कोर्ट के आदेश के इंतजार में कंडम हो रहे थानों में पड़े वाहन

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विदिशा। सिविल लाइन थाना परिसर में इस तरह पड़े वाहन।

विदिशा। पुलिस थाने में सालों से विभिन्ना प्रकरणों में जब्त किए वाहन नीलामी व आदेश के इंतजार में कंडम होते जा रहे हैं। परिसर में खड़े सैकड़ों वाहनों में धूप व बारिश का पानी लगने से यह कंडम अवस्था में पहुंच चुके हैं। इन बेकार हो रहे वाहनों पर अब तक किसी ने भी ध्यान नहीं दिया है। शहर के दो प्रमुख थाने कोतवाली और सिविल लाइन में दो पहिया, चार पहिया वाहनों की कतारें लगीं हैं, हालत ये है कि कुछ वाहन तो पूरी तरह से नष्ट होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। सिविल लाइन थाने में ही सौ से ज्यादा दो पहिया वाहन हैं। वहीं कोतवाली थाने में इसकी संख्या दो गुनी तक है। कोतवाली थाना परिसर में तो अंदर बैरक के पास ही वाहनों का ढेर लगा हुआ है।

किसी भी मामले में यदि वाहन को थाने पर जब्त कर लिया जाता है तो यह वाहन थाना परिसर से कब निकलेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं होती। पुलिस के मुताबिक जब्ती के वाहनों में किसी के मालिक का पता नहीं है, तो किसी के केस अभी तक कोर्ट में चल रहे हैं। इसके अलावा जिन पक्षकारों के वाहन चोरी में जब्त किए थे वह आज तक वाहन लेने थाने नहीं पहुंचे। कुछ वाहन ऐसे हैं, जो सड़क दुर्घटना में इतनी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए हैं कि वाहन मालिक उसे लेकर ही नहीं जाता। ऐसे में पुलिस थाने में जब्त वाहनों की संख्या भी लगातार बढ़ती ही जा रही है।

पुलिस को करनी पड़ती है देखभाल

सिविल लाइन थाना प्रभारी राजेश सिन्हा का कहना है कि किसी भी मामले में पुलिस वाहन जब्त करती है तो उसमें पुलिस की भूमिका देखभाल से ज्यादा की नहीं होती। पुलिस के पास कोई अधिकार नहीं है पुलिस विभाग वाहन की नीलामी नहीं कर सकता है। नियमों के उल्लंघन के किसी भी मामले में कलेक्टर के आदेश से ही कोई भी वाहन राजसात होता है तो उसकी नीलामी की अनुमति कलेक्टर ही देते हैं। इसके साथ ही अपराधिक मामलों में पकड़े गए वाहनों का निराकरण न्यायालय के आदेश के बाद ही होता है इसके बाद ही नीलामी हो सकती है।