बेतवा से 40 फीट दूर सड़क पर रुके पान में किया किया पितरों का तर्पण

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विदिशा। बेतवा घाट से करीब 100 मीटर दूर पशु बाजार तक पहुंचे पानी में तर्पण करते श्रद्धालु

विदिशा। नवदुनिया प्रतिनिधि

पिछले एक पखवाडे से लगातार हो रही बारिश के कारण पितृ पक्ष के पहले ही दिन श्रद्धालुओं को अपने पितरों का तर्पण करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बेतवा के घाटों पर बाढ़ का पानी होने के कारण पशु बाजार, त्रिवेणी गेट और मुक्तिधाम में तर्पण करना पड़ा। बेतवा घाट से करीब 100 मीटर दूर पशु बाजार तक पहुंचे कीचड़युक्त पानी में श्रद्धालुओं को तर्पण करना पडा। घाटों से हटकर सड़क और पशु बाजार में तर्पण करने की स्थिति करीब 30 साल बनना बताया जा रहा है।

मालुम हो कि शुक्रवार से पितृ पक्ष शुरू हो गए हैं। पहले दिन पूर्णिमा का श्राद्ध किया गया। सुबह 6 बजे के पहले से ही श्रद्धालु बेतवा में तर्पण करने पहुंच गए थे। लेकिन वहां जानकीकंड और सरयू महाराज के मंदिर तक पानी होने के कारण बड़वाला घाट और चरणतीर्थ पर श्रद्धालु नहीं पहुंच सके। जिसके चलते पशु बाजार के पास ही उन्हें कीचड़ में ही तर्पण करना पड़ा। कुछ लोग नया पुल पार करके उस पार पहुंचे और त्रिवेणी के गेट पर बैठकर अपने पितरों को तर्पण कराया। इधर गौशाला मार्ग से पहुंचकर कुछ श्रद्धालुओं ने मुक्तिधाम में पहुंचकर अपने पितरों का तर्पण किया। इस संबंध में ज्योतिषाचार्य पंडित संजय पुरोहित ने बताया कि उन्होंने त्रिवेणी के गेट पर तर्पण कराया है। इसके लिए कुस, काला तिल, दूध, सफेद फूल आदि लेकर श्रद्धालु पहुंचे थे। उन्होंने शास्त्रीय विधान के तहत बेतवा में तर्पण कार्य संपन्ना कराया। उन्होंने बताया कि वह हर साल बेतवा के चरणतीर्थ घाट पर तर्पण कराते थे। लेकिन मंदिर पहुंचने वाले सभी मार्ग बंद होने के कारण उन्हें वहां तर्पण कराना पड़ा। जब तक बाढ़ का पानी कम नहीं होता वह वहीं तर्पण कराएगें।

30 साल बाद बने हालात

बेतवा के विभिन्ना घाटों पर तर्पण नहीं होने की स्थिति 30 साल बनी है। संजय पुरोहित के मुताबिक 14 साल पहले बाढ़ का पानी होने के कारण शनिदेव मंदिर के आसपास तर्पण कराया गया था। लेकिन पशु बाजार में, जानकी कुंड के पास तर्पण कराने की स्थिति करीब 30 साल बाद बनी है। 30 साल पहले भी पितृ पक्ष के दौरान हुई भारी बारिश के कारण पशु बाजार तक पानी आ गया था। तब भी इसी प्रकार तर्पण कराना पड़ा था। उन्होंने बताया कि पहला दिन था और पूर्णिमा तिथि के श्राद्ध को लेकर विद्वान एकमत नहीं थे। इसके चलते पहले दिन कम ही लोग तर्पण करने पहुंचे। कुछ विद्वान आचार्यो के मुताबिक आज शनिवार को पूर्णिमा और प्रतिपदा दोनों तिथियों का श्राद्ध किया जाएगा।

दूसरे दिन भी निकलता रहा गणेश प्रतिमाओं का चल समारोह

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विदिशा। शुक्रवार को शहर के मुख्य बाजार से निकली गई झांकियां

विदिशा। नवदुनिया प्रतिनिधि

अनंत चतुर्दशी के मौके पर गुरूवार की दोपहर से शुरू हुआ श्रीगणेश प्रतिमाओं के निकलने का सिलसिला शुक्रवार की शाम तक जारी रहा। शहर के मुख्य बाजार से श्रद्धालु नृत्य करते, गुलाल उड़ाते बेतवा पहुंचे जहां पुल से प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। श्रीगणेश प्रतिमाओं के चल समारोह का सिलसिला गुरूवार की दोपहर में शुरू हुआ था। दिन में जहां झमाझम बारिश के बीच श्रद्धालु प्रतिमाओं का विसर्जन करने पहुंचे वहीं शाम के बाद रिमझिम बारिश के बीच झिलमिलाती रोशनी में रात भर श्रद्धालुओं ने प्रतिमाओं का विसर्जन किया। इसके लिए माधवगंज चौराहे पर श्री सनातन हिन्दू उत्सव समिति ने मंच बनाया था जहां से झांकी संचालक और अध्यक्ष को शुभकामनाएं दी जाती रहीं। सुरक्षा की द्ष्टि से अस्पताल रोड़ पर पुलिस ने चैक पाइंट बनाया था। जहां से झांकियों की जांच के बाद उन्हें आगे बढ़ाया जा रहा है। शहर के मुख्य मार्ग से निकले चल समारोह को देखने के लिए श्रद्धालु दुकानों,प्रतिष्ठानों और मकानों की छतों पर बैठे रहे। रात भर चले झांकियों के विसर्जन के बाद शेष बचीं कुछ प्रतिमाओं का विसर्जन शुक्रवार को किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे।