राजेंद्र शर्मा, विदिशा। कन्हैया के अनन्य भक्त रहे कवि सूरदास और मीरा द्वारा रचित बधाई गीतों का सिलसिला शहर के प्राचीन व्यंकटेश बालाजी मंदिर में कन्हैया के जन्मोत्सव के आठ दिन पहले से शुरू हो जाता है। हस्त लिखित यह बधाई गीतों का गायन पिछले 150 साल से लगातार जारी हैं। खास बात यह है कि यह संभवतः पहला मंदिर होगा जहां बधाई उत्सव में शामिल होने वाले सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद के साथ बधाया(दक्षिणा) भी दी जाती है जिसे श्रद्धालु भगवान का आशीर्वाद मानकर अपनी तिजोरी में रख लेते हैं।

यह बहुत कम लोगों को ज्ञात होगा कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के दौरान गाई जाने वाली बधाईयां जो मथुरा और वृंदावन में गाई जाती हैं, वह बधाईयां शहर के प्राचीन व्यंकटेश बालाजी मंदिर में 150 साल पहले से चलीं आ रही हैं। मंदिर के पुजारी रहे पंडा स्व. जगन्नााथ प्रसाद ने बधाई गीतों को अपने हाथ से लिखा था जो मंदिर के पुजारियों के पास आज भी सुरक्षित हैं। पुजारी पंडित रवि चतुर्वेदी बताते हैं कि आठ दिन तक चलने वाली इन बधाईयों में शहर के आठ परिवार पिछली तीन से चार पीढ़ियों से जुड़े हुए हैं। इन्हीं आठ दिन में अन्य नये कई परिवार के श्रद्धालु भी बच्चों के जन्मोत्सव या अन्य किसी उत्सव को लेकर बधाईयां कराते हैं। बधाई उत्सव में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को रात में चार से पांच मिठाई के लड्डूओं के साथ पांच से 10 रुपये तक का बधाया दिया जाता है जिसे श्रद्धालु भगवान का आशीर्वाद समझकर अपने पास रखते हैं।

रात में 9 बजे से शुरू होता है उत्सव

कन्हैया का जन्मोत्सव भले ही देश भर में 19 अगस्त को मनाया जाएगा, लेकिन बालाजी मंदिर में बधाई उत्सव शुरू हो गया है जिसमें श्रद्धालु बधाई गीतों पर झूमते नजर आते हैं। पुजारी विशाल चतुर्वेदी बताते हैं रात में 9 बजे के बाद बधाई गीतों का सिलसिला शुरू हो जाता है जो देर रात तक चलता रहा है। उन्होंने बताया कि इस साल हमने फेसबुक पर उसका लाइव प्रसारण भी शुरू किया है। जन्मोत्सव के दिन यहां पर हर साल भगवान श्रीकृष्ण की जन्म पत्रिका भी बनाई जाती है जिसका विधिवत वाचन भी किया जाता है और अगले दिन पूरा मंदिर परिसर सजाया जाता है जहां पर मटकी छेदन दधिखाना महोत्सव मनाया जाता है जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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