विदिशा। भाजपा की बड़ी नेता रही सुषमा स्वराज जब वर्ष 2009 में पहली बार विदिशा आई थी तो उन्होंने क्षेत्र के मतदाताओं से भाई बहन का रिश्ता बनाया था। वे हर भाषणों में इसे दोहराती थी। वे क्षेत्र के लोगों से रक्षा का वचन भी मांगती थी। यही वजह रही कि वे इस क्षेत्र की निवासी नहीं होने के बावजूद लोगों के दिलो में अपनी जगह बनाने में कामयाब हो गई थी।

विदिशा संसदीय क्षेत्र से लंबे समय तक सांसद रहने के बाद भाजपा ने शिवराज सिंह चौहान को प्रदेश का सीएम बना दिया था। इसके बाद हुए उपचुनाव में रामपाल सिंह राजपूत सांसद बने थे।

इसके बाद वर्ष 2009 में जब आम चुनाव हुए तो भाजपा ने यहां से पार्टी की कद्दावर नेता सुषमा स्वराज को प्रत्याशी बनाया था। इसके पहले सुषमा का विदिशा से सीधा से जुड़ाव नही था। लेकिन जब वे प्रचार के लिए गांवो में सभाएं करती थी तो उनका भाषण राजनीतिक न होकर पूरी तरह भावनात्मक होता था।

वे हर सभा में कहती थी कि यहां के मतदाता उनके भाई हैं। एक बहन उनसे रक्षा का वचन लेने आई हैं। वे कहती थी कि इस क्षेत्र के मतदाताओं के सम्मान की वह भी रक्षा करेंगी। उनकी इस शैली से वे सीधे मतदाताओं के दिल में जगह बनाती थी। पहले चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी का फार्म निरस्त होने के बावजूद वे सतत प्रचार में जुटी रही।

पहला चुनाव उन्होंने एक लाख से अधिक वोटो से जीता। चुनाव जीतने के बाद वे जिले के अलग अलग क्षेत्रो में आभार मानने पहुंची। उन्होंने पहले चुनाव के बाद कहा था कि वे अपने संसदीय क्षेत्र में हर माह चार दिन रहेंगी।

इस पर उन्होंने पूरे पांच साल अमल किया। लेकिन दूसरे कार्यकाल में वे शारीरिक अस्वस्थता के चलते इसे कायम नहीं रख पाई। वर्ष 2014 से 2016 तक वे क्षेत्र से सीधे जुड़ी रही। इसके बाद किडनी का ऑपरेशन होने पर वे करीब ढाई साल से विदिशा नही आई थी। आखरी बार वे विदिशा पिछले साल आडिटोरियम के लोकार्पण कार्यक्रम में भाग लेने आई थी।

Posted By: Hemant Upadhyay

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