संजय कुमार शर्मा, उमरिया

मवेशियों की लम्पी स्किन बीमारी से बांधवगढ़ के वन्य प्राणी भी प्रभावित हो सकते हैं। इस खतरे को देखते हुए न सिर्फ पशुपालन विभाग बल्कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अधिकारी भी अलर्ट हो गए हैं। मवेशियों में फैल रही लम्पी स्किन बीमारी को लेकर बांधवगढ़ में अलर्ट जारी कर दिया गया है। जंगल से लगे गांवों में लोगों से कहा गया है कि वे अपने मवेशियों में इस बीमारी का लक्षण देखें तो इसकी सूचना पशुपालन विभाग को तुरंत दें ताकि मवेशियों के उपचार की व्यवस्था की जा सके।

बांधवगढ़ से लगे हैं कई गांव

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से कई गांव लगे हुए हैं जहां रहने वाले ग्रामीण पशु पालन करते हैं। यह ग्रामीण अपने पशुओं को चारा चराने के लिए जंगल में लेकर जाते हैं जिससे लम्पी स्किन बीमारी के संक्रमण के जंगल तक पहुंचने की आशंका बनी रहती है। बांधवगढ़ के कोर जोन में अभी भी 10 गांव बसे हुए हैं जहां हजारों की संख्या में मवेशी है। इसी प्रकार बांधवगढ़ के बफर जोन में भी सौ के बरीब गांव हैं जहां भी हजारों में मवेशी हैं। ग्रामीणों से कहा गया है कि वे अपने जानवरों पर नजर रखें और उनमें अगर बीमारी के लक्षण नजर आते हैं तो पहले उसका उपचार करएं अन्यथा यह बीमारी तेजी से फैल सकती है।

इसलिए खतरा

जंगल से लगे सैंकड़ों गांवों के हजारों मवेशी जंगल में चारा चरने के लिए आते हैं। अगर उन मवेशियों में लम्पी स्किन बीमारी होती है तो वे चारा चरते समय अपना संक्रमण जंगल में छोड़कर जा सकते हैं। जिस स्थान पर मवेशी चारा खाते हैं वहीं जंगल के शकाहारी जानवर भी चारा खाने आते हैं। इनमें हिरण, सांभर और चीतल शामिल हैं। इस तरह यह रोग जंगल के इन जानवरों में हो सकता है। इन जानवरों का शिकार बाघ करते हैं और यदि बाघ किसी संक्रमित मवेशी या फिर वन्य प्राणी का शिकार कर लेता है तो वह भी इस रोग से प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि बांधवगढ में सतर्कता बरती जा रही है।

पहले हो चुकी है सैंपलिंग

लम्पी स्किन बीमारी दो साल पहले वर्ष 2020 में सबसे पहले आई थी। उसी दौरान बांधवगढ़ से लगे गांवों में पाले जाने वाले जानवरों की सैंपलिंग बांधवगढ़ प्रबंधन ने करा ली थी। उस समय जंगल से लगे किसी भी गांव के मवेशियों में लम्पी स्किन बीमारी के कोई लक्षण नहीं पाए गए थे। इस बारे में चर्चा करते हुए बांधवगढ़ के डाक्टर नितिन गुप्ता ने बताया कि बांधवगढ़ प्रबंधन इस तरह के रोगों को लेकर हमेशा सतर्क रहता है और अभी भी पार्क के कर्मचारियों और जंगल से लगे गांव में रहने वाले ग्रामीणों से सतर्क रहने के लिए कहा गया है।

यह है लक्षण

बीमारी एक विषाणु जनित रोग है, जो चमड़ी पर गाठों के रूप में फैलता है। इस बीमारी के मुख्य लक्षण पशुओं में तेज बुखार, नाक से पानी, लार बहना, दुग्ध उत्पादन में गिरावट आना और लिम्फ नोंड में सूजन आ जाती है। पशुपालकों से आग्रह किया गया है कि अगर पशुओं में लम्पी स्किन बीमारी के बताए गए लक्षण पाए जाते है, तो पशुपालक तत्काल अपने नजदीक के पशु चिकित्सालय को सूचित करें। अगर पशुओं को इस बीमारी के लक्षण है, तो उन्हें अन्य स्वस्थ्य पशुओं से अलग बांधे एवं दाना चारा एवं पानी अलग से करायें। पशुपालकों को ऐसे बीमार पशु का पशु चिकित्सक द्वारा ईलाज कराना चाहिये।

रहना चाहिए सतर्क

लम्पी स्किन बीमारी से पशु पालकों को सतर्क रहने की सलाह उप संचालक पशु चिकित्सा एवं पशुपालन विभाग डा वाइपी तिवारी ने भी दी है। उन्होंने नईदुनिया से चर्चा करते हुए बताया कि फिलहाल तो इस बीमारी के लक्षण उमरिया जिले के पशुओं में देखने को नहीं मिले हैं लेकिन फिर भी आवश्यकता इस बात की है कि हम सतर्क रहें और लक्षण को समझें। उन्होंने बताया कि जंगल से लगे गांवों में भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है ताकि यह बीमार जिले में कहीं भी न फैलने पाए।

Posted By: Nai Dunia News Network

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