विदिशा। कोरोना महामारी के चलते एतिहासिक श्रीरामलीला में इस साल लीला का मंचन देखने दर्शकों को प्रवेश की अनुमति नहीं रहेगी, लेकिन इंटरनेट मीडिया (फेसबुक, यूट्यूब) के माध्यम से जरूर रामलीला का लाइव प्रसारण किया जाएगा। इसके अलावा शहर के मुख्य बाजार से भगवान श्रीराम और भगवान शिव की बरात भी नहीं निकाली जाएगी। रामलीला प्रांगण में ही सांकेतिक बरात निकालकर लीलाएं शुरू करा दी जाएगीं। खास बात यह भी रहेगी कि इस साल बगैर सेनाओं की मदद से राम और रावण का युद्ध होगा। बता दें कि 14 जनवरी से शुरू होने वाले एतिहासिक श्रीरामलीला मेला में कोरोना संक्रमण के चलते यह पहली बार हो रहा है कि चार दीवारी के अंदर ही मंचन किया जाएगा और इस मंचन को देखने केि लिए दर्शक नहीं होंगे। श्रीरामलीला मेला समिति के उप प्रधान संचालक डा. सुधाशु मिश्र बताते हैं कि जनवरी के पहले हुई बैठक में 27 दिन की लीलाएं करने का निर्णय हुआ था। शासन की गाइड लाइन आने के बाद इसे घटाकर 20 दिन की कर दी गई थी, लेकिन इस माह तेजी से फैल रहे संक्रमण के चलते अब 18 दिन में 27 दिन होने वाली लीलाएं करने का निर्णय लिया गया है। जिसके चलते एक दिन में दो से तीन लीलाएं की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रमुख पात्र अपनी तैयारियों में लगे हुए हैं। रामलीला का मंचन हमेशा की तरह शाम को चार बजे से शुरू हुआ करेगा। इस साल रामलीला में आने वाले अन्य सभी पदाधिकारियों को कोरोना गाइड लाइन का पालन करना होगा।

बगैर सेना के होगा राम और रावण दल में युद्ध

रामलीला में होने वाले 27 दिन के मंचन में आखरी के 10 दिन राम और रावण दल में घमासन युद्ध की लीलाएं दिखाई जाती थी, लेकिन इस साल कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए प्रांगण में होने वाले राम और रावण दल का युद्ध बगैर सैना का कराया जाएगा। अभी तक दोनों दल से करीब 25 से 30 जोड़ प्रमुख योद्वाओं के अलावा 50 से ज्यादा सैनिक होते थे जिससे पूरा ग्राउंड भर जाता था, लेकिन इस साल गिने-चुने योद्वा और दोनों दलों में पांच-पांच सैनिक ही युद्ध में शामिल किए जाएंगे। युद्ध में साथ चलने वाले बैंड को भी पूरे ग्राउंड में चलने की अनुमति नहीं रहेगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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