विदिशा(नवदुनिया प्रतिनिधि)। नगर पालिका चुनाव में मतदान को महज नौ दिन बचे हैं लेकिन राजनैतिक दलों के चुनाव प्रचार से विकास का मुद्दा पूरी तरह गायब हैं। शहर में न तो जागरूक मतदाता अपने प्रत्याशियों से सवाल कर रहे हैं और ना ही प्रत्याशी शहर और वार्ड के विकास को लेकर अपना दृष्टिकोण मतदाताओं के सामने रख रहे हैं। राजनैतिक दल पहली बार प्रत्याशियों के चेहरों पर लोगों से वोट मांग रहे हैं। नगर पालिका चुनाव के लिए पिछले एक सप्ताह से प्रत्याशियों का प्रचार जोरों पर हैं। वार्डो में प्रत्याशी समूह के रूप में पहुंचकर लोगों से अपने पक्ष में मतदान का आग्रह कर रहे हैं और साथ में मतदाताओं को अपने नाम और प्रतीक चिन्ह का पर्चा थमा रहे है । इस दौरान वे मतदाताओं से हाथ जोड़कर तो कहीं पैर पड़कर आशीर्वाद मांग रहे हैं। शहर के 39 वार्डों में इसी तरह का प्रचार चल रहा है लेकिन कोई शहर के समग्र विकास की बात नहीं कह रहा। इस दौरान मतदाता भी प्रत्याशियों से कोई सवाल नहीं कर रहे हैं।यही वजह हैं कि पहली बार नगर पालिका के चुनाव में विकास का मुद्दा गायब हैं।

भाजपा गिना रही राज्य की उपलब्धियां, कांग्रेस बता रही कमियां

राजनैतिक दलों के नेता भी वार्डों में जाकर कार्यालयों का उद्घाटन कर रहे हैं।मोहल्लों में रैलियां निकाल रहे हैं, लेकिन वे भी शहर की बड़ी समस्याओं के निराकरण की कार्ययोजना को लेकर कोई बात नहीं कर रहे। भाजपा के नेता प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को गिनाने में लगे हैं। इसके अलावा प्रदेश में कांग्रेस कार्यकाल के दौरान शहर का विकास रुकने की बात कह रहे हैं वहीं कांग्रेस के नेता शहर का सर्वांगीण विकास नहीं किए जाने के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

यह हैं शहर की बड़ी समस्याएं , जो मुद्दा नहीं बन पा रही

- शहर की जीवनदायिनी कहलाने वाली बेतवा नदी में अब भी शहर के गंदे नालों का पानी मिल रहा हैं।जिसके कारण बेतवा नदी का पानी प्रदूषित हो रहा हैं। पिछले कई वर्षो से यह समस्या बनी हुई हैं। इस चुनाव में राजनैतिक दलों को बताना चाहिए कि वे इस समस्या का निराकरण कैसे और कब तक करेंगे।

- शहर में पेयजल और सीवेज पर लाखों रूपये खर्च किए जा चुके हैं, इसके बावजूद शहर के कई मोहल्लों में पेयजल की समस्या बनी हुई हैं। शहर के आधे घरों में सीवेज की समस्या बनी हुई हैं।

- शहर में पिछले दो वर्षों से निर्माण कार्य बंद पड़े हुए हैं। राज्य सरकार से अनुदान नहीं मिलने के कारण बारिश के पहले सड़कों की स्थिति बदहाल हो गई हैं। बारिश के सीजन में शहर के कई क्षेत्रों में जल भराव की स्थिति बनेगी। इसके निराकरण की बात भी चुनाव के समय होना चाहिए।

- शहर के भीतर संचालित दूध डेरियों को शहर से बाहर शिफ्ट करने की बात पिछले कई वर्षों से की जा रही हैं लेकिन आज भी डेरिया रहवासी बस्तियों में ही संचालित हो रही हैं।जिसके कारण वार्डों में गंदगी की समस्या बरकार हैं।

- शहर में अतिक्रमण बड़ी समस्या हैं। शहर के भीतर की कई गलियां अतिक्रमण में गायब हो गई हैं।मुख्य सड़कें तक अतिक्रमण की चपेट हैं। इसकी वजह से हर रोज शहर का यातायात प्रभावित होता हैं। इस समस्या का भी अब तक स्थायी समाधान नहीं खोजा जा सका हैं।

नागरिक बोले ( सभी फोटो नाम से )

चुनाव में राजनैतिक दलों को मुद्दे की बात करना रास नहीं आता। दलों के नेता जनता को गफलत में रखकर मनमर्जी से काम करना चाहते हैं। यही वजह है कि कोई प्रत्याशी न तो यह बता रहा कि पूर्व परिषद ने कितने वादे पूरे किए, कितनी राशि से कितना विकास हुआ। कोई यह भी सवाल नहीं उठा रहा कि अगले पांच साल के विकास का खाका क्या होगा। मतदाताओं ने चुनाव को गंभीरता से लेना बंद कर दिया। जिसकी वजह से चुनाव मुद्दा विहीन हो गया हैं।

- प्रमोद व्यास, सामाजिक कार्यकर्ता, विदिशा।

नगरीय विकास में स्थानीय निकाय एंव उसके जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण हुआ करती है। विदिशा नगरपालिका चुनाव में पहली बार विकास की बात करने के बजाय उम्मीदवारों का राजनैतिक एंव आर्थिक दंबगता का प्रर्दशन हावी है। बेतवा का प्रदूषण,अतिक्रमण,अवैध कालोनियों पर अंकुश,गली मोहल्लों की सड़कों-नालियों की दुर्दशा की चर्चा तक नहीं है। जनता की लोकतांत्रिक संस्था के निर्माण में अर्थतंत्र का हावी होना,भावी नगर पालिका के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।

- विनोद के शाह, आरटीआइ कार्यकर्ता, विदिशा।

नपा चुनाव में राजनैतिक दलों ने नगर के प्रमुख मुद्दों को छोड़ दिया हैं। बेतवा नदी के संरक्षण संवर्धन, शुद्ध पेयजल,अच्छी सड़क, नालों का अतिक्रमण, नियमित साफ-सफाई, और गली मोहल्ले, चौक चौराहों पर रोशनी, बच्चों के लिए खेल मैदान, पार्क आदि का निर्माण एवं नगर में जगह जगह घूमते बेसहारा पशुओं का इंतजाम जैसे अनेक मुद्दे चुनाव प्रचार से गायब हैं। मतदाताओं को धन बल का प्रलोभन देकर अपने पक्ष में मतदान कराने की कवायद चल रही हैं। राजनैतिक दलों को यह चुनाव मुद्दा आधारित बनाना चाहिए।

- नीरज चौरसिया, उपाध्यक्ष विदिशा व्यापार महासंघ

Posted By: Nai Dunia News Network

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