विदिशा। पिछले 12 साल से शहर में कुत्तों की नसबंदी नहीं हुई है जिससे कुत्तों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। हालात यह हैं कि हर गली में आबारा कुत्तों की फौज तैयार हो गई है जो राहगीरों को अपना निसाना बना रही है। इधर नपा के अधिकारियों का कहना है कि नसबंदी कराने के लिए उनके पास बजट नहीं है। बता दें कि शहर में कुत्तों की संख्या बढ़ने के साथ ही उनके द्वारा हमलों में घायलों की संख्या भी बढ़ने लगी हैं। जिसके चलते हर माह 800 से ज्यादा लोगों को जिला अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि कुत्तों के हमलों से परेशान लोगों की नपा में जानकारी नहीं होती। संबंधित क्षेत्र के नाकेदार द्वारा समय-समय पर जानकारी दी जाती है, लेकिन कोई ध्यान नहीं देता। तीन दिन पहले खरीफाटक रेलवे गेट से अरिहंत बिहार कालोनी के अंदर तक एक पागल कुत्ते ने करीब 15 लोगों पर हमला किया था। बाद में किसी जागरूक नागरिक की शिकायत पर नपा के अमले ने उसे पकड़ लिया था। ऐसा ही एक मामला करैयाखेड़ा क्षेत्र में हुआ था यहां पर एक पागल कुत्ता ने ऐसा आतंक मचाया था कि एक घंटे तक मुख्य मार्ग से लोग निकल ही नहीं सके थे। उसने मोटर साइकल चालकों के अलावा मवेशियों तक पर हमले किए थे। लोगों का कहना है कि इन दिनों ठंड अधिक होने के कारण लोग गर्म कपड़ों में दुबके टोपा और मास्क लगाकर रात में जब निकलते हैं तो सड़कों पर जगह-जगह उन्हें कुत्तों से बचना होता है।

मार्निंग वॉक पर जाते हैं तो लगता है डर

सुबह-सुबह घूमने जाने वाले लोगों का कहना है शहर में कुत्तों की धरपकड़ होनी चाहिए। सुबह जब वह लोग घूमने निकलते हैं, तो उन्हें इस बात का डर बना रहता है कि कोई कुत्ता हमला नहीं कर दे। बुजुर्ग केएन शर्मा का कहना है कि वह रोज घूमने जाते है, लेकिन उन्हें कुत्तों से बचने के लिए सतर्क रहना होता है। कई बार कुत्ते बगैर किसी कारण के हमला कर देते हैं।

पिछले 12 साल से कुत्तों की नसबंदी नहीं हुई है। कुत्तों की नसबंदी कराने बजट नहीं मिलता। फिर भी हम जल्दी ही कुत्तों की धरपकड़ करने की तैयारी में है। कुत्तों को पड़ककर जंगल में छोड़ा जाएगा।

- राजेश शर्मा, स्वास्थ्य निरीक्षक नपा

Posted By: Nai Dunia News Network

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