विदिशा (नवदुनिया प्रतिनिधि)। केंद्र सरकार का कहना हैं कि जून की खुदरा महंगाई दर 7.01 प्रतिशत से गिरकर जुलाई में 6.71 प्रतिशत के स्तर पर आ गई है लेकिन शहर के फुटकर बाजार में इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। महंगाई दर घटने के दावे के बावजूद खानपान और रोजमर्रा की वस्तुओं में बीते साल की तुलना में करीब तीस फीसद की वृद्धि बताई जा रही है।

दिनोंदिन बढ़ती महंगाई ने गरीब और माध्यमवर्गीय परिवारों का जीना मुश्किल कर दिया है। खाद्य तेल से लेकर दूध, आटा, दाल, चावल सहित पेट्रोल - डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों पर कोई अंकुश नहीं लग पा रहा हैं। इधर , केंद्र सरकार आंकड़ों के जरिए महंगाई कम होने का दावा कर रही है लेकिन हकीकत इसके उलट है। शहर के लोगों का कहना है कि जिस गति से महंगाई बढ़ रही है,उस हिसाब से आमदनी नहीं बढ़ रही है, जिसके कारण परिवार पालना मुश्किल हो गया हैं।

तीस से चालीस फीसद तक बढ़े दाम

पिछले साल और इस साल की तुलना करें तो रोजमर्रा की वस्तुओं में दामों में तीस से चालीस फीसद की बढ़ोतरी हुई हैं। पिछले साल सौ रूपये लीटर बिकने वाला खाद्य तेल इस वर्ष 130 से 140 रुपये बिक रहा हैं। यही स्थिति दाल - चावल और अन्य खानपान की वस्तुओं की हैं। बीते साल जुलाई के माह में तुवर दाल फुटकर में 80 से 85 रुपये किलो बिक रही थी। इस साल जुलाई में दाल 100 रुपये और अगस्त में 115 रुपये किलो बिक रही है। बीते एक माह के दौरान तुवर दाल में 1500 रुपये क्विंटल की तेजी आ गई हैं। इसी तरह पैकबंद पांच किलो आटा पिछले साल 120 रुपये में मिलता था जो अब 150 रुपये का हो गया है।

दाम बढ़े पर व्यापारियों का मुनाफा नहीं बढ़ा

इस महंगाई से आम और खास सब परेशान हैं। खरीदने वाले से लेकर बेचने वाले तक परेशान हैं। फुटकर किराना व्यापारी आशीष जैन के मुताबिक महंगाई बढ़ने के कारण लागत से लेकर बिजली, मजदूरी सहित अन्य खर्चें बढ़ गए है लेकिन दुकानदारों का मुनाफा नहीं बढ़ा है। जिस वस्तु पर पहले पांच रुपये मिलते थे, अब भी उतनी ही रही मिल रही है जबकि लागत अधिक लगाना पड़ रही हैं। वे कहते हैं कि महंगाई दर घटने से आम नागरिकों को कोई राहत नहीं मिली हैं। इसी तरह व्यापार महासंघ के उपाध्यक्ष नीरज चौरसिया कहते हैं कि केंद्र सरकार महंगाई कम करने के नाम पर आंकड़ों की बाजीगरी कर रही हैं।

मसालों में लगा महंगाई का तड़का

इस वर्ष रसोई की वस्तुओं की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। मसालों तक में महंगाई ने तड़का लगा दिया हैं। पिछले साल 180 रुपये किलो बिकने वाली लाल मिर्च 280 रुपये और 120 रुपये किलो बिकने वाला धनिया अब 200 रुपये किलो हो गया हैं। इसी तरह आलू - प्याज के भाव भी कम होने बजाय बढ़ गए है। सबसे ज्यादा तेजी साबुन और वाशिंग पाउडर में बताई जा रही है। कपड़े धोने की चार साबुनों का पैक साल भर पहले 60 रुपये में मिलता था जिसकी कीमत अब 120 रुपये हो गई है।इसी तरह 45 रुपये में मिलने वाला वॉशिंग पाउडर 70 रुपये का हो गया हैं।

महंगाई ने बिगाड़ा घर का बजट

बेकाबू होती जा रही महंगाई ने घर का बजट बिगाड़ दिया हैं।शिक्षक अनिल शर्मा बताते है कि उनके परिवार के लिए पिछले साल 3 हजार रुपये में महीने भर का किराना सामान आ जाता था, अब मासिक किराना 5 हजार रुपये का हो गया हैं।इसके अलावा दूध और पेट्रोल खर्च भी काफी बढ़ गया है। गृहिणी तेजस्विनी त्रिवेदी का कहना था कि महंगाई के इस दौर में घर चलाना मुश्किल हो गया हैं। महंगाई की तुलना में आमदनी नहीं बढ़ने से मध्यमवर्गीय परिवार भविष्य के लिए बचत की सोच भी नहीं पा रहा हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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