अजय जैन, विदिशा। रात के समय बाढ़ के कारण नदी का पानी चिंघाड़ रहा था। नदी का जल स्तर भी बढ़ रहा था। मन में डर समाने लगा था लेकिन मैंने बरसते पानी में लोहे की सरियों को पकड़कर पूरा ध्यान ईश्वर में लगा दिया। दस घंटे तक सरिया निकले पुल के पिलर पर खड़ी रही और रात चार बजे एक नाव अपनी ओर आती दिखाई दी तो उम्मीद की किरण जागी। जैसे - तैसे नाव में सवार हुई तो किस्मत दगा दे गई और नाव पलटने से मैं फिर नदी के बहाव में बहने लगी। इन विकट स्थितियों में भी अपना हौसला नहीं खोया और चार घंटे बाद ग्रामीणों की मदद से नदी का किनारा मिल गया। यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं बल्कि रक्षाबंधन के दिन बेतवा नदी में बही सोनम दांगी की आपबीती है, जो मुश्किलों में भी हार नहीं मानने की सीख देती हैं।

जिंदगी और मौत से जूझने के दो दिन बाद अपने घर पहुंची सोनम कहती है कि जिसकी डोर ईश्वर से बंधी हो, उसकी जिंदगी की डोर कैसे टूट सकती हैं। अपने 12 साल के इकलौते बेटे को दुलारते हुए वह बताती है कि जिस वक्त वह नदी में गिरी तब से लेकर नदी में 14 घंटे बिताने तक वह पूरे होशोहवास में थी। उसके मन में आखरी तक यह ख्याल नहीं आया कि अब वह जिंदा नहीं बचेगी। सोनम के मुताबिक गुरुवार की शाम करीब छह बजे नदी में गिरने के बाद वह आठ किमी तक नदी के तेज बहाव में बहती चली गई। अचानक नदी के बीचोबीच उसका शरीर पुल के पिलर के लिए लगाई गई सरियों से टकराया और उसने इन सरियों को कसकर पकड़ लिया और अधूरे पिलर पर पैर टीका लिए। धीरे धीरे रात गहराने लगी थी। मदद के लिए कुछ देर आवाजें भी लगाई लेकिन पानी के शोर में यह आवाज दब गई। आसमान से लगातार पानी बरस रहा था। आसपास पानी ही पानी दिखाई दे रहा था। जब वह सरियों तक पहुंची थी तब पानी कमर तक था लेकिन लगातार वर्षा के कारण नदी का जल स्तर तेजी से बढ़ने लगा था। वह जल्दी सुबह होने का इंतजार कर रही थी। इस बीच पूरा माहौल डरावना लग रहा था। इस माहौल से ध्यान हटाने के लिए उसने ईश्वर की आराधना शुरू कर दी। दस घंटे तक इसी हालत में खड़ी रहने के बाद शरीर का निचला हिस्सा जवाब देने लगा था लेकिन हौसला बरकरार था। तड़के करीब चार बजे नदी के बीच से थोड़ी लाइट आती दिखाई दी। नाव में सवार लोग उन पर टार्च की रोशनी फेंक रहे थे लेकिन शरीर की हालत ऐसी हो गई थी कि मुंह से कोई आवाज नहीं निकल रही थी। कुछ देर बाद नाव उनके करीब पहुंच गई लेकिन जहां वह खड़ी थी, वहां से नाव में बैठना मुश्किल हो रहा था।बचाव दल ने किसी तरह रस्सी की मदद से उन्हें नाव में बैठाया और उन्हें लाइफ जैकेट पहना दिया। नाव को वापस किनारे की ओर मोड़ते समय अचानक संतुलन बिगड़ा और नाव में सवार सभी लोग पानी में बहने लगे। बचाव दल के लोग कुशल तैराक होने से किनारे पर पहुंच गए लेकिन वह आगे बहती चली गई। लाइफ जैकेट होने के कारण वह डूबी नही और छह किमी तक बहती चली गई। राजखेडा गांव के पास पानी का बहाव कम होने पर स्थानीय ग्रामीणों की मदद से वह किनारे तक पहुंचने में कामयाब हो गई। सोनम कहती हैं कि नदी के बीच वह हिम्मत छोड़ देती तो आज जीवित नहीं होती। वह कहती है कि ईश्वर ने उसे नया जीवन दिया हैं।

मौत से जंग जीतने के बाद भाई को बांधी राखी

दो भाईयों की इकलौती बहन सोनम गुरुवार को रक्षाबंधन पर दोनों भाइयों को राखी बांधने के लिए ही गंजबासौदा से पडरिया के लिए छोटे भाई कल्याण दांगी के साथ निकली थी। घर पहुंचने से पहले हुए इस हादसे ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया था।कल्याण के मुताबिक उस दिन पूरे गांव में रक्षाबंधन का त्योहार नहीं मना। हर कोई गांव की बेटी की वापसी का इंतजार कर रहा था। शनिवार को सोनम अस्पताल से वापस गांव पहुंची तो रिश्तेदारों से लेकर गांव के लोगों का घर पर तांता लगा रहा। दोपहर के समय सोनम ने दो दिन बाद अपने भाई कल्याण और गोलू को राखी बांधी। उस समय पूरे परिवार के चेहरों पर खुशी के आंसू छलक रहे थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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