उज्जैन। विक्रम विश्वविद्यालय में धारा-52 के कुलपति के रूप में संस्कृतविद् डॉ. बालकृष्ण शर्मा की नियुक्ति हो गई है। राजभवन से आदेश मिलने पर डॉ. शर्मा ने गुस्र्वार सुबह 11 बजे विश्वविद्यालय जाकर पदभार संभाला।

सिंधिया प्राच्य विद्या शोध संस्थान के निदेशक एवं आचार्य तथा कला संकाय के अध्यक्ष रहे डॉ. शर्मा जिस विश्वविद्यालय के विद्यार्थी रहे, वहीं के प्रोफेसर और अब कुलपति बने हैं। सवा महीने में दूसरी बार एक ही विवि के कुलपति के रूप में उन्होंने पदभार संभाला।

प्रो. एसएस पांडे के 7 फरवरी को कुलपति पद से इस्तीफा दिए जाने के बाद राजभवन ने डॉ. शर्मा को प्रभारी कुलपति नियुक्त किया था। उन्होंने 8 फरवरी को पदभार ग्रहण कर लिया था। कुछ परिवर्तन के साथ कामकाज शुरू ही किया था कि 15 फरवरी को राज्य सरकार ने विवि में धारा-52 लागू कर दी थी। मगर इस धारा अंतर्गत सरकार ने नए कुलपति की नियुक्ति नहीं की।

नतीजतन राजभवन से मार्गदर्शन लेकर डॉ. शर्मा विवि का संचालन करते रहे। इसी बीच 25 फरवरी को डॉ. शर्मा की छोटी बहन चंद्रकांता शर्मा का निधन हो गया था और वे इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. एमएस परिहार को चार्ज देकर लंबी छुट्टी पर चले गए। गुस्र्वार को छुट्टी से लौटे तो राजभवन के ताजा आदेश से धारा-52 के कुलपति के रूप में पदभार संभाला। कुलसचिव, सहायक कुलसचिव समेत कर्मचारी संगठनों ने उनका स्वागत किया।

कब-कब लगी धारा-52

वर्ष 1978 : डॉ. प्रभाकर नारायण कवठेकर जब 1978 से 1981 तक स्थायी कुलपति थे, तब उन्हें हटाकर डॉ. एमपी चौरसिया को कुलपति नियुक्त किया गया था। वे सिर्फ एक दिन के लिए कुलपति बने थे।

वर्ष 1994 : डॉ. आरआर नांदगांवकर जब 1992 से 1994 तक स्थायी कुलपति थे, तब उन्हें हटाकर डॉ. जोखमसिंह को कुलपति नियुक्त किया था। वे 2 मार्च 1994 से 20 जनवरी 1997 तक कुलपति रहे।

वर्ष 2010 : डॉ. शिवपालसिंह अहलावत जब 18 फरवरी 2009 से 30 अगस्त 2010 तक स्थायी कुलपति थे, तब उन्हें हटाकर प्रो. टीआर थापक को कुलपति नियुक्त किया। वे 1 सितंबर 2010 से 29 अगस्त 2013 तक कुलपति रहे।

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