धीरज गोमे, उज्जैन नईदुनिया प्रतिनिधि। आपको जानकर हैरानी होगी 1,03,792 परिवार वाले उज्जैन शहर में गरीब परिवारों की संख्या 15 सालों में 34,500 से बढ़कर 54,723 हो गई है। यानी 58 फीसद वृद्धि हुई है। अब सवाल यह है कि क्या वाकई इतने गरीब परिवार शहर में हैं या फिर फर्जी तरीके से इनके नाम गरीबी रेखा की सूची में जोड़े गए हैं। अगर आंकड़े सही हैं तो यह स्थिति रोजगार और पुनर्वास के विभिन्न् कार्यक्रमों पर भी सवाल खड़ी कर रही है। उज्जैन नगर निगम की एक रिपोर्ट के अनुसार राज्य शासन ने गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों का 15 साल पहले साल 2004-05 में सर्वे कराया था। तब गरीबी रेखा की सूची में 35,500 परिवारों के नाम शामिल किए गए थे। वर्ष 2010 तक इस सूची में न किसी का नाम जोड़ा गया और न काटा गया।

तत्कालीन कलेक्टरों ने सूची में नए नाम जोड़ने और गरीबी से अमीरी की ओर बढ़े परिवारों के नाम सूची से काटने का काम अनुविभागीय अधिकारियों से कराया था। इस व्यवस्था के अमल में आने के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं, वह चौंकाने वाले हैं। गरीब परिवारों की संख्या घटने की बजाय 58 फीसद बढ़ गई है। अब सवाल यह है कि क्या वाकई में शहर के 52 फीसद परिवार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं या फर्जी तरीके से सिर्फ शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए इनका नाम बीपीएल सूची या अब प्राथमिक परिवार सूची में जोड़ा गया है।

तीन साल पहले 73900 थी संख्या

तीन साल पहले गरीब परिवारों की संख्या उज्जैन शहर में 73900 थी। समग्र सामाजिक सुरक्षा मिशन और नगर उदय अभियान की रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया गया था। मामला तत्कालीन कलेक्टर संकेत भोंडवे के संज्ञान में मामला आने पर उन्होंने सत्यापन कराया तो कई फर्जी नाम कटे, मगर जिनके नाम कटे उनके खिलाफ कोई कार्रवाई हुई और न ही नाम जोड़ने वाले पर। वर्तमान में गरीब परिवारों की जो संख्या है, उसमें भी कई फर्जी गरीबों के नाम जुड़े होने की आशंका है।

कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश कलेक्टर आशीष सिंह ने बीपीएल परिवारों का नए सिरे से सत्यापन करने के निर्देश एसडीएम को दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि अपात्र लोगों के पंचनामे बनाकर सूचीबद्ध किया जाए। प्रारंभिक जांच में एक ऐसे परिवार का नाम भी सामने आया है, जिसमें पति नगर निगम और पत्नी आंगनबाड़ी में कार्यरत है। इनका नाम बीपीएल सूची में दर्ज हैं। ये प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी ले चुके हैं। इनके परिवार की मासिक आमदनी 1100 स्र्पये दर्शाई गई है, जबकि दोनों को वेतन से 15 हजार स्र्पये आय होती है। नियमानुसार दोनों के नाम बीपीएल सूची में नहीं होना चाहिए।

Posted By: Prashant Pandey

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