उमरिया(नईदुनिया प्रतिनिधि)। बांधवगढ़ के जंगल से लगे गांवों में लोगों के पास मवेशी तो भारी संख्या में हैं लेकिन उन्हें सुरक्षित रखने के लिए सार यानी गोशाला नहीं है। इसका फायदा उठाकर जंगल के बाघ गांव में घुसकर मवेशियों को खा जाते हैं। इसकी वजह से वन विभाग को हर साल लाखों रुपये का मुआवजा पशु मालिकों को बांटना पड़ता है। किसानों के पशु सुरक्षित रह सके इसके लिए वन विभाग ने जिला पंचायत के साथ मिलकर जंगल से लगे हुए ग्रामों मे कैटल शेड के निर्माण के लिए सर्वे कराया है। जिन ग्रामों में कैटल शेड की आवश्यकता है और पशु मालिक आवश्यक पात्रता रखता है वहां समूहों के माध्यम से कैटल शेड का निर्माण किया जाएगा।

इन गांवों में हुआ सर्वेः जिला पंचायत के परियोजना अधिकारी दीपक उपासे ने बताया कि बांधवगढ़ के जंगल से लगे कई गांवों में वे भी गए थे और अन्य विभागों की टीम भी गई थी। वन्य विशेषज्ञ पुष्पेन्द्र नाथ द्विवेदी भी इस दौरान उन गांवों में गए थे जहां कैटल शेड की आवश्यकता है। बताया गया है कि इस दौरान ग्राम दुल्हरा, बांसा, घंघौर, दमना, गौटा, मझखेता के कई गांवों में यह दल गया था। सर्वे में पाया गया है कि इन गांवों के कई मवेशियों को बाघ अपना शिकार बना चुका है और इसकी वजह यह है कि यहां मवेशी मालिकों के पास मवेशियों को रखने का सुरक्षित स्थान नहीं है।

सुरक्षित होगा शेडः जिन गांवों का के हितग्राहियों का चयन शेड के लिए किया जाएगा वहां ग्राम पंचायत के समूहों के माध्यम से शेड का निर्माण होगा। शेड को पूरी तरह सुरक्षित और खुला बनाया जाएगा। शेड के ऊपर से छाया होगी और पीछे की दीवार छत तक होगी जबकि दोनों तरफ हाफ दीवार और उस पर जाली होगी। सामने भी जालीदार दरवाजे होंगे। इस शेड में मवेशी पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। शेड बन जाने के बाद अगर बाघ आता भी है तो वह मवेशियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा।

इस तरह होता है चयनः जिले के चयनित पशुपालकों के पशुओं के लिए पशुपालन विभाग की ओर से कैटल शेड (पशु आश्रय स्थल) बनाए जाने की योजना है। कैटल शेडों का निर्माण महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत किया जाता है। इस योजना के तहत हितग्राही को आवेदन देना होता है और फिर चयनित हितग्राही को योजना का लाभ मिल जाता है। इसके लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत से 12 पशुपालकों का चयन किया जाता है। इसमें तीन अनुसूचित जाति वर्ग (एससी), तीन अनुसूचित जनजाति वर्ग (एसटी), तीन बीपीएल तीन लघु सीमांत कृषकों का चयन होता है। चयनित पशुपालकों के पास कम से कम से दो बड़े पशु गाय अथवा भैंस होना जरुरी होता है। तथा लघु सीमांत कृषक के पास अधिकतम दो बीघा भूमि ही उपलब्ध होनी चाहिए।

यह है योजनाः इस योजना में दो प्रकार के पशुपालकों को लाभ दिए जाने की योजना है। जिसमें तीन पशु वाले पशुपालकों को पशु शेड के तहत उनकी निजी भूमि पर शेड, नाद, फर्श व यूरिनल ट्रैक निर्माण पर उन्हें मनरेगा के माध्यम से 80 हजार रुपए तथा छह पशु वाले पशुपालकों को उक्त निर्माण कार्य के लिए एक लाख 60 हजार रुपए खर्च किए जाएंगे। पशुपालकों को अपनी निजी भूमि पर इसका निर्माण करवाना होगा। बांधवगढ़ के जंगल से लगे गांवों में इसके लिए तीन व छह पशु पालने वाले पशुपालकों का सर्वे किया गया है। इस योजना की खास बात यह है कि शेड बनवाने के लिए पशुपालक को राशि नहीं दी जाएगी। मनरेगा अपने देखरेख में ही शेड का निर्माण करा कर पशुपालक को हस्तांतरित किया जाएगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

ipl 2020
ipl 2020