एक बीघा में सोयाबीन 70 तो उड़द निकल रहा 25 किलो

- जिले में अतिवर्षा के कारण सोयाबीन और उड़द की पैदावार घटी, किसानों की नहीं निकल पा रही लागत

फोटो 11

विदिशा। अतिवर्षा के कारण सोयाबीन की फसल चौपट हो गई है।

फोटो 2

विदिशा। फसल कटाई के बाद थ्रेसर पर बची खुची उपज निकाल रहे हैं किसान।

फोटो 3

विदिशा। कृषि उपज मंडी में नए सोयाबीन की आवक शुरू हो गई है।

विदिशा। जिले में अतिवर्षा के बाद फसलों की पैदावार देखकर किसानों को रोना आ रहा है। सोयाबीन कहीं एक बीघा में 70 किलो तो कहीं 100 किलो निकल रहा है। जबकि यह पैदावार 2 से ढाई क्विंटल तक होना थी। इससे बुरा हाल उड़द की फसल का है। हजारों रुपए खर्च करने के बाद किसानों के हाथ में एक बीघा में महज 20 से 25 किलो उड़द आ रहा है। स्थिति यह है कि बर्बादी के कारण किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही है। कई जगह तो फसल कटाई को महंगी पड़ रही है।

जिले में लगातार पिछले 4 वर्षों से प्राकृतिक आपदा के चलते किसानों की खरीफ फसल बर्बाद होते आ रही है। इस बार शुरूआती दिनों में अच्छे मौसम के कारण खेतों में सोयाबीन की फसल लहलहाने लगी थी। किसानों को उम्मीद थी कि इस बार की फसल पिछले वर्षों के सारे नुकसान को पूरा कर देगी। लेकिन अगस्त और सितंबर माह में करीब 40 दिनों तक बारिश होने के कारण किसानों की उम्मीदों की फसल चौपट हो गई। स्थिति यह है कि एक पखवाड़े बाद भी कई खेतों में जल भराव की स्थिति बनी हुई है। खेतों में खड़ी फसल सड़ गई है। एक सप्ताह से जिले में सोयाबीन की कटाई शुरू हो गई है। किसान जब थ्रेसर के बाद उपज निकाल रहा है तो उसकी मात्रा देखकर परेशान हैं।

70 किलो सोयाबीन में मजदूरी तक नहीं निकल रही

किसानों का कहना है कि अतिवर्षा के कारण फसलें बर्बाद हो गई हैं। बची खुची फसल निकालने के लिए कटाई कर रहे हैं। लेकिन कम पैदावार होने से कटाई में लगे मजदूरों की मजदूरी भी नहीं निकल रही है। नगतरा के किसान जयसिंह अहिरवार ने बताया कि उन्होंने करीब 10 बीघा में सोयाबीन बोया था। जिसमें प्रतिबीघा मात्र 70 किलो सोयाबीन निकला है। इधर, उड़द बुआई करने वाले किसानों की हालत और भी ज्यादा खराब है। पमारिया के एलमसिंह राजपूत ने बताया कि उन्होंने 30 बीघा में उड़द की फसल बोई थी। जिसमें 15 किलो के हिसाब से उड़द की पैदावार आई है। उनका कहना था कि फसल कटाई के लिए 300 रुपए रोज के मजदूर लगाना पड़ रहे हैं। लेकिन पैदावार से मजदूरी तक नहीं निकल रही है।

मवेशियों तक को खिला रहे फसल

जिले के कई ग्रामों में सोयाबीन और उड़द की सौ फीसदी फसल खराब हो गई है। लगातार बारिश के कारण खेत भी दलदल बने हुए हैं। इस स्थिति में कई किसानों ने खेत में खड़ी फसल को मवेशियों के हवाले कर दिया है। उनका कहना है कि खेतों में थोड़ी बहुत फसल अच्छी थी। लेकिन उसे काटना महंगा पड़ रहा था। इसलिए उन्होंने मवेशियों को चराना ही उचित समझा। किसानों के मुताबिक खेतों में नमी होने के कारण हार्वेस्टर चल नहीं पा रहे हैं। कटाई के लिए मजदूर भी नहीं मिल रहे हैं।

80 फीसदी तक चौपट हुई फसलें

कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में इस बार 5 लाख 30 हजार 760 हेक्टेयर में खरीफ फसल की बोवनी की गई थी। जिसमें सबसे अधिक 4 लाख 43 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन और 61 हजार हेक्टेयर में उड़द की बोवनी की गई है। प्रशासन ने भी अपनी रिपोर्ट में सौ फीसदी तक उड़द और 80 फीसदी तक सोयाबीन की फसल को नुकसान होना माना है। इसके अलावा 22 हजार हेक्टेयर में धान की बोवनी की गई है। लेकिन लगातार बारिश के कारण धान में भी बीमारी लगने लगी है।

मंडी में आने लगा नया सोयाबीन

शहर की कृषि उपज मंडी में नए सोयाबीन की आवक शुरू हो गई है। लेकिन गुणवत्ता अच्छी नहीं होने के कारण किसानों को सोयाबीन के अच्छे दाम नहीं मिल पा रहे हैं। बुधवार को कृषि उपज मंडी में नया सोयाबीन की लगभग 250 क्विंटल आवक रही। जिसके भाव न्यूनतम 3 हजार रुपए और अधिकतम 3400 रुपए प्रति क्विंटल रहे। अनाज तिलहन व्यापार संघ के अध्यक्ष राधेश्याम माहेश्वरी के मुताबिक नए सोयाबीन में मिट्टी, नमी और बारिक दाना आ रहा है। जिसकी वजह से सोयाबीन के दाम कम हैं। दीवाली तक अच्छी आवक होने के बाद भाव में 100 से 200 रुपए तक की तेजी आ सकती है।

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

Independence Day
Independence Day