उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। शहर में रहने वाले नौसेनाअध‍िकारी की विशाखापटनम् में ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से मौत हो गई। अधिकारी को 7 जनवरी को ड्यूटी पर हार्ट अटैक आया था। गुरुवार को शहीद का पार्थिव शरीर महू स्थित सेना मुख्यालय पर लाया गया। यहां से शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे उज्जैन स्थित राजेंद्र नगर में उनके निवास पर लाया जाएगा। विशाखापटनम् व महू में सेना ने दिया उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।

शहर के राजेंद्र नगर निवासी नंदावल्लभ पांडे आबकारी विभाग में अकाउंटेंट हैं। पांडे के पुत्र भास्कर पांडे नेवी में एविएशन स्ट्रक्चरल मैकेनिक- सेफ्टी इक्यूपमेंट (एएमइ) के पद पर पदस्थ थे। 30 जनवरी 2012 को भास्कर का चयन नौसेना में हुआ था। उनका प्रशिक्षण ओडिशा के चिल्का में हुआ था। इसके बाद प्रोफेशनल ट्रेनिंग आइएनएस शिवाजी लोनावला पुणे में हुी थी। पहली पोस्टिंग पोर्ट ब्लेयर में हुई।

इसके बाद कोच्चि, गोवा, मुंबई, विशाखापटनम, मुंबई और फिर विशाखापटनम में स्थानातंरण हो गया था। वर्तमान में वह विशाखापटनम में ही पदस्थ थे। 8 नवंबर को वह छुट्टी पर उज्जैन आए थे और 28 नवंबर को वापस ड्यूटी पर चले गए थे। 29 वर्षीय भास्कर को 7 जनवरी को ड्यूटी के दौरान ही हार्ट अटैक आ गया था।

उस दौरान उनके साथ मौजूद अफसरों ने एक घंटे तक कार्डियो पल्मोनरी रिससिटैशन (सीपीआर) देकर उनकी जान बचाने की कोशिश की थी। सीपीआर के कारण उनकी सांसें तो लौट आई थी मगर मस्तिष्क के भीतर खून का थक्का जम गया था। 7 जनवरी से ही वह बेहोशी की अवस्था में अस्पताल में भर्ती थे। 19 जनवरी को एक बार फिर बेहोशी की अवस्था में ही भास्कर को हार्ट अटैक आ गया। इससे भास्कर का निधन हो गया। इसकी जानकारी मिलने पर पूरा परिवार स्तब्ध रह गया।

बचपन से ही सेना में जाना चाहते थे भास्कर

छोटे भाई जीवनप्रकाश ने बताया कि भास्कर चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थे। सबसे बड़ी दीदी नेहा पांडे का विवाह दिल्ली में हुआ है। उनसे छोटे भास्कर, तीसरे नंबर पर बहन पूजा पांडे और सबसे छोटे भाई जीवन प्रकाश है। भास्कर बचपन से ही काफी मेधावी थे और सेना में जाकर देश की सेवा करना चाहते थे। दो बार एयर फोर्स तथा तीन बार आर्मी की परीक्षा पास कर चुके थे, लेकिन शरीर के अनुसार वजन नहीं होने के कारण वह चुने नहीं जाते थे। जब उनका नेवी में चयन हो गया तो वह काफी खुश थे। वह लगातार मुझे भी प्रेरित करते रहते थे।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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