संजय कुमार शर्मा। उमरिया। महिलाएं लगातार सशक्तीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। बाजार बैठकी वसूली के काम में भी महिलाओं ने अपनी सहभागिता निभानी शुरू कर दी है। ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा गठित समूहों ने सामाजिक व आर्थिक उत्थान की दिशा में यह सशक्त शुभारंभ किया है। उमरिया कलेक्टर व जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने समूह की महिलाओं को यह जिम्मेदारी सौंपी है। पाली जनपद पंचायत के औढेरा, रौगढ़ सहित कई गांव में महिलाओं ने यह काम अपने हाथ में लिया है। सामान्य रूप से ग्रामीण महिलाओं के लिए यह काम थोड़ा कठिन माना जाता है, लेकिन महिलाओं के प्रयास ने इस कार्य को सहज बना दिया है। अब बाजार बैठकी से पंचायत की आय भी बढ़ गई है। बाजार बैठकी वसूली के लिए महिलाओं ने अपना एक समूह गठित किया है। समूह के माध्यम से सारा हिसाब किताब रखा जा रहा है।

आसान हुई वसूलीः बाजार बैठकी वसूल करने वाली आशा सिंह बताती हैं कि उन्हें वसूली करने में कोई समस्या नहीं आ रही है। दुकानदार एक बार में ही राशि दे देते हैं। जबकि अभी तक जब पुरुष वर्ग वसूली के लिए बाजार जाता था तो दुकानदार उन्हें दूसरे- तीसरे चक्कर बुलाने के बाद बैठकी राशि देते थे। रामरति और सुशीला और अन्य महिलाओं ने बताया कि जब भी वसूली के लिए जाती हैं तो बाजार में दुकानदार भी उनके साथ सहयोगात्मक रवैया अपनाते हैं। कोई भी विवाद नहीं होता और शांतिपूर्वक उन्हें राशि मिल जाती है।

सशक्त हो रहीं महिलाएं: कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव ने कहा कि उमरिया जिले में चाहे वह सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्य हों, चाहे स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर सामग्री निर्माण का कार्य हो अथवा सरकार की योजनाओं को आगे बढ़ाने का काम हो, जिले की महिलाओं ने उमरिया को नई पहचान दी है। इसी क्रम में महिलाओं ने बाजार बैठकी वसूली भी शुरू कर दी है, इसके लिए उन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आय का सशक्त साधनः बाजार बैठकी वसूली महिलाओं के हाथ में आने से उन्हें आए का सशक्त माध्यम में मिल गया है। बाजार बैठकी वसूली में अच्छा खासा कमीशन महिलाओं को मिल रहा है। इस काम से जुड़ी महिलाओं को प्रतिमाह छह से 10 हजार रुपये की कमाई हो रही है। जिससे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ जा रहा है। वसूली के क्षेत्र में महिलाओं के आने के बाद पंचायतों को भी आय में बढ़ोतरी हुई है। पंचायतों की आय बढ़ेगी तो विकास कार्य भी तेजी से होंगे।

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जिले की महिला समूहों को बाजार बैठकी की वसूली की जिम्मेदारी सौंपी है, इससे उनकी भी आय हो रही है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं। पहले पंचायत को 25 से 30 हजार की आय होती थी। महिलाओं को जिम्मेदारी सौंपने के बाद आय 40 से 45 हजार हो रही है।

इला तिवारी, जिला पंचायत सीईओ, उमरिया

Posted By: Nai Dunia News Network

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