उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। मध्य प्रदेश में मंगलवार को सबसे अधिक वायु प्रदूषण सागर के बाद उज्जैन में रहा। यहां की हवा में पार्टिकुलेट मैटर यानी पीएम 2.5 की मात्रा 158 प्राप्त हुई। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) का ग्राफ 300 पार चला गया। ये स्थिति जनस्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक बताई गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रशासन से कहा है कि विकास कार्यों के साथ इनसे होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाएं।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार हवा में पीएम 2.5 की मात्रा अधिकतम 60 होना चाहिए। मंगलवार को उज्जैन में मात्रा बढ़ते-बढ़ते 158 पहुंच गई। इस हिसाब से उज्जैन की आबोहवा अब स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो गई है। नियंत्रण के लिए बोर्ड ने प्रशासन को चेताया है। सलाह दी कि रात में सड़कों की धुलाई कराएं। प्रतिबंधित ईंधन का प्रयोग बंद हो। कंस्ट्रक्शन साइट पर निर्माण सामग्री को ढंककर रखवाएं। खुदाई वाली जगहों पर पानी का छिड़काव कराया जाए। पीयूसी सर्टिफिकेट का सख्ती से पालन कराए। उद्योगों में सीएनजी का इस्तेमाल अनिवार्य कराएं। चौराहों पर वाटर स्प्रिंकलर लगवाएं। रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के आसपास होटल, ढाबों में कोयले के स्थान पर गैस भट्टी या तंदूर का उपयोग प्रारंभ कराए। रोटरी, बगीचों में और सड़क किनारे छायादार नीम, पीपल, बरगद, शीशम जैसे पेड़ लगवाएं।

मृदा, सीवरेज प्रोजेक्ट और सड़कों का सुधार न होना है मुख्य कारण

वायु प्रदूषण के मुख्य दो कारक हैं धूल और धुआं। विकास कार्यों में गाइडलाइन का पालन न किए जाने से इनकी मात्रा लगातार बढ़ रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के विज्ञानी अमोलदास संत का कहना है कि अभी भूमिगत सीवरेज पाइपलाइन प्रोजेक्ट और महाकाल-रूद्रसागर एकीकृत विकास एवं सुंदरीकरण प्रोजेक्ट जिस तरह से आकार ले रहा है, उसमें प्रदूषण नियंत्रण की गाइडलाइन का पालन नहीं हो रहा है। बारिश की वजह से उखड़ी सड़कों का पेंचवर्क न होना, वायु प्रदूषण फैला रहे उद्योगों एवं वाहनों पर प्रतिबंध न लगना भी मुख्य वजह है।

सेहत पर कैसे पहुंचाता है नुकसान, जानिए

- सांस लेने में दिक्कत होती है।

- आंख, नाक और गले में जलन होती है।

- छाती में खिंचाव महसूस होता है।

- श्वास रोग का खतरा बढ़ जाता है।

- अनियमित दिल की धड़कन का खतरा बढ़ जाता है।

बचाव के लिए ये करें उपाय

- घर से बाहर निकलें तो मास्क पहनकर निकले।

- प्रदूषण वाले स्थान पर व्यायाम न करें।

- भवन निर्माण सामग्री को ढंककर रखें।

(स्रोत : डा. डीएम कुमावत, विभागाध्यक्ष, पर्यावरण प्रबंधन अध्ययनशाला, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन)

लाकडाउन में सुधरी थी उज्जैन की आबो-हवा

कोरोना संक्रमण को रोकने को पिछले साल लगे 70 दिन के लाकडाउन से उज्जैन की आबोहवा काफी सुधरी थी। तब एक्यूआइ का ग्राफ 67 पर रहा था, जो मंगलवार को 304 दर्ज हुआ। जबकि दो दिन पहले 4 अप्रैल को लगे लाकडाउन के दिन एक्यूआइ का ग्राफ 262 और 9 दिन पहले 28 मार्च को लगे लाकडाउन के दिन एक्यूआइ का ग्राफ 218 था।

एक्यूआइ 100 से अधिक होना स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 100 से अधिक होना स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं (अनहेल्दी) माना गया है। एक्यूआइ 50 से कम बेहतर और 200 से अधिक अत्यंत हानिकारक माना गया है।

यह भी जानिए

उज्जैन शहर का फैलाव 92.68 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में है और आबादी 6 लाख के करीब है।

यहां छोटे-बड़े मिलाकर 500 उद्योग मैन्यूफेक्चरिंग यूनिट के रूप में संचालित होते हैं।

उज्जैन शहर से रोज 550 बसों और 4000 आटो-मैजिक का संचालन होता है।

छोटे-बड़े मिलाकर 2 लाख से अधिक वाहनों का शहर में रोज संचालन होता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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