नागदा जं.। महिदपुर रोड पर संभव गार्डन के पास शासकीय भूमि पर अतिक्रमण करने के मामले में तहसीलदार के आदेश पर पटवारी, आरआई ने नपती करने के ढाई माह बाद प्रतिवेदन सौंपा। उसमें अतिक्रमण पाया गया। यह लिखकर कब्जा करने वालों को बचाने का प्रयास किया कि गलती से चूने की लाइन डल गई थी। उक्त भूमि के आगे शासकीय भूमि कितनी है, इसका खुलासा नहीं किया गया। इस पर तहसीलदार ने जांच दल के सदस्यों को नोटिस जारी कर तीन दिन में इसका खुलासा करने का आदेश दिया।

अवैध कालोनी काटने वालों के खिलाफ कलेक्टर के आदेश पर प्रकरण दर्ज कराए। 20 वर्ष पूर्व अवैध कालोनी काटने के आरोप में चार लोगों पर प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया। बाद में 7 अवैध कालोनी काटने वालों के खिलाफ पुलिस ने प्रकरण तो दर्ज कर लिया, वह लोग खुलेआम बाजार में घूमने के साथ सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेकर पुलिस अधिकारियों के साथ मंच पर बैठ रहे हैं। सत्तापक्ष नेताओं के दबाव में पुलिस द्वारा उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है। एक तरफ तो प्रदेश का मुखिया अवैध कालोनी व शासकीय भूमि पर कब्जा करने वालों के खिलाफ मुहिम चलाकर प्रकरण दर्ज करने के निर्देश जारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सत्तापक्ष के ही नेताओं के दबाव में अधिकारियों ने कार्रवाई करना बंद कर दी और जिन पर प्रकरण दर्ज हुआ, उनमें से कुछ कथाकथितों के हौंसले इतने बढ़ गए कि शासकीय भूमि पर कब्जा करने का प्रयास करने लगे हैं। संभव गार्डन के समीप सर्वे क्रमांक 758/03 व 757 पर मुख्य मार्ग पर शासकीय भूमि पर चूने की लाइन डालकर कब्जा करने का प्रयास किया। मामले को नईदुनिया ने प्रमुखता से उठाया। एसडीएम व तहसीलदार ने आरआई, पटवारी को नपती करने के आदेश ढाई माह पूर्व दिए थे। उसका प्रतिवेदन तीन दिन पूर्व पटवारी व आरआइ ने तहसीलदार आशीष खरे को सौंपा। उसमें अतिक्रमणकर्ताओं का बचाव करते हुए लिखा कि नपती के दौरान पीछे के भूमि मालिक ने स्वीकार किया कि गलती से चूने की लाइन डल गई थी। प्रतिवेदन में यह खुलासा नहीं किया कि वहां शासकीय भूमि कितनी है।

इस पर तहसीलदार ने पटवारी को नोटिस जारी करते हुए शासकीय भूमि कितनी है, इसका प्रतिवेदन तीन दिवस में सौंपा जाए। बता दें कि संभव गार्डन के आसपास लगभग 15 बीघा से भी अधिक शासकीय भूमि पर आसपास के भूमि मालिकों ने कब्जा कर रखा है। संबंधित क्षेत्र के पटवारी को इसकी पूरी जानकारी होने के बाद भी कब्जाधारियों से सांठगांठ कर उन्हें बचाने का प्रयास किया जा रहा है। गौरतलब है कि उस क्षेत्र में पदस्थ पटवारी विश्वेश्वर शर्मा पर पूर्व में विद्यानगर स्थित जेपी होटल के सामने की शासकीय भूमि का व्यक्तिगत नामांतरण करने के आरोप लगे थे। पदस्थ एसडीएम ने आरोप के बाद पटवारी का हल्का बदल दिया था। महिदपुर रोड क्षेत्र का हल्का अभी शर्मा के पास ही है। मुख्यमंत्री के निर्देश की खुली धज्जियां पटवारी द्वारा उड़ाई जाकर भू-माफियाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।

इनका कहना

यह बात सही है कि सर्वे क्रमांक 758/03 व 757 पर शासकीय भूमि की नपती के आदेश दिए थे। पटवारी आरआइ की रिपोर्ट में बताया कि गलती से शासकीय भूमि पर चूने की लाइन डाल दी गई थी, उसे हटा दिया गया। शासकीय भूमि कितनी है इसका खुलासा नहीं किया गया। दोनों को नोटिस जारी कर तीन दिन में शासकीय भूमि कितनी है, इसका प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

-आशीष खरे, तहसीलदार, नागदा

अवैध कालोनी काटने के मामले में प्रकरण दर्ज हुआ था। एक की गिरफ्तारी हुई है, एक फरार है। देखकर बताता हूं क्या हुआ।

-हेमंतसिंह जादोन, टीआइ, बिरलाग्राम थाना नागदा

Posted By: Nai Dunia News Network

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