श्योपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

कोरोना और पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए एटीएम में भी पेपरलेस बैकिंग शुरू हो गई है। रुपये निकालने के लिए आने वाले लोगों में से 30 फीसद ग्राहक ऐसे हैं जो पर्ची नहीं ले रहे हैं। ये आंकड़ा बैंकों के पास मौजूद रिकार्ड के अनुसार है। बैंक अधिकारियों के मुताबिक ये अच्छी शुरुआत है।

यहां बता दें, कि एटीएम में रुपये निकासी के बाद स्क्रीन पर स्लिप चाहिए या नहीं का ऑप्शन आता है। अब ऐसे ग्राहक बढ़ रहे हैं जो 'नो' का ऑप्शन चुन रहे हैं। ऐसे ग्राहकों का आंकड़ा बढ़ रहा है और यह 30 फीसद पहुंच गया है। बैंक अधिकारियों के मुताबिक आने वाले दिनों में आंकड़ा और बढ़ेगा। शहर में अभी बैंकों के कुल 35 एटीएम हैं। इनमें 2 से 3 हजार बैंक ग्राहक रोज रुपये निकालते हैं। यह निकासी 60 से 70 लाख रुपये है। इससे बैंकों को फायदा है। इससे कॉटेज नहीं लगाना पड़ रही है। एटीएम में स्लिप का कचरा भी नहीं हो रहा है। उपभोक्ताओं की इस पहल से महीने भर में 1.20 क्विंटल कागज की बचत हो रही है। एक एटीएम में महीने भर में पांच से छह पेपर रोल पर्ची के लिए डालते हैं। इस तरह एक एटीएम में महीने भर में 10 से 12 किलो कागज लगता है। शहर में 35 एटीएम महीने भर यह वेस्ट 500 किलो ग्राम के करीब होता है। 30 फीसदी ग्राहकों के हिसाब से 1.20 क्विंटल कागज की बचत हो रही है।

़दो तर्क

1- किसी भी तरह की निकासी पर मोबाइल पर मैसेज आता है।

2- पर्ची पर जो लिखा होता है वह ज्यादा दिन तक कायम नहीं रहता

रुपये निकासी के बाद पर्ची की जरूरत नहीं

लीड बैंक के प्रबंधक सुरेन्द्र पाठक के मुताबिक वैसे भी निकासी के बाद पर्ची की जरूरत नहीं है। कई एटीएम में तो निकासी के बाद तुरंत सामने बैलेंस नजर आ जाता है। कई उपभोक्ता पर्ची लेकर उस पर बैलेंस देखकर वहीं फाड़ कर फेंक देते हैं। इससे एटीएम बूथ गंदा होता है। उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर अकाउंट से जुड़े हैं। इससे किसी भी तरह की निकासी होने पर तुरंत मैसेज आ जाता है। इससे पर्ची की कोई जरूरत नहीं है। ये भी एक तरह की पेपरलेस बैकिंग है।

़लोग नो का ऑप्शन चुन रहे हैं

लीड बैंक प्रबंधक श्री पाठक ने बताया एटीएम में रुपये निकालने के बाद यस और नो का ऑप्शन आता है। लोग नो का ऑप्शन भी चुन रहे हैं। उपभोक्ता यदि पर्ची के लिए मना कर रहे हैं तो अच्छी बात है। लोग पेपर लेस बैकिंग की तरफ जागरुक हो रहे हैं। इससे हमें भी फायदा है।

पेपर स्लिप लेने से कागज की बर्बादी होती है

शहरवासी सुजीत सिंह के मुताबिक एटीएम से रुपये निकालने के दौरान मोबाइल पर एसएमएस आ जाता है, इसके अलावा पेपर स्लिप लेने से कागज की बर्बादी भी होती है। इसलिए वह जब भी एटीएम से रुपये निकालते हैं तो स्लिप का ऑप्शन आने पर वह नो का बटन दबाते हैं।

इंडस्ट्रियल वुड का 42 फीसदी कागज में

पर्यावरणविद् प्रोफेसर आरके शर्मा बताते हैं कि जंगलों का सफाया करने में कागल उद्योग का सबसे बड़ा हाथ है। इंडस्ट्रियल वुड का 42 फीसदी यूज कागज बनाने में होता है। एक किलो लकड़ी के बदले 2.5 किलो साधारण कागज बन पाता है। इसके लिए इस्तेमाल लकड़ी साधारण नहीं होती है। इसे प्राप्त करने के लिए कई पेड़ों की बलि चढ़ाना पड़ती है। कागज के लिए कटे पेड़ों से फूड चेन प्रभावित होता है, जिससे जैविक प्रभाव पड़ते हैं।

फ़ोटो नंबर 1कैप्शन : शहर में स्थित एसबीआइ का एटीएम।

Posted By: Nai Dunia News Network

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