Ujjain News : उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर से मंगलवार शाम चार बजे उमा माता की सवारी निकली। शाही ठाठ बाट से निकली सवारी में उमा माता चांदी की पालकी में सवार थीं। भगवान महाकाल मनमहेश रूप में नंदी पर सवार होकर निकले। परंपरागत मार्ग से होकर सवारी शाम छह बजे शिप्रा तट पहुंची। यहां पुजारियों ने माता पार्वती का पूजन कर शिप्रा में सांझी विसर्जित की। इसके बाद सवारी पुन: मंदिर की ओर रवाना हुईं।

पुजारी प्रदीप गुरु ने बताया कि उमा सांझी उत्सव के समापन पर अश्विन शुक्ल द्वितीया पर साल में एक बार माता पार्वती की सवारी निकाली जाती है। दो सालों से उमा माता की सवारी नए छोटे मार्ग से निकाली जा रही थी, लेकिन इस बार माता ने पारंपरिक मार्ग से नगर भ्रमण किया। महाकाल मंदिर से शुरू होकर सवारी कोट मोहल्ला, तोपखाना, दौलतगंज, नई सड़क, कंठाल, सतीगेट, गोपाल मंदिर, गुदरी, कार्तिकचौक होते हुए शिप्रा तट पहुंची। यहां पुजारियों द्वारा परंपरा अनुसार माता पार्वती की पूजा अर्चना की गई। पूजन पश्चात सवारी पुन: मंदिर की ओर रवाना हुई।

नाव से विसर्जित की सांझी

शिप्रा तट पर सांझी विसर्जित करने के लिए प्रशासन ने नाव का इंतजाम किया था। पुजारी नाव में सवार होकर नदी के मध्य पहुंचे तथा सांझी विसर्जित की।

सवारी में पैदल चले प्रशासक

नवागत प्रशासक संदीप कुमार सोनी ने सवारी के दौरान पालकी की व्यवस्था संभाल रखी थी। वे पूरे समय पालकी के साथ पैदल चले। प्रशासक बनने के ठीक एक सप्ताह बाद उन्हें सवारी में शामिल होने का अवसर प्राप्त हुआ। उमा माता के बाद अब 5 अक्टूबर को विजयादशमी पर भगवान महाकाल की सवारी निकलेगी।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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