बड़ा खुलासाः आयुष विभाग को आवंटित जमीन पर एनजीओ को दे दिया कब्जा, ताबड़तोड़ नाप दी थी जमीन

- भोपाल से प्रमुख सचिव आयुष के पत्र से मची हलचल, आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्य ने ली आपत्ति

उज्जैन। शासकीय धन्वंतरि आयुर्वेद कॉलेज की जिस जमीन पर आयुष विभाग के जिला और संभागीय कार्यालय भवन बनना थे, उस जगह निर्माल्य से अगरबत्ती बनाने का प्लांट खुल गया। चौंकाने वाली बात यह कि प्रशासन ने ताबड़तोड़ जमीन आवंटित कर दी और विधायकों की मौजूदगी में इसका भूमिपूजन हो गया और प्लांट चालू भी हो गया। आयुष विभाग भोपाल के प्रमुख सचिव के पत्र से मामले में नया मोड़ गया है। कॉलेज प्रशासन ने प्लांट पर आपत्ति ली है और कहा है कि यहां आयुष विभाग के कार्यालय भवन ही बनाए जा सकते हैं।

मंगलनाथ रोड पर शासकीय आयुर्वेद कॉलेज की करीब 26 बीघा जमीन है। इसमें से एक बीघा जमीन निर्माल्य से अगरबत्ती बनाने वाले प्लांट के लिए आवंटित की गई है। यह काम एक एनजीओ द्वारा किया जा रहा है, जिसके साथ नगर निगम ने एमओयू साइन किया है। इसके तहत एनजीओ द्वारा प्लांट स्थापित कर दिया गया है। इस पर शेड बना दिए गए हैं और निर्माल्य सूखाने के लिए टंकियां भी बना दी गई हैं। ऐसे में लाखों रुपए के निवेश पर सवाल खड़ा हो गया है। चौंकाने वाला पहलू यह भी है कि यह जमीन पहले ही आयुष विभाग को आवंटित कर दी गई थी। इसके बावजूद प्रशासन के अफसरों ने आंख मीचकर इस पर प्लांट कैसे बनने दिया और जमीन का कब्जा भी दे दिया गया था। यह मामला अब संभागायुक्त अजीत कुमार और कलेक्टर शशांक मिश्रा तक पहुंचा है और पूरे मामले की पड़ताल शुरू हो गई है।

आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई?

आयुर्वेद कॉलेज के स्वामित्व की जमीन आयुष विभाग को 9 सितंबर 2018 को आवंटित की गई थी। विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के दौरान ताबड़तोड़ प्रशासन ने निर्माल्य से अगरबत्ती बनाने के प्लांट के लिए एक बीघा जमीन पर पुष्पांजलि नामक एनजीओ को कब्जा दे दिया गया। यह बात भी अब सामने आई है कि जमीन पर कब्जा देने के लिए क्षेत्रीय पटवारी को ताबड़तोड़ जमीन नापकर कब्जा देने का आदेश बड़े अफसर ने दिया था। इसके आधार पर नगर निगम ने भी एमओयू साइन कर लिया और लाखों रुपए के निर्माण भी इस पर हो गए। अब सवाल ये खड़ा हो रहा है कि इतनी बड़ी चूक कैसे हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। खास बात यह कि प्लांट के भूमिपूजन में पूर्व मंत्री व उज्जैन उत्तर के विधायक पारस जैन, महिदपुर विधायक बहादुरसिंह चौहान भी शामिल हुए थे। सवाल यह भी पूछा जा रहा है कि कॉलेज प्रशासन की ओर से आपत्ति दर्ज कराने में देरी क्यों हुई। जब जमीन पर भूमिपूजन हो रहा था और काम चल रहा था तब आपत्ति क्यों नहीं ली गई।

अब प्लांट शिफ्ट कहां और कैसे होगा

आयुर्वेद कॉलेज की आपत्ति पर प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। राजस्व विभाग के अफसरों ने बुधवार शाम को प्लांट की जानकारी भी ली। मामले में जिला प्रशासन और कॉलेज प्रशासन के बीच जल्द ही बैठक हो सकती है। इसमें जमीन आवंटन को लेकर चर्चा होगी। साथ ही इस मुद्दे पर भी चर्चा होगी कि जो प्लांट स्थापित हो गया है, उसे कहां और कैसे शिफ्ट किया जाए।

आपत्ति ली है

जिस जमीन पर निर्माल्य से अगरबत्ती बनाने का प्लांट शुरू किया जा रहा है, वह आयुर्वेद कॉलेज के स्वामित्व की जमीन है और इस पर जिला व संभागीय आयुष कार्यालय बनना हैं। इस कारण हमने जमीन पर कब्जा देने के मामले में आपत्ति ली है।

डॉ. जेपी चौरसिया, प्राचार्य शासकीय धन्वंतरि आयुर्वेद कॉलेज