कटनी-बिलासपुर रेलवे ट्रैक का एक बड़ा हिस्सा उमरिया जिले के सामान्य वनमंडल से होकर गुजरता है। पाली और घुनघुटी के लगभग 20 किलोमीटर जंगल को चीरता हुआ यह रेलवे ट्रैक बाघों के लिए भी खतरा बना हुआ है। इस रेलवे ट्रैक पर घुनघुटी और पाली के बीच कई बाघ, तेंदुए और अन्य जानवर ट्रेनों की चपेट में आ चुके हैं। जंगली जानवरों पर यहां मंडराते खतरे को देखते हुए उनके बचाव के लिए अब रेलवे से अंडरपास बनाने के लिए कहा जा रहा है।

तीसरी लाइन में अंडरपास : अनूपपुर और कटनी के बीच तीसरी लाइन का काम पिछले कई सालों से चल रहा है। रेलवे ने जंगल के पेड़ काटने की अनुमति भी वन विभाग से ली है। वन विभाग ने रेलवे को इसी शर्त पर अनुमति प्रदान की है कि जंगल के क्षेत्र में जहां भी जानवरों की क्रासिंग वाला हिस्सा है वहां रेलवे अंडर पास बनाए ताकि जानवरों को रेलवे ट्रैक क्रास न करना पड़े। उमरिया वन मंडल के डीएफओ मोहित सूद ने बताया कि इसके लिए रेलवे के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए गए हैं।

पुराने ट्रैक पर भी अंडरपास : रेलवे की तीसरी लाइन का काम तो चल रहा है और उस पर अंडरपास बन सकता है लेकिन पुराने रेलवे ट्रैक पर भी अंडर पास बनाए जाने की आवश्यकता वन विभाग ने रेलवे से जाहिर की है। इसके लिए भी वन विभाग के अधिकारियों ने रेलवे को पत्र लिखे हैं। अगर पुराने रेलवे ट्रैक पर भी अंडरपास बन जाता है तो जंगल के जानवर पूरी तरह से सुरिक्षत हो सकते हैं।

फेंसिंग से ज्यादा खतरा : कुछ वर्षों पहले इस रेलवे ट्रैक पर फेंसिंग के लिए सर्वे किया गया था लेकिन बाद में उसे यह कहकर खारिज कर दिया गया कि फेंसिंग जानवरों के लिए और बड़ी मुसीबत बन सकती है। सर्वे में फेंसिंग का प्रस्ताव बनने के बाद कुछ विशेषज्ञों ने इस पर यह कहकर आपत्ति उठा दी थी कि अगर जानवर फेंसिंग के बीच में फंस गए तो उनका बचना नामुमकिन हो जाएगा। यही कारण है कि फेंसिंग का प्रस्ताव पूरा नहीं हुआ।

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हमने रेलवे के अधिकारियों से चर्चा की है कि तीसरी लाइन के साथ अंडरपास बनाया जाए। इसके लिए आवश्यक पत्राचार भी किया गया है। इससे जंगल के जानवर ज्यादा सुरिक्षत होंगे।

-मोहित सूद, डीएफओ वनमंडल, उमरिया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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