Vikas Dubey Arrested : उज्जैन। आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर फरार उत्तर प्रदेश के मोस्ट वाटेंड गैंगस्टर विकास दुबे को उज्जैन पुलिस ने गुरुवार सुबह ज्योर्तिलिंग महाकाल मंदिर परिसर से गिरफ्तार कर लिया है लेकिन उसकी गिरफ्तारी ने कई अहम सवालों को भी जन्म दे दिया है।

1. गुरुवार सुबह 7.30 बजे विकास दुबे महाकाल मंदिर पहुंचा। दर्शन के लिए 250 रुपए की रसीद बनवाई और महाकाल दर्शन के लिए मंदिर परिसर के भीतर गया और दर्शन कर बाहर आया।

सवाल- विकास दुबे को पकड़ने का दावा करने वाले गार्ड लखन यादव का कहना है कि उसने दर्शन किए ही नहीं। रसीद के लिए परिचय पत्र मांगा जाता है, विकास ने परिचय पत्र दिया था या नहीं यदि दिया था तो कौन सा था।

2. विकास जब मंदिर परिसर में पहुंचा तब तीन-चार लोग साथ थे लेकिन जब पकड़ा गया तो अकेला ही था। सवाल- मंदिर के सुरक्षाकर्मियों ने भी बातचीत में कबूला कि विकास दुबे के साथ तीन-चार लोग और थे लेकिन वे कौन थे और गिरफ्तारी के ठीक पहले कहां चले गए किसी को पता नहीं। पुलिस दो वकीलों सहित कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

3. मंदिर परिसर के गार्ड और पुलिसकर्मियों की कहानी के अनुसार, एक गार्ड को विकास पर शक हुआ, उसने अपने सुपरवाइजर को बताया। दो घंटे तक सीसीटीवी फुटेज में उसे पहचाने का प्रयास होता रहा। इस दौरान विकास दुबे मंदिर परिसर में ही मौजूद रहा। बाद में गार्ड जब उसे लेकर पूछताछ कक्ष में लाए तो पहले उसने अपना नाम गलत बताया, लेकिन वहां मौजूद गार्ड ने जब उससे उसका मोबाइल नंबर पूछकर डायल किया तो उसमें दुबे नाम लिखा आया। इससे उसकी पहचान हुई।

सवाल- दो घंटे तक गार्ड उसकी पहचान में जुटे थे तब तक वह मंदिर परिसर में क्या करता रहा। जिस विकास दुबे के पीछे उप्र की पूरी पुलिस, इंटेलीजेंस लगी हो उसका मोबाइल चल रहा हो और पुलिस सहित अन्य ऐजेंसियों को पता तक नहीं चले यह कैसे संभव है।

4. विकास दुबे को उत्तर प्रदेश के नंबर प्लेट लगे एक वाहन से उज्जैन पहुंचना बताया गया है। नंबर प्लेट पर हाईकोर्ट भी लिखा था।

सवाल- सड़क मार्ग से वह चार राज्यों, उप्र, हरियाणा, राजस्थान, मप्र के दर्जनों जिलों की सीमाओं को पार कर उज्जैन पहुंच गया फिर भी कहीं की भी पुलिस ने उसे रोका कैसे नहीं।

5.उज्जैन के एक शराब कारोबारी और उसके मैनेजर के माध्यम से विकास के उज्जैन आने की जानकारी सामने आ रही है। शराब कारोबारी और मैनेजर मित्र के साथ पहले भी विकास के महाकाल दर्शनों के लिए आता रहा है।

सवाल- जब मध्य प्रदेश पुलिस उसके ग्वालियर-मुरैना संपर्कों के आधार पर पड़ताल कर रही थी तब मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के पास यह जानकारी कैसे नहीं थी।

6. मंदिर परिसर में 170 कैमरे लगे हैं। सीसीटीवी के लिए कंट्रोल रूम भी बना है, जिससे चौबीसों घंटे निगरानी होती है। दर्जनों पुलिस और सुरक्षाकर्मी पूरे परिसर में हमेशा मौजूद रहते हैं। फिर भी वह परिसर में प्रवेश करता है, दर्शनों के लिए टिकट लेता है और आराम से घूमता भी है।

सवाल- ऐसा शातिर अपराधी, जिसके लिए पूरे भारतभर में अलर्ट जारी किया गया है। उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती राज्य तो हाई अलर्ट पर थे, बावजूद वह मंदिर के भीतर तक आराम से कैसे पहुंच गया।

किस रास्ते से उज्जैन पहुंचा विकास

विकास दुबे के उज्जैन पहुंचने की भी अलग-अलग कहानियां सामने आ रही हैं।

पहली कहानी -फरीदाबाद (हरियाणा) से राजस्थान होते हुए उज्जैन पहुंचा विकास के उज्जैन पहुंचने का सड़क मार्ग से यही संभावित रूट माना जा रहा है। फरीदाबाद से राजस्थान होते हुए उज्जैन तक सड़क मार्ग से दूरी 774 किमी है। जयपुर, कोर्ट होते हुए उज्जैन पहुंचने में करीब 14 घंटे लगते हैं।

सवाल- जिस अपराधी के पीछे उत्तर प्रदेश पुलिस की चालीस टीमों सहित दस राज्यों की पुलिस लगी हो वह हरियाणा, राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा में आराम से सफर कर उज्जैन कैसे पहुंच गया। कहीं भी जांच तक नहीं हुई।

दूसरी कहानी- विकास साबरमती एक्सप्रेस से गुरुवार अल सुबह इंदौर पहुंचा।

सवाल- यदि विकास बुधवार को हरियाणा के फरीदाबाद में मौजूद था फिर साबरमती एक्सप्रेस से उज्जैन कैसे पहुंच सकता है।

इतने अपराध दर्ज हैं विकास दुबे के नाम

1994 - पहला मुकदमा बिल्हौर में हत्यायुक्त डकैती का दर्ज हुआ था।

2004 - केबल व्यवसायी दिनेश दुबे की हत्या में आरोपित

2000 - शिवली थाना क्षेत्र के ताराचंद इंटर कॉलेज के सहायक प्रबंधक सिद्धेश्वर पांडेय की हत्या में नामजद

2001 - भाजपा सरकार में श्रम संविदा बोर्ड के चेयरमैन संतोष शुक्ला की शिवली थाने में घुसकर हत्या में मुख्य आरोपित

2002 - शिवली नगर पंचायत के तत्कालीन चेयरमैन लल्लन वाजपेयी के घर पर बम और गोलियों से हमला। इसमें उम्रकैद हुई थी।

60 आपराधिक मामले दर्ज हैं हिस्ट्रीशीटर पर

25 पुलिस टीम लगाई गई थी विकास की तलाश के लिए

05 लाख रुपये इनाम पुलिस ने घोषित किया था गैंगस्स्टर पर

68 पुलिसकर्मी सस्पेंड या स्थानांतरित किया गए

विकास मामले में 500 मोबाइल फोन को खंगाला गया

विकास की तलाश में 07 दिनों तक सात राज्यों की पुलिस को छकाता रहा

40 थानों की फोर्स10 हजार पुलिसकर्मी100 से अधिक यूपी एसटीएफ की टीमें

1999 में फिल्म "अर्जुन पंडित"देखने के बाद खुद के नाम के आगे पंडित लगा लिया था। वह आमतौर पर पंडित नाम से ही इलाके में जाना जाता है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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