उमरिया।

ठंड का मौसम कुछ दिनों का ही रह गया है और जल्द ही मौसम में बदलाव होगा। इसी के साथ जंगल में पशु संग्राम की आशंका भी बढ़ जाएगी। इस स्थिति पर अभी से वन अधिकारियों में तैयारियों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। गर्मी का मौसम आने वाला है और इस मौसम में जंगल के अंदर होने वाले पशु संग्राम को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की तैयारी वन विभाग ने शुरू कर दी है। गर्मी के मौसम में जंगल के अंदर बाघों के बीच होने वाले आपसी टकराव को रोकने के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सशक्त रणनीति बनाई गई है। इस रणनीति के तहत जंगल के बाघों के बीच दूरी बनाए रखने के लिए अलग-अलग स्तर पर काम होगा। इस रणनीति के तहत गर्मी के मौसम में जंगल में गश्त बढ़ा दी जाएगी और टाइगर लोकेशन पर खास नजर रखी जाएगी। इसके लिए वन प्रबंधन ने अपनी तरफ से तीन स्तरों पर तैयारी की है जिसका उपयोग करके बाघों का संरक्षण बेहतर ढंग से किया जा सकता है।

ये है त्रिस्तरीय व्यवस्था

तीन स्तरों की निगरानी व्यवस्था कुछ इस ढंग से होगी कि जंगल का कोई भी हिस्सा बच न पाए। पैदल वनरक्षकों के अलावा वाहन सवार प्रहरी और हाथियों से जंगल के विभिन्न हिस्सों पर नजर रखी जाएगी। यदि दो बाघ आसपाास नजर आएंगे तो उस स्थान पर खासतौर से कैम्प किया जाएगा। नर और मादा बाघ के बीच यदि तीसरा बाघ दिखा तो उसे दूसरी दिशा में खदेड़ा जा सकता है।

गर्मियों में खुल जाता है जंगल

वन्य प्राणी विशेषज्ञ डॉ.आरके शुक्ला रिसर्च अधिकारी कान्हा का कहना है कि गर्मियों में जंगल खुल जाता है, पत्ते झड़ने और घास सूख जाने के कारण दूर तक का दृश्य दिखाई देता है। इससे टैरेटरी का विवाद शुरू हो जाता है। कोई बाघ यदि बाघिन के साथ है तो दूसरा बाघ वहां पहुंच जाता है, इससे भी टकराव बढ़ जाता है। जंगल खुला होने के कारण बाघों को दूर तक शिकार नजर आता है और वे एक दूसरे के क्षेत्र में पहुंच जाते हैं जिससे भी आपस में लड़ाई की घटनाएं होने लगती हैं।

गर्मियों में ज्यादा घटनाएं

जंगल के अंदर गर्मियों में ज्यादा घटनाएं होती हैं। इसके कई कारण है और उन कारणों को समझने के बाद ही वन प्रबंधन रोकथाम कें उपाय भी करता है। पिछले कुछ सालों में जंगल के अंदर बाघों के बीच टैरेटरी फाइट की जो घटनाएं हुई और जिन घटनाओं में बाघों की मौत हुई उनमें से ज्यादातर घटनाएं गर्मियों के मौसम में ही हुई। गर्मी में बाघ अपना क्षेत्र इसलिए बदलते हैं क्योंकि उन्हें पानी की तलाश रहती है और इस दौरान उनका आमना-सामना दूसरे बाघों से हो जाता है।

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दो बाघों के बीच विभिन्न कारणों से टकराव होता है। गर्मी के दिनों में ये घटनाएं बढ़ जाती है जिसके कई कारण है और इस विषय पर कई पुस्तकें भी लिखी गई हैं। बाघों को अलग करके तो नहीं रखा जाता सकता लेकिन उनके बीच किसी भी प्रकार का टकराव होने से पहले निगरानी दल ऐसे प्रयास कर सकते हैं जिससे टकराव को रोका जा सके। इसके लिए गश्ती दल को विशेष तौर पर निर्देश जारी किए गए

अनिल शुक्ला, एसडीओ बांधवगढ़

Posted By: Nai Dunia News Network

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