उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। उज्जैन शहर में शासकीय मेडिकल कालेज खोले जाने की मंजूरी मिलने से उज्जैनवासी काफी खुश हैं। मेडिकल कालेज खुलने पर गंभीर मरीजों को इलाज के लिए रेफर नहीं करना पड़ेगा। यहीं अच्छा इलाज उपलब्ध हो सकेगा। स्वास्थ्य सुविधाओं में भी इजाफा होगा। बहरहाल, कालेज निर्माण के लिए जमीन प्राप्त करना अब बड़ी चुनौती है। अगर उज्जैन उत्तर-दक्षिण की राजनीति बाधा नहीं बनी तो इस चुनौती से भी जल्द पार पाया जा सकता है।

जिले की आबादी 21 लाख 23 हजार हैं, जिनके इलाज के लिए बड़ी राशि खर्च कर देने पर भी जिला अस्पताल में इलाज के वो माकूल इंतजाम नहीं हो पाए, जिससे गंभीर मरीज की जान बचाई जा सके। नतीजतन जब भी यहां गंभीर सर्जिकल केस आते हैं, उन्हें इंदौर रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में इलाज के लिए बेहतर संसाधन और विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी है। मेडिकल कालेज खुलने पर निश्चित ही डाक्टरों की कमी पूरी होगी। चरक अस्पताल भवन के ऊपर के चार खाली मालों का भी उपयोग हो सकेगा।

13 महीने पहले सीएम ने दी थी स्वीकृति

13 महीने पहले 19 मई 2021 को उज्जैन में जनप्रतिनिधियों के साथ हुई एक बैठक में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने शहर में शासकीय मेडिकल कालेज खोले जाने की वर्षों पुरानी मांग को मंजूरी प्रदान की थी। इसके बाद कालेज की संबद्धता और स्थान को लेकर बहस छिड़ गई थी। विक्रम विवि के कुलपति, शिक्षाविद् और सत्तासीन भाजपा से जुड़े नेता और विवि से जुड़े लोगों ने तर्क दिया था कि विक्रम विश्वविद्यालय से ही कालेज को संबद्धता प्राप्त होना चाहिए। इससे विश्वविद्यालय और उज्जैन का मान बढ़ेगा। विश्वविद्यालय के पास कालेज भवन खोलने को पर्याप्त जमीन भी है। विश्वविद्यालय, इंजीनियरिंग कालेज का संचालन भी कर रहा है। इधर, जिला प्रशासन ने कालेज भवन बनाने को चरक अस्पताल के नजदीक खाली पड़ी 400 करोड़ रुपये की नरेश जीनिंग फैक्ट्री वाली 4.934 हेक्टेयर जमीन भी आरक्षित कर रखी है। कालेज कहां बने, इसे लेकर उज्जैन उत्तर और दक्षिण की राजनीति में खींचतान भी चल रही है। इसी खींचतान का नतीजा है कि बीते 10 वर्षों से उज्जैन में शासकीय माडल हायर सेकंडरी स्कूल की बिल्डिंग तक नहीं बन पाई है।

इनका कहना

उज्जैन को शासकीय मेडिकल कालेज की सौगात मिलना सौभाग्य की बात है। शिवराज कैबिनेट ने 260 करोड़ रुपये मेडिकल कालेज निर्माण के लिए मंजूर किए हैं। अब जल्द ही स्थान तय कर निविदा प्रक्रिया की जाएगी। कोरोना लहर के दरमियान मेडिकल कालेज के अभाव का दर्द सभी ने झेला है। पूरे प्रदेश में उज्जैन एक मात्र ऐसा संभाग हो जाएगा जहां चार मेडिकल कालेज होंगे। रतलाम के बाद नीमच, मंदसौर को पहले ही सौगात मिल चुकी है। - डा. मोहन यादव, उच्च शिक्षा मंत्री

2016 में हुई थी मेडिकल कालेज खोलने को पहल

साल-2016 में कलेक्टर रहे कवींद्र कियावत ने भी चरक अस्पताल के लोकार्पण के बाद मध्यप्रदेश सरकार को उज्जैन में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज खोले जाने का प्रस्ताव सबसे पहले भेजा था। राजनीतिक कारणों से वह स्वीकृत नहीं हुआ। मेडिकल कॉलेज उज्जैन में खोले जाने की वजह उज्जैन संभागीय मुख्यालय होना और महाकुंभ सिंहस्थ समेत बारह माह तीज-त्योहारों का मेला यहां लगा रहना बताई थी।

चिकित्सकों के आधे से ज्यादा पद रिक्त

जिले में एक जिला अस्पताल, 7 सिविल अस्पताल, 300 के करीब प्राइमरी एवं हेल्थ केयर सेंटर हैं। यहां प्रथम, द्धितीय श्रेणी के डाक्टरों के 203 पद स्वीकृत हैं, जिनमें आधे से ज्यादा पद रिक्त हैं। 750 बेड के उज्जैन जिला अस्पताल में डाक्टरों के स्वीकृत 77 पदों के विरुद्ध तकरीबन आधे पद रिक्त हैं। सर्जन, मेडिसीन स्पेशलिस्ट, ड्यूटी डॉक्टर की अत्यधिक कमी है। बेहोश करने वाले एनेस्थिसिया स्पेशलिस्ट और न्यूरोसर्जन है ही नहीं। जबकि 6 पद स्वीकृत हैं। सर्जरी के लिए जरूरी अत्याधुनिक मशीनों का भी अभाव है। आइसीयू में लिमिटेड बेड हैं। आपरेशन थियेटर का एयर कंडीशन बंद है। एक मात्र लिफ्ट हैं जो अधिकांश दिन बंद रहती है और वर्तमान में इसका सुधार कार्य किया जा रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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