उमरिया (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जन्माष्टमी पर बांधवगढ़ में लगने वाले मेले को स्थागित करने के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन से कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव भी नाखुश हो गए हैं। 12 अगस्त की शाम बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने एक सादी विज्ञप्ति जारी करके हाथियों के खतरे की वजह से बांधवगढ़ में लगने वाला मेला स्थगित कर दिया। इस विज्ञप्ति में कहा गया है कि 9 अगस्त को हुई बैठक में कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव, एसपी प्रमोद सिन्हा और मंत्री मीना सिंह को हाथियों के खतरे की जानकरी दी गई थी। जबकि इस मामले में कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव ने नईदुनिया को बताया कि उन्होंने हाथियों के मूवमेंट और खतरे की जानकारी मांगी थी और बैठक मेले के संदर्भ में हुई ही नहीं है।

प्रबंधन ने बताया खतरा

शुक्रवार की शाम जारी विज्ञप्ति में पार्क प्रबंधन ने कहा है कि पार्क क्षेत्र में बेखौफ विचरण कर रहा जंगली हाथियों का झुंड लगातार वन क्षेत्र में उत्पात मचा रहा है। जिसको दृष्टिगत रखते हुए श्रद्धालुओं का प्रवेश वर्जित कर दिया गया है। हाल में पतौर परिक्षेत्र में दो ग्रामीणों को इन्हीं जंगली हाथियों ने गंभीर रूप से घायल भी किया था। इसके अलावा वन कर्मियों और गश्ती दल पर हमले का प्रयास एवम गाड़ियों का पीछा करने जैसी घटनाएं भी हो चुकी हैं। जंगली हाथियों की मूवमेंट से श्रद्धालुओं के सुरक्षा पर बड़ा सवाल है, जिसके दृष्टिगत श्रीकृष्ण जन्माष्टमी में बांधवाधीश मंदिर दर्शन प्रवेश वर्जित किया गया है।

यहां बताया हाथियों का मूवमेंट

पार्क अधिकारियों का कहना है कि ताला, खितौली, पतौर, पनपथा वन परिक्षेत्र में लगातार जंगली हाथियों की मूवमेंट है, जो हर रो वन क्षेत्र में उत्पात मचा रहे है। इसके अलावा सिद्धबाबा, शेषशय्या, राजबेहरा समेत बांधवाधीश मंदिर जाने के मार्ग एवम किला क्षेत्र में भी जंगली हाथियों की लगातार मुवमेंट की खबर मिल रही है। ऐसे में सदियों की परंपरा के अनुसार कृष्णजन्माष्टमी पर श्रद्धालु दर्शन करने बांधवाधीश पहुंचते है तो इन जंगली हाथियों का खतरा हो सकता है।

चार साल से हैं हाथी

खितौली, पतौर और पनपथा रेंज में हाथी पिछले चार साल से सक्रिय हैं और इसके बाद भी पिछले साल तक मेले का आयोजन यहां किया गया था। यह तीनों क्षेत्र ताला से 15 से 20 किलोमीटर दूर है। स्थानीय लोगों, जिप्सी चालकों, वन विभाग के छोटे कर्मचारियों के अनुसार वर्तमान में ताला क्षेत्र में एक भी जंगली हाथी नहीं है। सिद्धबाबा, शेषशय्या, राजबेहरा समेत बांधवाधीश मंदिर जाने के मार्ग एवम किला क्षेत्र में भी जंगली हाथी दिखाई नहीं दे रहे हैं। इसके बाद भी न जाने क्यों यह बड़ा झूठ बांधवगढ़ प्रबंधन द्वारा बोला जा रहा है।

तो फिर पर्यटन का क्या होग

बड़ा सवाल यह है कि जब जंगल में हाथियों के कारण एक दिन का मेला कराने में टाइगर रिजर्व प्रबंधन सक्षम नहीं है तो फिर अक्टूर से ताला में पर्यटन कैसे शुरू हो पाएगा। दरअसल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन जंगल में जंगली हाथियों की मौजूदगी को अपने फायदे के लिए उपयोग करता है। कभी इन हाथियों को बड़ा खतरा बताया जाता है और कार्यशालाओं के नाम पर लाखों रुपये खर्च कर दिए जाते हैं। कभी इन हाथियों को कर्नाटक की तरह कोई खतरा नहीं बताया जाता। यह भी कहा जाता है कि हाथियों की मौजूदगी से बाघों को खतरा नहीं है।

इनका कहना है

अभी बैठक में मेले को स्थगित करने जैसी कोई बात नहीं हुई है। हमने तो जंगली हाथियों के बारे में जानकारी मांगी थी और उन्होंने मेला स्थगित कर दिया। इस बारे में हम उनसे बात करेंगे।

संजीव श्रीवास्तव

कलेक्टर उमरिया

Posted By: Nai Dunia News Network

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