उन्हेल। नगर के तरवेचा जैन परिवार की 26 वर्षीय माधुरी पिता रमणलाल जैन सांसारिक सुख-सुविधाओं को त्याग कर 16 जून को गुजरात के सूरत में वैराग्य जीवन को अपनाने जा रही है। परिवार में कुछ दिनों से मांगलिक कार्यक्रम हो रहे हैं। सूरत के लिए माधुरी शनिवार को विदा होंगी।

16 जून को दीक्षा : सूरत में 16 जून को उन्हेल की बेटी माधुरी की दीक्षा आचार्य भगवंत विजयराम सूरीश्वर, संवेग माला के सानिध्य में संपन्ना होगी।

रमणलाल जैन एवं लाड़कुंवर जैन के यहां 2 जुलाई 1995 को जन्मी माधुरी ने बी.काम तक शिक्षा प्राप्त की। माधुरी की दो बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है। जबकि एक भाई व एक बहन माधुरी से छोटे हैं। परिवार में पहले तीन बेटियां सांसारिक जीवन त्यागकर संयम का जीवन अपना चुकी है। इस तरह माधुरी जैन चौथी युवती हैं, जो वैराग्य धारण करने जा रही हैं।

माधुरी जैन ने नईदुनिया से चर्चा में बताया सन् 2012 में गुरु भगवंत संवगमाला श्रीजी मसा का चातुर्मास पहली बार यहां हुआ। तब उनके पास धर्म की शिक्षा प्राप्त करने के लिए आना-जाना रहता था। जब गुरु भगवंत चातुर्मास के बाद यहां से विहार करने वाले थे, तब उन्होंने ने कहा आप हमारे साथ विहार करो। इसके बाद माधुरी ने गुरु भगवंत के साथ उन्हेल से नागेश्वर तीर्थ राजस्थान तक पैदल विहार किया। नागेश्वर से सूरत के लिए विहार किया। माधुरी की रुचि संगीत में भी रही। करीब डेढ़ वर्ष पूर्व गुरु भगवंत के साथ हैदराबाद से चैन्नाई एवं दो माह पूर्व बंगलोर से सूरत, इस तरह 2 हजार किमी पैदल विहार किया।

माधुरी ने बताया बंगलोर में उन्होंने गुरु भगवंत के सामने दीक्षा प्राप्त करने का मुहूर्त बताने का आग्रह किया। बंगलोर में माता-पिता से दीक्षा की अनुमति मिली।

Posted By: Nai Dunia News Network

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