Bandhavgarh Tiger Reserve: संजय कुमार शर्मा, उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जिप्सी चालकों की मनमानी रोकने के लिए अब हाईटेक इंतजाम किए जाएंगे। इसकी तैयारी शुरू हो गई है। कोशिश यह है कि इस बार जब पर्यटन शुरू हो तो इस हाईटेक बंदोबस्त के साथ ही शुरू हो। टाइगर रिजर्व में चलने वाली जिप्सियों पर नजर रखने के लिए जीपीएस बेस्ड 'बघीरा" ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा। एप से जिप्सी की हर गतिविधि लोकेट होगी। इससे नेशनल पार्क में जिप्सी चालक नियम नहीं ताेड पाएंगे।

ऐसे होगा अमल

-पार्क प्रबंधन 80 से 90 मोबाइल खरीदेगा। गाइड को पार्क में प्रवेश के पहले मोबाइल दिया जाएगा।

-एप से पता चल सकेगा कि जिप्सी पार्क के अंदर कहां है, कितनी स्पीड में चल रही है और कहां रुकी है।

-पार्क भ्रमण के बाद गाइड मोबाइल गेट पर जमा कर देगा, जहां उसकी जांच की जाएगी।

-भ्रमण के दौरान नियम तोड़ने की स्थिति में एप से जानकारी मिल जाएगी।

यह जानना होगा मुश्किल

-एप में किसी तरह की कोई छेड़खानी तो नहीं की गई है।

-कोई मॉनीटरिंग सिस्टम नहीं, एप चेक करने से ही जानकारी मिलेगी।

-अगर जिप्सी के आगे-पीछे वन्य प्राणी आए, तो इसकी जानकारी नहीं मिलेगी।

इस तरह होती है मनमानी

पार्क में निर्धारित जोन के लिए कई बार जिप्सी वाहन रूट बदल देता है। 20 किमी प्रति घंटे की तय सीमा से ज्यादा वाहन नहीं दौड़ाए जा सकते, लेकिन चालक यह नियम नियम तोड़ते हैं। कई बार जिप्सियां बाघ को घेर कर खड़े हो जाती हैं जिससे बाघों को परेशानी होती है। पार्क में कहीं भी वाहन रोक दिया जाता है। शिकायत होने पर कोई सबूत नहीं होता जिससे जिप्सी चालक और गाइड बच जाते हैं।

यह है स्थिति

-बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 147 वाहन को प्रवेश की अनुमति है।

-सुबह 75 और दोपहर 72 वाहन पर्यटकों को पार्क का भ्रमण कराते हैं।

इनका कहना है

'बघीरा" एक जीपीएस बेस्ड है, जिससे पार्क के अंदर नेटवर्किंग की कोई समस्या नहीं होगी। इस एप में वाहन की हर गतिविधि की मॉनिटरिंग होगी। इसे बाद में चेक किया जा सकता है। इससे पार्क के अंदर जिप्सी चालकों की मनमानी पूरी तरह से रुक जाएगी।

-स्वरूप दीक्षित, डिप्टी डायरेक्टर, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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