्ध करने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

धार्मिक महत्व का कुंड : इसके जल से होता है भगवान का अभिषेक

कोटितीर्थ कुंड का धार्मिक महत्व अधिक है। प्रतिदिन इसके जल से भगवान महाकाल का अभिषेक किया जाता है। ज्योतिर्लिंग क्षरण को रोकने के लिए सुप्रीमकोर्ट द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी ने कुंड के पानी को शुद्ध करने की सिफारिश की थी। इसके बाद मंदिर प्रशासन ने कुंड के समीप आरओ प्लांट लगाया था। अब प्रतिदिन कुंड के आरओ जल से भगवान महाकाल का अभिषेक किया जा रहा है।