फोटो नंबर 12,13

देवेन्द्र गौड़

सोंईकलां। खरीफ के सीजन में किसानों को अच्छा फायदा पहुंचाने वाली धान की इस वार भारी कम पैदावार हुई है। सबसे ज्यादा नुकसान उन किसानों को उठाना पड़ा है। कोरोना काल में मजदूरों की उपलब्धता नहीं होने के कारण रोपाई की बजाए उराई वाली (गेहूं की तरह बोवनी कर) धान की फसल खेतों में की थी। फसल पकने के बाद धान की पैदावार बेहद कम हुई है। इससे किसानों द्वारा खेती पर किया गया खर्च भी नहीं निकल पा रहा है। इससे अन्नादाता चिंतित हो उठा है।

सोंईकलां कस्बे के किसान बृजेश मीणा ने बताया, कि उन्होंने इस बार उराई पद्धति से 6 बीघा भूमि बटाई पर लेकर धान की फसल की थी। देखने में यह फसल रोपाई वाली धान से कई गुना बेहतर लग रही थी। फसल पकने के बाद कंपाइन (हार्वेस्टर) से उसकी कटाई करवाई, तो 6 बीघा में महज 2 क्विंटल धान ही निकला। जिससे जुताई-बुवाई के खर्चे निकलना तो दूर कंपाइन से फसल कटाई का खर्चा भी नहीं निकल सका। जिसे देखकर अन्नादाता के आंसू निकल पडे़ और उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों पर मनमानी और उनकी फसलों की अनदेखी करने के आरोप लगाते हुए कहा कि, कृषि विभाग के अधिकारी अगर उन्हें सलाह देने और उनकी फसलों को देखने के लिए खेतों पर पहुंचते तो उनकी फसलें बर्बाद होने से बच जातीं।

6 बीघा में खर्चा 36 हजार का और फसल 3600 रुपये की निकली :

उराई की धान की फसल करने वाले सोंईकलां, नंदापुर और ददूनी इलाके के किसानों द्वारा बताया गया है,कि धान की बोवनी से लेकर कटाई तक 5500 रुपये बीघा के हिसाब से उनका खर्चा 36 हजार रुपये हो चुका है,लेकिन कटाई के बाद फसल सिर्फ 3600 रुपये की हुई है। पिछले साल इसी 6 बीघा के खेत में 30-35 क्विंटल धान होती थी। जिसकी कीमत 1 लाख रुपये के आसपास होती थी, लेकिन इस बार महज 2 क्विंटल ही धान होने से किसान को खेती खर्चे में 31 हजार 400 रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। इस तरह की स्थिति सिर्फ बृजेश ही नहीं बल्कि, पूरे इलाके के 40 फीसद किसान इसी समस्या से जूझ रहे हैं और शासन से बीमा सहायिता राशि दिलाए जाने की मांग कर रहे हैं।

वर्जनः

मैंने बटाई पर 6 बीघा जमीन लेकर उराई बाली धान की फसल की थी, जिसमें महज 2 क्विंटल धान निकल सकी है। जिससे खेती में लगाई गई लागत का खर्चा निकलना तो दूर कंपाइन की कटाई की राशि भी नहीं निकल सकी है। ऐसी स्थिति हमारे क्षेत्र के ज्यादातर किसानों की है। यह सारी गलती कृषि विभाग के अधिकारियों की है।

बृजेश मीणा, किसान सोंईकलां

वर्जन :

उराई वाला धान देखने में बहुत अच्छा था, लेकिन उपज बेहद कम हुई है। हर साल इसी जमीन में 25 से 30 क्विंटल फसल होती थी। इस बार 2 क्विंटल ही निकली है। कृषि विभाग के अधिकारी समय-समय पर हमें जानकारी देते रहते तो शायद हमें इतना ज्यादा नुकसान नहीं उठाना पड़ता।

शंभूदयाल गुप्ता, किसान सोंईकलां

वर्जन :

इस बार जिले में 41 हजार हैक्टेयर में किसानों ने धान की फसल की थी। ऐसा तो नहीं हो सकता कि 6 बीघा में महज 2 क्विंटल धान हों, अगर वाकई में ऐसा हुआ है तो या तो किसान ने उसमें पानी नहीं दिया होगा या फिर कोई रोग लग गया होगा। जिसकी जानकारी हमें नहीं है।

पी गुजरे, सहायक संचालक कृषि विभाग

कैप्शन : किसान के खेत में इस तरह खड़ी थी धान की फसल, फाइल फोटो

- 6 बीघा में खेत में निकली 2 क्विंटल धान ट्रॉली में रखी हुई ।

Posted By: Nai Dunia News Network

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