उमरिया(नईदुनिया प्रतिनिधि)। बांधवगढ़ के जंगल से सटे गांव में जंगली हाथियों द्वारा सैकड़ों किसानों की फसलों को बर्बाद कर दिया गया है। कई बार इस संबंध में शिकायत करने के बाद जब प्रशासन ने सर्वे शुरू किया तो पटवारियों ने मनमानी शुरू कर दी। किसानों की शिकायत है कि पटवारी सर्वे ठीक से नहीं कर रहे हैं। बल्कि वे मनमाने ढंग से सर्वे कर रहे हैं। इस संबंध में शनिवार को उमरिया पहुंचे ग्रामीणों ने जनजातीय कार्य विभाग की मंत्री मीना सिंह से मुलाकात की और उनके सामने अपनी समस्या रखी। मंत्री मीना सिंह ने सभी ग्रामीणों की बातों को ध्यान पूर्वक सुना और इसके बाद उन्होंने इस संबंध में कलेक्टर से चर्चा की। बांधवगढ़ के जंगल में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है जिससे किसान परेशान हैं। किसानों का कहना है कि न सिर्फ जंगली हाथी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं बल्कि वे उनके घरों को भी नुकसान पहुंचाने से पीछे नहीं हटते।

नई टीम करेगी सर्वेः मंत्री मीना सिंह ने जब कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव से इस संबंध में फोन पर चर्चा की तो यह नतीजा निकल कर आया है कि अब दोबारा से उन गांवों में सर्वे कराया जाएगा जहां हाथियों ने फसलों को बर्बाद किया है। कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि मंत्री मीना सिंह से हुई चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया है कि उमरिया से चार पटवारियों को भेजा जाएगा जो मानपुर क्षेत्र के उन गांव में सर्वे करेंगे जहां हाथियों ने फसलों को नष्ट किया है। दोबारा होने वाले सर्वे के बाद ही किसानों को मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा।

यह लगाया आरोपः इस संबंध में किसानों ने एक शिकायत पत्र मीना सिंह को सौंपा है। शिकायत पत्र में कहा गया है कि जंगल से सटे उनके गांव में हाथियों ने जब फसलें बर्बाद कर दी तो पटवारी सर्वे करने पहुंचे। सर्वे के दौरान पटवारियों ने फसलों की नुकसानी को पूरा पूरा नहीं दर्शाया है। जिन किसानों ने अपने खेतों को अधिया पर दिया था उसका मुआवजा बनाने में भी आनाकानी कर रहे हैं। कहीं मुआवजा वास्तविक कृषक के नाम से बनाया गया है तो कहीं खातेदार के नाम से। इससे कई तरह की समस्याएं किसानों और खातेदारों के बीच उत्पन्न हो रही है।

जंगली हाथियों का आतंकः बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र के जंगल से लगे गांव में जंगली हाथियों का आतंक पिछले 3 साल से बना हुआ है। छत्तीसगढ़ और झारखंड की दिशा से आए हाथियों ने अपना स्थाई निवास बांधवगढ़ को बना लिया है। यहां विचरण करने वाले हाथियों की संख्या 40 से ज्यादा है। यह हाथी छोटे-छोटे झुंड में बैठे हुए हैं और अलग-अलग गांव में पहुंचकर इसी तरह के आतंक मचाते रहते हैं। जिसकी वजह से ना सब सिर्फ किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं बल्कि उनके मकान भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local