नदी का पानी उतरते ही कोई गृहस्थी का सामान तलाश रहा तो कोई मां का संदूक

कैथन नदी उफान पर होने से पहली बार बने थे बाढ़ जैसे हालात

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सिरोंज। बाढ़ के दौरान बही गृहस्थी की सामग्री को ढूढंती हुई महिलाएं।

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सिरोंज। पंचकुईया में बाढ़ के बाद कई मकान हुए क्षतिग्रस्त।

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सिरोंज। बाढ़ पीड़ितों को नाश्ता-चाय देते सामाजिक कार्यकर्ता।

सिरोंज। नवदुनिया न्यूज

बीते गुरूवार को शहर में दिनभर हुई मूसलाधार बारिश के कारण इस सीजन मे पहली बार शहरवारियों को बाढ़ जैसे हालात का सामना करना पड़ा। शुक्रवार को हालात कुछ सामान्य हुए तो लोग बाढ़ में बहा अपना सामान खोजते नजर आए। नगर के वार्ड क्रमांक 21 कान्हापुर-मत्थापुर, पंचकुइया इलाका, कटरा के बाग, तहसील रोड सहित आसपास के शासकीय दफतरों में पानी भर जाने से लोगों को बड़ी असुविधा हुई। दफतरों के कक्षों में पानी घुस जाने से रिकार्ड सहित अन्य इलेक्ट्रानिक सामान खराब हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की बारिश हमने पिछले 15 वर्षों से नहीं देखी। निचले इलाकों के वार्डवासियों के घर पानी में डूब जाने के बाद उनको स्थानीय प्रशासन एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें सुरक्षति स्थान पर पहुंचाया। नपा द्वारा बाढ़ पीड़ितो के लिए नपा शादीहाल एवं गोहिल भवन में रूकने एवं खाने पीने की व्यवस्था की गई थी। एसडीएम संजय जैन ने बाढ़ में फंसे लोगों की सूचना कलेक्टर को दी। जिस पर रेस्क्यू टीम विदिशा से आई जिसने देर रात 10 लोगों को बाढ़ से निकाला गया और उनको सुरक्षति स्थान पर पहुंचाया गया। उन्हें भोजन एवं रुकने की व्यवस्था की गई। उनके साथ नपा सीएमओ गिरीष श्रीवास्तव, थाना प्रभारी शकुंतला बावनिया सहित प्रशासनिक अमला मौजूद रहा।

पानी कम होते ही देखी गृहस्थी की सामग्री

शहर के कान्हापुर मत्थापुर-रानापुर पंचकइया सिकन्दपुरा का निचला इलाका कटरा बाग के लोगों ने जब नदी का पानी कम होने पर अपने घर एवं फसल सब्जी के हालात जाने तो आंसू झलक आए। कटरा बाग निवासी तारा बाई कुशवाह ने बताया कि मेरी गृहस्थी की सामग्री पूरी बह गई। कहीं पर तपेली, कहीं पर परात तो कहीं बेलना चकोटी मिट्टी में गड़े मिले। इसके अलावा मेरे बच्चों की पढ़ाई लिखाई का सामाना पूरी तरह गल गया। वहीं विनिता बाई ने बताया कि मेरी सास की संदूक बह गई जिसमें कपड़े सहित कुछ रुपये रखे हुए थे। दिनभर ढूंढने के बाद भी नहीं मिली। टीवी, कम्पयूटर में पानी भर जाने से खराब हो गए हैं। वहीं पंचकुईया निवासी मनफूल सिंह कुशवाह ने बताया कि घर में पानी भर जाने से पूरा घर धराशायी हो गया। उसमें रखी गृहस्थी की सामग्री दब गई कुछ बह गई। अनाज में पानी भर जाने के कारण खराब हो गया।

पानी के पाइप बह गए, सब्जी नष्ट

कटरा बाग निवासी ब्रजमोहन ने बताया कि हमने दो बीघा में मिर्ची, गिलकी, भिंडी, धनिया लगाया था। गुरूवार को कैथन नदी में हमारा सब कुछ बह गया। बड़ी मेहनत से हमने फसल तैयार की थी, सब पानी में बह गई। साथ ही उनके 40 से अधिक पाईप बह गए। वहीं कान्हापुर मत्थापुर, पंचकुइया रहवासी वंशीलाल, शिवचरण, कैलाश, गणेशराम, जगदीश, मोतीलाल, चुंन्नाी लाल ने बताया कि बाग में नदी के तेज बहाव के कारण पूरी तरह सब्जी बर्बाद हो गई। छात्रा लक्ष्मी, मयंक, विशाल, अमित ने रोते हुए बताया कि मम्मी हमारी कॉपी पुस्तके पानी में गल गई। अब हम पढ़ाई कैसे करेगें। वहीं 6 बर्षीय अमित की चप्पल बह गई वह अपनी चप्पल के लिए रोता रहा।

रातभर गुल रही बिजली

कैथन नदी किनारे रखा बिजली का ट्रांसफर्मर पानी में डूब जाने से वार्ड क्रमांक 17 एवं ढाल बाजार इलाके में राजभर बिजली गुल रही। जिससे वार्डवासियों को पूरी रात अंधेरे में रहना पड़ा। नदी किनारे बसे वार्डवासी लालगिर गोस्वामी ने बताया कि कमरों में पानी भर जाने एवं अंधेरा होने से रातभर सो नही पाए। कीटे मकोड़े घुसने का डर अलग लग रहा था।

मदद के लिए आगे आए समाजसेवी

शुक्रवार को प्रात? नगर के युवा कार्यकर्ता एवं अलग-अलग संगठनो के समाज सेवी नगर के बाढ़ पीडित इलाको में पहुंचे और वहां के हालात जानें। उन्होंने बाढ पीड़ितों के लिए चाय बिस्किट बांटे एवं हर संभव मदद का आश्वासन दिया। इसके अलावा वह नपा शादीहाल एवं गोहिल भवन मे बाढ़ पीड़ितों से मिलने पहुंचे। उन्हें नाश्ता भी वितरित किया। इस बीच रिंकु सुमन, राजेश पटेल, आदेश बड़सरे, सहित मौजूद रहे। बाढ़ के हालातों पर एसडीएम संजय जैन ने बताया कि बाढ़ पीड़ित इलाके में सर्वे कराने के लिए पटवारियों को निर्देश दे दिए हैं। जल्द ही इन वार्डों का सर्वे कर बाढ़ पीडि़तों को सहायता राशि दी जाएगी।

त्रिपुरी सुन्दरी घाट पर उमड़ी भीड़, पितरों को दिया पानी

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सिरोंज। घाट पर पहुंचकर पितरों को तर्पण किया।

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पितृ पक्ष के पहले दिन सैकड़ों लोगों ने नगर के कैथन नदी त्रिपुरी सुन्दर घाट पर पहुंचकर अपने पितरों को जल तर्पण किया। नदी किनारे खड़े होकर जल तर्पण किया। पितृपक्ष के पहले दिन त्रिपुरी सुन्दरी घाट पर पहुंचे लोगों ने पुरखों को पानी दिया। सुबह तड़के शुरू हुआ सिलसिला दोपहर तक चलता रहा। पितृपक्ष के पहले दिन लोगों ने मुंडन कराकर श्राद्ध भी किया।

पंडित मनोज कुमार शास्त्री के अनुसार श्राद्व पक्ष के 15 दिनों में लोग घर, नदी, तालाब पर जाकर पुरखों को पानी देते हैं। मान्यता है कि इन 15 दिनों में पुरखे धरती पर उतर जाते हैं, इसलिए उन्हें पानी दिया जाना आवश्यक है। साथ ही जल तर्पण करने वाला व्यक्ति नियम-संयम धारण करता है। घरों में स्नान करने के बाद पुरखों को पानी दिया जाता है। इसके पूर्व तिल और कुष से पूजा की जाती है। चावल और तिल छत पर रखे जाते हैं, जिन्हें पक्षी खाते हैं। कहा जाता है पूर्वज पक्षी के रूप में पहुंचकर पानी और भोजन ग्रहण करते हैं। मृत्युतिथि को श्राद्व करने की परंपरा है।

नगर में निकाला गया चल समारोह, बप्पा के जयकारे गूंजे

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सिरोंज। शहर के प्रमुख मार्गों से निकाला चल समारोह।

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दस दिवसीय गणेश आराधना के बाद गणपति बप्पा की विदाई दी गई। गुरूवार को भी विर्सजन का दौर चलता रहा। विदाई से पूर्व हवन पूजन किया गया और उसके बाद कन्याभोज का आयोजन हुआ। इसके पश्चात नगर के लोगों ने गणपति बप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ के जयकारों से गुलाल की बरसात करते हुए नाचते-गाते बैंडबाजे, ढोल मांदल, डीजे की धुन पर नगर गुंजायमान करते निकले। वहीं गणेश उत्सव समिति गणेश की अथाई द्वारा नगर में शुक्रवार को प्रातः नगर के छत्रीनाका चौराहा से भव्य चल समारोह निकाला गया। चल समारोह में गणपति प्रतिमाओं की आकर्षक साज सज्जा की गई थी। सजीव सुन्दर झांकिया सजाई गई थीं। वहीं बाल कलाकारों द्वारा कई प्रकार के रूप धारण किए हुए थे जो डीजे की धुन पर नाच रहे थे। यह जुलूस नगर के छत्रीनाका तिराहा से होते हुए नगर के कस्टम पथ, कठाली बाजार, चांदनी चौक, राज बाजार, हाजीपुर बासौदा नाका पर चल समारोह का समापन किया गया। इसके बाद नगर के कैथन डैम पहुंचकर प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। इस दौरान पुलिस प्रशासन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।