तैयारियां: प्रदेश में आयुर्वेद विश्वविद्यालय की स्थापना का रास्ता खुलेगा

-इलाज का प्रोटोकाल लागू होगा

-शिक्षकों की वेतन विसंगति मिटेगी

-आयुष विंग में चिकित्सकों की संख्या बढ़ेगी

उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द का उज्जैन आना आयुर्वेद चिकित्सकों, शिक्षकों एवं मरीजों के लिए वरदान साबित होगा। प्रदेश में शासकीय आयुर्वेद विश्वविद्यालय की स्थापना का रास्ता खुलेगा। आयुर्वेद में भी इलाज का प्रोटोकाल लागू होगा। आयुर्वेद कालेज के शिक्षकों की वेतन विसंगति मिटेगी और जिला स्तर पर बनी आयुष विंग में चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के पदों की संख्या बढ़ेगी।

प्रस्ताव के रूप में इन चारों विषयों का अनुमोदन, वैद्य समाज के 113 वर्ष पुराने प्रतिनिधि संगठन अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन ने 27 मई से होने वाले 59वें अधिवेशन में कराने की तैयारी कार्यकारिणी ने की है। अधिेवेशन के संयोजक वैद्य एसएन पांडेय और डा. विनोद बैरागी ने अधिवेशन की तैयारी, विशेषता और इसके दूरगामी परिणामों के बारे में नईदुनिया से बात की। कहा कि राष्ट्रपति, अधिवेशन के मुख्य अतिथि होंगे। वे 29 मई को सुबह 10 बजे अधिवेशन का शुभारंभ करने आएंगे। उनके प्रोटोकाल अनुरूप कालिदास संस्कृत अकादमी के पंडित सूर्यनारायण व्यास हाल में व्यवस्थाएं जुटा ली हैं। देशभर से 750 से अधिक चिकित्सकों, शिक्षकों एवं विभिन्ना आयुर्वेद दवा कंपनियों के प्रतिनिधियों ने अधिवेशन का हिस्सा बनने के लिए पंजीयन कराया है। उज्जैन में अधिवेशन का होना आने वाले समय में कई सुखद और शुभ समाचार लेकर आएगा। जल्द ही उज्जैन, आयुर्वेद का बड़ा शोध केंद्र बनकर उभरेगा। यहां बने धन्वंतरि आयुर्वेद महाविद्यालय के नए भवन के लोकार्पण के साथ इसका शंखनांद हो जाएगा। कोरोना लहर ने आयुर्वेद का महत्व पूरी दुनिया को समझा दिया है। अब सबसे अहम जरूरत केवल आयुर्वेद के अध्ययन एवं अनुसंधान को समर्पित शासकीय आयुर्वेद विश्वविद्यालय की स्थापना किए जाने और आयुर्वेद दवा का प्रोटोकाल लागू किए जाने की है। सरकार से अपेक्षा है कि अधिवेशन में पारित प्रस्ताव को वह जल्द अमल में लाएगी। आयुर्वेद कालेज के शिक्षकों की वेतन विसंगति मिटाएगी और जिला स्तर पर बनीं आयुष विंग में चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के पदों की संख्या भी बढ़ाएगी।

सीएम ने तैयारियों की समीक्षा की

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने राष्ट्रपति की यात्रा से जुड़ी तैयारियों की मंगलवार को मंत्रालय में बैठक कर समीक्षा की। कहा कि राष्ट्रपति की गरिमा के अनुकूल कार्यक्रमों के स्वरूप दें। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति 29 मई को सुबह आयुर्वेद महासम्मेलन के अधिवेशन में सम्मिलित होकर महाकालेश्वर मंदिर में पूजन करने जाएंगे और दोपहर में सर्किट हाउस पर लंच लेकर इंदौर और फिर दिल्ली रवाना होंगे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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