उमरिया (नईदुनिया प्रतिनिधि)। उमरिया जिले में पिछले कई सालों से गोशालाओं के निर्माण को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की जा रही हैं लेकिन इसके बाद भी बेसहारा मवेशी सड़कों पर नजर आ रहे हैं। कुछ वर्ष पहले जिले की 15 ग्राम पंचायतों में गौशालाएं खोलने के संबंध में बैठक तात्कालीन कलेक्टर ने एक बैठक भी ली थी। उस समय मानपुर, करकेली एवं पाली जनपद क्षेत्र में पांच पांच गौशालाएं खोले जाने की चर्चा भी हुई थी। जिसकी जानकारी निर्धारित प्रारूप में उप संचालक मप्र गौपालन एवं पशुधन बोर्ड भोपाल को भेजी गई थी। उस समय यह भी बताया गया था कि मानपुर विकासखण्ड के ग्राम लखनौटी, उरदना, भमरहा, ताला, निझरिया, इंदवार, सेमरिया में गोशालाएं खोली जानी है। इसी तरह पाली के मालियागुडा, अमिलिहा, चौरी, घुनघुटी, खोलखम्हरा, तथा पाली के कौडिया 2, उंचेहरा, करकेली, बिलासपुर एवं पथरहठा में गौशला खोली जानी है।

यह सुविधाएं होंगी जरूरी

उस समय यह तय किया गया था कि जिस क्षेत्र में गौ वंश की संख्या ज्यादा हों, वही पर गौ शालााएं खोली जाए। गौशाला के लिए न्यूनतम 5 हेक्टेयर से अधिक भूमि चिन्हांकित की जाए। चिन्हित भूमि ऐसे स्थान पर हो, जहां वर्षा ऋतु मे जल भराव न हो एवं जहां गौ वंश के लिए पीने योग्य पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। गौशाला हेतु चिन्हित भूमि गांव से अत्यधिक दूरी पर नही होना चाहिए। चिन्हित स्थल हेतु यह भी सुनिश्चित किया जाए किकितने गौ वंश क्षमता के गौशाला की आवश्यकता है एवं अनुपात मे भूमि चिन्हित की जाए। बताया गया कि गौशाला का संचालन ग्राम पंचायत, स्वयं सेवी संस्थाओ, धार्मिक संस्थाओ व अन्य संस्थाओ द्वारा किया जाना है, इस हेतु संस्थाओं का चिन्हांकन भी किया गया था।

हाईवे के पास वाले गांवों को प्राथमिकता

हाईवे की आस पास वाली पंचायतों को चयन मे प्राथमिकता दी जानी थी जिससे पशुओ को सडक दुर्घटना से बचाने मे मदद मिलें। इतनी चर्चाएं होने के बाद भी आज तक बेसहारा मवेशियों के लिए कोई सुविधा नहीं हो पाई है। अभी तक जिले के मुदरिया में ही एक गोशाला का संचालन किया जा रहा है और वहां भी मवेशियों के लिए पर्यप्त सुविधाएं नहीं हैं। इससे गोशाला का संचालन करने में परेशानी उत्पन्ना हो रही है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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