विदिशा। स्कूलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्रवेश लेने के लिए बच्चों ने रुचि नहीं दिखाई। प्रथम चरण में जहां करीब 45 फीसद बच्चों ने प्रवेश लिया था वहीं द्वितीय चरण में इनकी संख्या और घट गई है। करीब 35 फीसद ही बच्चों ने प्रवेश लिया है। जिसके चलते निजी स्कूलों में सीट खाली रह गई हैं।

कोरोना संक्रमण के चलते लंबे समय तक स्कूल बंद रहे थे। जिसके चलते शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत पिछले साल बच्चों को निजी स्कूलों में निश्शुल्क प्रवेश नहीं मिल सका था। 17 माह बाद जब स्कूल शुरू हुए तो पहले चरण में इस साल के लिए बच्चों को प्रवेश दिया गया। आवेदन करने में लोगों ने खूब रुचि दिखाई, लेकिन स्कूलों में दाखिला लेने नही पहुंचे। जिसके चलते पहले ही चरण में बड़ी संख्या में सीट खाली रह गई थीं। इसके बाद सरकार ने द्वितीय चरण की प्रक्रिया शुरू की जिसमें 6 हजार 700 से अधिक बच्चों को प्रवेश देने के लिए सीट आरक्षित की गई थी, लेकिन 2 हजार 232 लोगों ने ही प्रवेश लेने के लिए आवेदन किया था। इसके बाद जिले में 1 हजार 979 सीट स्कूलों में प्रवेश के लिए आरक्षित की गई थी। इसमें से भी मात्र 1857 बच्चों ने ही प्रवेश लिया है। इस संबंध में डीपीसी एसपी सिंह जाटव का कहना है कि ज्यादातर बच्चों ने जिले के बड़े स्कूलों में प्रवेश के लिए आवेदन किए थे, लेकिन सभी जगह स्कूलों में सीट तय होती हैं उससे ज्यादा प्रवेश नहीं मिल सकता। मनपसंद का स्कूल नहीं मिलने के कारण बच्चे प्रवेश नहीं लेते।

Posted By: Nai Dunia News Network

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