उमरिया।

शहर के स्कूलों के पास से पान-तंबाकू की दुकानें नहीं हटाई जा रही हैं। यदि स्कूलों के पाास खुली पान-गुटकों की दुकानों को यदि हटा दिया जाए तो निश्चित तौर पर इसका प्रभाव कम हो सकता है। उमरिया शहर और जिले में सैकड़ों पान दुकानें स्कूलों के गेट पर खुली हुई हैं। स्कूल से सौ मीटर की दूरी पर तो इन दुकानों की संख्या बहुत ज्यादा है। उमरिया जिले में तंबाकू का उपयोग आमतौर पर लगभग अस्सी प्रतिशत लोग करते हैं। आदिवासी जिला होने के कारण यहां की संस्कृति में तंबाकू स्वागत का सबसे सहज साधन है। न सिर्फ कारोबार में बल्कि घर आने वाले मेहमानों को भी चूना-तंबाकू पेश की जाती है। तंबाकू से होने वाले खतरे पर रोक लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने वेट टैक्स बढ़ाने की बात कही है, लेकिन स्कूलों के आसपास खुली इन दुकानों को हटाने का प्रयास न तो सरकार ने कभी किया और ना ही प्रशासन ने।

यह है हाल

वर्ष 2012 में एक प्रो आर रंगासाई, डॉक्टर एवायजेएनआईएचएच के मार्गदर्शन में नेशनल एनवॉयरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के माध्यम से डॉ.राकेश कुमार तथा डॉ.एपी द्विवेदी ने एक सर्वे किया था। इस सर्वे में 257 मुख कैंसर के रोगी उमरिया जिले में पाए गए थे। इस रिपोर्ट को पिछले साल सार्वजनिक किया गया था। कैंसर रोगियों का ये आंकड़ा तंबाकू के सेवन के कारण ही तैयार हुआ था। हालांकि इस सर्वे के बाद यहां ऐसा कोई प्रयास नहीं हुआ जिससे तंबाकू के उपयोग को रोका जा सके और लोगों को कैंसर जैसे खतरनाक रोग का शिकार होने से बचाया जा सके। इससे जिले में जागरुकता अभियानों का अंदाजा लगाया जा सकता है।

यह भी खास

एक तरफ नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम चलाकर कैसर रोगियों को चिन्हित किया जाता है, वहीं दूसरी तरफ इस रोग के फलने-फूलने का कारण बनने वाली तंबाकू पर रोक नहीं लगाई जाती। स्कूलों के सामने शहर मे ही दर्जनों दुकानें हैं जहां गुटका-पाउचों की झालरें टंगी रहती हैं। गुटका पर प्रतिबंध लगाने के बाद अब तंबाकू और पान मसाला के अलग-अलग पाऊच ग्राहकों को दिए जा रहे हैं। ये और भी घातक हैं क्योंकि जो तंबाकू नहीं खाते हैं वे भी पान-मसाला खाने के आदी होते जा रहे हैं। ना सिर्फ स्कूली छात्र बल्कि महिलाएं भी तंबाकू से नजदीकी बढ़ा रही हैं। ये नजदीकी सिर्फ वेट बढ़ाने से कम नहीं हो सकती।

Posted By: Nai Dunia News Network

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