उमरिया(नईदुनिया प्रतिनिधि)। दपूमरे ने पिछली बार की तरह एक बार फिर संभाग से गुजरने वाली चार अत्यंत महत्वपूर्ण यात्री ट्रेनों को अगले एक महीने के लिए एक बार फिर रद्द कर दिया है। यह सभी ट्रेनें पिछले दो महीने से ज्यादा समय से पहले ही रद्द थीं। इन सभी ट्रेनों को पहले 5 मई से और फिर 25 मई शुरू किया जाना था लेकिन ट्रेनों के शुरू होने वाले दिन ही इन्हें 25 जून तक रद्द किए जाने की फिर घोषणा कर दी गई। खासबात यह है कि इस बार भी रेलवे प्रबंधन ने गाडिय़ों के रद्द होने का कोई कारण तक नहीं बताया है। 28 मार्च से ट्रेनें बंद हैं। यह आदेश संबंधित स्टेशन मास्टरों तक पहुंचा दिया गया है, जिसके मुताबिक भोपाल-बिलासपुर, जबलपुर-अंबिकापुर, बिलासपुर-रीवा एवं रानी कमलापति-सांतरागाछी अप तथा डाऊन ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। यह सभी ट्रेनें पहले 28 मार्च से 5 मई तक रद्द थीं इसके बाद इन्हें 25 मई तक रदद् कर दिया गया था। पिछली बार जब ट्रेनें रद्द की गई थीं तो यह संदेह व्यक्त किया गया था कि अब यह ट्रेनें 24 मई के बाद भी चल पाएंगी या नहीं। एक बार फिर ट्रेनों के रदद् हो जाने से संदेह सच साबित हुआ। ट्रेनों को बंद रखने का कोई कारण भी अभी तक नहीं बताया गया है। उल्लेखनीय है कि इससे

पूर्व तक ट्रेनों के निरस्त होने के पीछे इंटरलाकिंग, तीसरी लाइन का निर्माण, रखरखाव आदि कारण बताए जाते थे, पर अब इसका उल्लेख बंद कर दिया गया है।

तीन महीने का संकटः 28 मार्च से ट्रेनें प्रभावित हो रही हैं और 25 जून तक तीन महीने लंबा संकट हो जाएगा। इसके बाद भी कोई नेता अपनी आवाज बुलंद नहीं कर रहा है। जबलपुर से अंबिकापुर जाने वाली ट्रेन पहले ट्रेन 3 मई तक रद्द की गई थी। इसके अलावा अंबिकापुर-जबलपुर 4 मई तक, भोपाल-बिलासपुर 3 मई तक, बिलासपुर-रीवा 3 मई तक, रीवा-बिलासपुर 4 मई तक, रानी कमलापति-संतरागाछी हमसफर 30 मार्च से 27 अप्रैल एवं संतरागाछी-रानी कमलापति 31 मार्च से लेकर 28 अप्रैल तक निरस्त की गई थी। इसी महीने चार मई की शाम को एक नया आदेश प्रसारित करके फिर ट्रेनों को रद्द कर दिया गया था और अब एक बार फिर नया आदेश जारी कर दिया गया।

चालू रहेंगी मालगाड़ियां: इस दौरान एक भी मालगाड़ी का संचालन प्रभावित नहीं होगा। सवाल उठता है कि जब उन्ही पटरियों पर गुड्स ट्रेने दौड़ सकती हैं तो यात्री ट्रेनों को चलाने मे क्या दिक्कत है। सच्चाई यह है कि गर्मी आते ही उद्योगपतियों के पॉवर प्लांटों तक कोयला पहुंचाने के लियेनयात्रियों को मुसीबत मे झोंकना रेलवे की आदत बन चुका है। जब भी रेल प्रबंधन किसी बहाने से यात्री ट्रेने रद्द करता है, उस दौरान मालगाडिय़ों के परिचालन मे 10 से 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जाती है।

नहीं होता विरोधः रेलवे की मनमानी सिर्फ बिलासपुर से कटनी के बीच ही क्यों चलती है, क्यों नहीं नागपुर, रायपुर तथा अन्य क्षेत्रों मे यात्री गाडिय़ों को इस तरह अचानक रद्द किया जाता है। यह ज्वलंत प्रश्न आज सबकी जुबान पर है। जानकारों का मानना है कि शहडोल संभाग की राजनैतिक शून्यता और जनप्रतिनिधियों मे इच्छा शक्ति आभाव इस दुर्दशा का मुख्य कारण है। जिन लोगों को यहां की जनता ने 4 लाख वोटों से जिता कर दिल्ली भेजा, उन्होने कभी भी इस अन्याय पर मुंह खोलना उचित नहीं समझा। उमरिया जिले से खुलेआम ट्रेनो के स्टापेज छीने जा रहे हैं, इस संबंध मे भी सांसद की बोलती बंद है। जिसका नतीजा सबके सामने है।

बढ़ गई परेशानीः ट्रेन सुविधाओं मे हो रही कटौती तथा स्टेशनो पर स्टापेज समाप्त करने से जहां जिले का विकास अवरूद्ध हुआ है। वहीं आम जनता को भी इससे भारी दिक्कत हो रही है। ऐसे छात्र-छात्रायें जो पाली, नौरोजाबाद सहित विभिन्ना इलाकों से उमरिया आकर पढ़ाई कर रहे हैं, उनकी और भी ज्यादा फजीहत है। इन दिनो महाविद्यालयीन परीक्षायें चल रही हैं। जो सुबह 7 बजे प्रारंभ हो जाती है, ऐसे मे साधन न होने के कारण कई छात्र-छात्राओं को रात मे ही उमरिया आना पड़ रहा है। कई छात्राएं तो होटलों मे रूक रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close