Zero Shadow Day: उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। खगोलीय घटना स्वरूप 21 जून को दोपहर 12 बजकर 28 मिनट पर परछाई ने भी साथ छोड़ दिया। इस दृश्य को शंकु यंत्र के माध्यम से प्रत्यक्ष देखने कई लोग जीवाजी वेधशाला पहुंचे। जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डा. राजेंद्रप्रकाश गुप्त ने बताया कि उज्जैन, कर्क रेखा के नजदीक स्थित है। सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध में कर्क रेखा पर लंबवत होने पर दोपहर को परछाई कुछ पल के लिए शून्य हो गई।

आज दिन सबसे बड़ा और रात सबसे छोटी होगी। सूर्योदय सुबह 5 बजकर 42 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 16 मिनट पर होगा। इस प्रकार दिन सबसे बढ़ा 13 घंटे 34 मिनट का और रात 10 घंटे 26 मिनट की होगी। 21 जून के बाद सूर्य की गति दक्षिण की ओर होगी। इसे दक्षिणायन का प्रारंभ कहते हैं। इस दिन के बाद दिन धीरे-धीरे छोटे होंगे और राते लंबी होंगी। 23 सितंबर को दिन और रात बराबर होंगे।

303 साल पुरानी है वेधशाला

जीवाजी वेधशाला 300 साल पुरानी है। इसका मालवा के गवर्नर रहे महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने सन् 1719 में कराया था। इसके बाद दिल्ली, जयपुर, मथुरा और वाराणसी में भी वेधशाला का निर्माण कराया गया था। सवाई जयसिंह ने कालगणना के लिए सभी वेधशालाओं में सम्राट यंत्र, नाड़ी विलय यंत्र, भित्ति यंत्र, दिगंश यंत्र का निर्माण कराया था। चूंकि उज्जैन से कर्क रेखा भी गुजरती है, इसलिए सवाई जयसिंह ने यहां तो स्वयं आकर भी अध्ययन किया था। इसके बाद करीब 200 वर्षों तक उज्जैन की वेधशाला उपेक्षित रही। 1923 में इसका पुनरुद्धार हुआ।

इस वेधशाला को काल गणना का मुख्य केंद्र माना गया है। यहां ब्रह्मांड के रहस्य समझने को 'नक्षत्र वाटिका' भी बनाई गई है। एक ऐसी वाटिका, जिसमें सूर्य सहित सभी आठ प्रमुख ग्रहों, 12 राशियों और 27 नक्षत्रों के स्थायी मॉडल जमीन पर बनाए हैं। इन ग्रहों का परिक्रमण पथ, स्टार ग्लोब और वर्ल्ड क्लॉक भी है। वाटिका को देखकर लोग ग्रहों के आकार, राशियों और नक्षत्रों के संबंधों को आसानी से समझ सकते हैं। साथ ही उनसे जुड़े रहस्य जान सकते हैं।

Posted By: Prashant Pandey

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