उज्जैन। महाकाल मंदिर प्रबंध समिति द्वारा संचालित विक्रम कीर्ति मंदिर सफेद हाथी साबित हो रहा है। इसके रखरखाव पर समिति प्रतिवर्ष करीब 13 लाख रुपए खर्च कर रही है। जबकि आय इससे आधी भी प्राप्त नहीं हो रही है। वर्ष 2018 में समिति को इससे सिर्फ ढाई लाख रुपए प्राप्त हुए हैं। ऐसे में दान के खर्च पर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्योंकि भक्त ज्योतिर्लिंग में सुविधाओं के विस्तार के लिए दान करते हैं।

करीब 2 साल पहले मंदिर समिति ने विक्रम कीर्ति मंदिर का संचालन अपने हाथ में लिया था। इसके बाद से ही इसके संधारण व रखरखाव पर लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके एवज में आय ना के बराबर हो रही है। बावजूद अफसर महाकाल के चढ़ावे का मनमाना व्यय कर रहे हैं। वर्तमान में कीर्ति मंदिर में साफ सफाई के लिए भारत विकास ग्रुप (बीवीजी) के 8 कर्मचारी तैनात हैं। इन्हें प्रतिमाह औसतन 56 हजार रुपए वेतन दिया जाता है। परिसर की सुरक्षा के लिए थर्ड आई सुरक्षा एजेंसी के 4 सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए हैं। उन्हें प्रतिमाह 24 हजार रुपए मानदेय मिलता है। वहीं करीब 40 हजार रुपए महीना बिजली का बिल आता है। ऐसे कुल 1 लाख 10 हजार रुपए महीना खर्च किया जा रहा है। वर्षभर में खर्च का आंकड़ा 13 लाख से अधिक है।

प्रभारी नदारद... निजी कंपनी के कर्मचारी संभाल रहे व्यवस्था

मंदिर प्रशासन ने वाहन प्रभारी निरंजन जोनवाल को कीर्ति मंदिर का अतिरिक्त प्रभार दे रखा है। ऐसे में वे रोज कीर्ति मंदिर नहीं आ पाते हैं। बीवीजी व थर्ड आई के कर्मचारी ही यहां की व्यवस्था संभाल रहे हैं। अगर कीर्ति मंदिर में कोई कार्यक्रम आयोजित करना हो तो बुकिंग कराने महाकाल मंदिर कार्यालय जाना पड़ता है। बताया जाता है निजी कंपनी के कर्मचारी जिम्मेदारी लेने से बचते हैं, इसलिए यहां रसीद नहीं काटते हैं।

वर्ष 2018 में कीर्ति मंदिर से समिति को करीब ढाई लाख रुपए की आय हुई है। खर्च तो इससे अधिक ही हो रहा है।

-निरंजन जोनवाल, प्रभारी विक्रम कीर्ति मंदिर

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