उमरिया (ब्यूरो)। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ शावक की मौत हो गई है। यह मौत 15 अगस्त की रात हुई थी। मृत बाघ शावक की आयु पार्क प्रबंधन ने लगभग साढ़े चार महीने बताई है। शनिवार सुबह बाघ शावक का पोस्टमार्टम करने के बाद उसका दाह संस्कार कर दिया गया। यह शावक पिछले पांच दिनों से बहेरहा के इंक्लोजर में था और अस्वस्थ था। मालूम हो, मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा मिलने के एक महीने के अंदर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में यह चौथे और उमरिया जिले में पांचवें बाघ की मौत है।

बांधवगढ़ के फील्ड डायरेक्टर विंसेंट रहीम ने बताया कि 11 अगस्त को गश्त के दौरान गश्ती दल को यह बाघ शावक धमोखर रेंज में बीमार अवस्था में दिखा था। देखने से ही महसूस हो रहा था कि उसने कई दिनों से कुछ खाया नहीं है। इसके बाद बाघ शावक को बचाने की अनुमति ली गई और उसे बहेरहा के बाड़े में रखने के बाद उपचार शुरू किया गया।

टी-35 का था शावक, कमजोर होने पर छोड़ा

पार्क प्रबंधन ने बताया कि लगभग साढ़े चार महीने पहले बाघिन टी-35 ने तीन शावकों को जन्म दिया था। इसमें से एक शावक बेहद कमजोर था और कुनबे में सबसे छोटा था। बाघिन ने जब इसे बाहर निकाला, तभी से यह उसके साथ नहीं चल पा रहा था। बाघिन अपने उन बच्चों को त्याग देती है जो शारीरिक रूप से कमजोर होते हैं। यही इस शावक के साथ भी हुआ। अपने कुनबे से बिछड़ने के बाद यह शावक बेहद कमजोर और बीमार हो गया था।

कब-कैसे हुई मौतें

-28 जुलाई की रात बाघ टी-33 ने बाघिन टी-62 के शावकों पर हमला कर दिया था। इसमें बाघ्ािन और उसके एक शावक की जान चली गई।

- 1 अगस्त को शहडोल के पास रेगुलर फॉरेस्ट में वयस्क बाघ ने बाघ शावक को मार दिया था।

- 8 अगस्त को बीमारी के कारण बाघिन की मौत हो गई।

- 17 अगस्त को अब एक और बाघ शावक की मौत हो गई।

बाघिन ने त्याग दिया था

साढ़े चार महीने के एक कमजोर शावक की मौत हो गई है। यह शावक भूख-प्यास से बेहाल मिला था। उसका उपचार कराया जा रहा था, लेकिन बचाया नहीं जा सका। इस शावक को कमजोरी के कारण बाघिन ने त्याग दिया था - विंसेंट रहीम, फील्ड डायरेक्टर, बांधवगढ़

Posted By: Rahul Vavikar

fantasy cricket
fantasy cricket