सिरोंज। बेसहारा पशुओं और गायों को पहले से ही आश्रय न मिलने के कारण बहुत सी परेशानियां भोगनी पड़ रही है। प्रशासन की तरफ से गोशाला तो निर्मित करा दी गई पर उन गोशालाओं में आज तक बेसहारा घूम रही गायों को आश्रय नहीं मिल पाया। जिसकी वजह से खाने पीने से लेकर भूखा प्यासा और मूसलाधार बारिश में पेड़ों की छांव में रहना पड़ रहा है। अब उन्हें एक लंपी नामक बीमारी से ग्रसित होकर तड़पना पड़ रहा है।

समय पर इलाज ना मिलने के कारण हो रही मृत्यु

इन बेसहारा पशुओं और गायों को एक नई और मुसीबत ने घेर लिया,क्षेत्र में फैल रही लंपी नामक बीमारी से आवारा पशु और गाय ग्रसित हो रही है। यह बीमारी एक पशु से दूसरे पशु में स्थानांतरित हो जाती है। जिसकी वजह से यह और पशुओं में फैल कर गंभीर रूप धारण कर लेती है। यदि समय पर उनकी देखभाल न की गई या फिर उनका इलाज नहीं कराया गया तो उनकी मृत्यु तक हो रही है। जिसका इलाज अभी तक सरकार के पास नहीं है ना ही पशुओं के लिए इसका कोई टीके का निर्माण हो सका परंतु निरंतर देखभाल और पशु चिकित्सकों की सलाह से और उनके द्वारा दिए जा रही दवा लगातार इन पशुओं और गायों को खिलाई जाए तो रोग में कुछ हद तक सुधार आ सकता है।

समाजसेवी कर रहे है पशुओं का उपचार

ग्राम बागरोदा में कुछ समाजसेवियों द्वारा एक ऐसा ही पुनीत कार्य किया गया जिसमें ग्राम में घूम रही बेसहारा गाय और पशुओं को पकड़ कर उचित पशु चिकित्सक से सलाह ली गई और उसके बाद उनका प्राथमिक उपचार किया गया। जो भी पशु इस रोग से ग्रसित थे उन्हें पकड़ कर मरहम पट्टी की गई और एक जगह एकत्रित किया गया.।डॉक़्टरों का कहना है कि यह रोग बहुत ही भयानक है जिसका लगातार इलाज होना बहुत ही अनिवार्य है ।असहाय बेसहारा एवं घरेलू गाय का घर घर जाकर उपचार करने वालो में धर्मेंद्र सिंह, नरेंद्र रघुवंशी ,विष्णु रघुवंशी, शिवराज रघुवंशी एवं सोनू नामदेव शामिल है।

पशुओं का समय पर कराएं इलाज

ब्लॉक पशुचिकित्सक अधिकारी आकाश शुक्ला ने बताया कि लंपी नामक रोग क्षेत्र में ही नहीं पूरे राज्य में यह बीमारी फैली हुई है जिसकी वजह से गायों और पशुओं को पहले पैर में सूजन आती है उसके बाद शरीर में उभरे हुए चिट्ठे आते हैं जिनमें घाव बनता है और उन घाव में विभिन्ना तरह के रोग कीड़े लग जाते हैं जिसकी वजह से घावो से खून आने लगता है और चलने में परेशानी होता है। गंभीर स्थिति में पशुओं की मौत की संभावना भी रहती है। यह लंपी नामक रोग गायों और पशुओं में फैल रहा है जिसके लिए शासन द्वारा अभी तक कोई टीका नहीं बना परंतु पशु चिकित्सकों की सलाह से एवं निरंतर घर पर इन पशुओं की देखभाल की जाए तो इस रोग को नियंत्रण कर सकते हैं। पशु चिकित्सक की सलाह लेकर रोगी पशुओं को यह उचित दवाई मेडिकल से लेकर सुबह-शाम एक-एक गोली वैटशिप 3, मेविल, गोली और, ओरल टोपिकयूर एसजी स्प्रे के निरंतर प्रयोग से रोग ठीक किया जा सकता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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