Vasant Panchami 2023: उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। ऋतुराज वसंत के आगमन का पर्व वसंत पंचमी गुरुवार को सबसे पहले ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में मनाया जाएगा। तड़के चार बजे भस्म आरती में पुजारी भगवान को केसर मिश्रित जल से स्नान कराकर सरसों के पीले फूल के रूप में वसंत अर्पित करेंगे। भगवान को केसरिया पकवानों का भोग लगाकर आरती की जाएगी। सांदीपनि आश्रम में विद्या आरंभ संस्कार होगा। शहर के गुरुकुल, आश्रम व विद्यालयों में माता सरस्वती का पूजन किया जाएगा। वसंत पंचमी ऋतु परिवर्तन का त्योहार है। यह ज्ञान की देवी माता सरस्वती के प्राकट्य का दिन भी है। धर्मधानी उज्जयिनी में उत्सव की शुरुआत महाकाल के आंगन से होगी। इसके बाद से प्रतिदिन होली तक भगवान को गुलाल अर्पित किया जाएगा। पुष्टि मार्गीय वैष्णव मंदिरों में 40 दिवसीय फाग उत्सव की शुरुआत होगी। प्रतिदिन राजभोग आरती में ठाकुरजी को गुलाल अर्पित किया जाएगा। भक्त भी गुलाल होली खेलेंगे।

पाटी पूजन के साथ होगा विद्या आरंभ संस्कार

सांदीपनि आश्रम में वासंती वेला में भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना होगी। पुजारी पं. रूपम व्यास ने बताया कि वसंत पंचमी से गर्मी की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन से भगवान को गर्म वस्त्र धारण कराना बंद कर दिया जाता है। सुबह भगवान का अभिषेक-पूजन होगा। इसके बाद उन्हें जरी के पीले वस्त्र धारण कराए जाएंगे। वसंत के पीले फूलों से शृंगार कर केसरिया भात का भोग लगाया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण की पाठशाला में वसंत पंचमी पर विद्या आरंभ संस्कार कराने की मान्यता है। सरस्वती पूजन के उपरांत पहली बार पाठशाला जाने वाले बच्चों को पाटी पूजन कराकर विद्या आरंभ संस्कार कराया जाएगा। इस दिन देशभर से भक्त अपने बच्चों को पाटी पूजन कराने आश्रम आते हैं।

नील सरस्वती का स्याही से अभिषेक होगा

वसंत पंचमी माता सरस्वती के प्राकट्य का दिन है। सिंहपुरी स्थित अत्यंत प्राचीन माता सरस्वती के मंदिर में भक्त देवी सरस्वती का स्याही से अभिषेक करने आते हैं। मान्यता है नील सरस्वती का स्याही से अभिषेक करने से विद्यार्थी अच्छे नंबरों से पास होते हैं।

Posted By: Navodit Saktawat

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